असम एनआरसी : एक ही आदमी की दो जांचें, दो मुकदमे और दो फैसले

25 नवंबर 2019
35 वर्षीय जलाल शेख फिलहाल अपनी दूसरी समीक्षा याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.
जलाल शेख
35 वर्षीय जलाल शेख फिलहाल अपनी दूसरी समीक्षा याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.
जलाल शेख

गुवाहाटी के एक विदेशी न्यायाधिकरण के समक्ष पेश असम सीमा पुलिस की एक जांच रिपोर्ट की माने तो पास जलाल शेख अनपढ़ भी हैं और आठवीं पास भी. उनके पांच बच्चों की संख्या चार है. वह 2013 में पहली बार गुवाहाटी आकर राजमिस्त्री का काम करने लगे और 2012 में भी पहली बार ही यहां आकर बेकरी में काम करने लगे थे. 35 वर्षीय शेख राज्य के डुबरी जिले के पटनरकुटी गांव के रहने वाले हैं. 2015 के आखिर में, सीमा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर बाबुल कलिता ने शेख पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया और दो महीने के भीतर ही शेख के खिलाफ जांच शुरू करने की मंजूरी के लिए कामरूप जिले के पुलिस उपायुक्त को दो अलग-अलग रेफरल भेजे.

अगले दो महीनों में, कलिता ने गुवाहाटी के अलग-अलग इलाकों में दो अलग-अलग लोगों के रूप में शेख की जांच की. दोनों सिफारिशों को डीसीपी कार्यालय द्वारा अलग-अलग मामलों के रूप में अनुमोदित किया गया. यहां तक कि कलिता ने दोनों सिफारिशों में शेख की उंगलियों के निशान लेने का दावा किया. मार्च 2016 तक, तत्कालीन डीसीपी ने कलिता की जांच रिपोर्टों को सही मानते हुए, शेख के विदेशी होने के दो मामले दर्ज करने की रिपोर्ट गुवाहाटी के एक विदेशी न्यायाधिकरण को भेजी.

कलिता की जांच के नतीजतन, शेख को न्यायाधिकरण से दो बार विदेशी घोषित किया गया है. पहली बार नवंबर 2017 में और दूसरी बार दिसंबर 2018 में. दोनों फैसलों के बाद शेख ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने अप्रैल 2018 में पहले के फैसले को पलटते हुए पुनर्विचार का आदेश दिया जिसमें शेख को दूसरी बार दोषी ठहराया गया. फिलहाल शेख अपनी दूसरी समीक्षा याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उनका मामला विदेशी न्यायाधिकरण की गड़बड़ियों को खोल कर रख देता है. विदेशी न्यायाधिकरण एक अर्ध-न्यायिक निकाय है जो अपने नियम तय करने का अधिकार रखता है. यह दर्शाता है कि न्यायाधिकरण एक ही अपराध के लिए व्यक्ति की दो जांच कर सकता है. प्रत्येक न्यायाधिकरण सबूत स्वीकार करने के अपने ही मापदंड तय कर सकता है और साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों का अपने मनमुताबिक उपयोग कर सकता है. सबसे डरावनी बात तो यह है कि न्यायाधिकरण ऐसे पुलिस अधिकारी की ढाल बन सकता है जिसने किसी व्यक्ति को अवैध आव्रजक घोषित करने के लिए जाली साक्ष्य तैयार किए हों.

20 दिसंबर 2015 को कलिता ने पहली रिपोर्ट दायर की, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें शक है कि शेख बांग्लादेशी है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीयता साबित करने का "संतोषजनक ब्यौरा" नहीं दे पाया. 15 फरवरी 2016 की कलिता की दूसरी जांच रिपोर्ट में कहा गया है, "मुझे मुहम्मद जलाल शेख का कोई पता नहीं चल सका ... व्यक्ति बांग्लादेश का है और इसीलिए वह उस जगह से भाग निकला और हम उसका पता नहीं लगा सके." दिसंबर 2016 में शेख ने न्यायाधिकरण में एक लिखित बयान दर्ज किया जिसमें उनके और उनके परिवार का विवरण था. इनमें से कोई भी विवरण कलिता की शुरुआती दो सिफारिशों में किए गए वर्णन से मेल नहीं खाता.

अपने बयान में, शेख ने कहा था कि वह भारतीय हैं और जांच रिपोर्ट "मनगढ़ंत" है. हालांकि, फरवरी 2017 में शेख उस सुनवाई में पेश होने से चूक गए जिसमें उन्हें अपनी नागरिकता का सबूत देना था. उसी साल अगस्त में उनके वकील ने केस लड़ने से मना कर दिया और शेख बिना वकील के रह गए. शेख इसके बाद अपनी किसी भी सुनवाई में जा नहीं सके और न्यायाधिकरण ने एकतर्फा कार्यवाही शुरू ​की और दोनों ही मामलों में उनकी गैरहाजरी में जांच की गई. नवंबर में न्यायाधिकरण ने सबूत के अभाव का कारण बता कर दोनों मामलों में शेख को विदेशी घोषित कर दिया.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: NRC Assam BJP Foreigners Tribunal Assam Accord
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