जज लोया की मौत: लोया के साथ रवि भवन में ठहरने वाले दो जजों के नाम की सिफारिश बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाने के लिए की गई

21 सितंबर 2018
बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाए जाने के लिए जिन चार जजों के नाम की सिफारिश की गई है उनमें एसएम मोदक और वीजी जोशी के नाम भी हैं जो अलग-अलग कारणों की वजह से उन परिस्थितियों का हिस्सा थे जिनकी वजह से जज बीएच लोया की मौत हुई.
कुनाल पाटिल/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाए जाने के लिए जिन चार जजों के नाम की सिफारिश की गई है उनमें एसएम मोदक और वीजी जोशी के नाम भी हैं जो अलग-अलग कारणों की वजह से उन परिस्थितियों का हिस्सा थे जिनकी वजह से जज बीएच लोया की मौत हुई.
कुनाल पाटिल/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस

सुप्रीम कोर्ट के कलेजियम ने 11 सितंबर को चार जजों- एसएम मोदक, वीजी जोशी, एनजे जमादार और आरजी अवचट के नामों की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. इनके नामों का प्रस्ताव इन्हें प्रमोट करके बॉम्बे हाई कोर्ट में लाने के लिए पारित किया गया था. इनमें से मोदक और जोशी नाम के दो जज अलग-अलग कारणों की वजह से उन परिस्थितियों का हिस्सा थे जिनकी वजह से जज बीएच लोया की मौत हुई.

मोदक ने दावा किया था कि वह लोया के साथ रवि भवन में ठहरे थे. रवि भवन नागपुर का एक सरकारी गेस्ट हाउस है. यह वही गेस्ट हाउस है जहां लोया की मौत हुई थी. लोया 30 नवंबर से एक दिसंबर 2014 के बीच यहां ठहरे थे. लोया की मौत से जुड़ी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि वह एक साथी जज के बेटे की शादी में शरीक होने नागपुर गए थे. लेकिन महाराष्ट्र लॉ डिपार्टमेंट के नागपुर ऑफिस से 27 नंवबर 2014 को जारी की गई एक सरकारी चिट्ठी में लिखा है कि जोशी और लोया “30.11.2014 की अहले सुबह से 1.12.2014 की शाम सात बजे तक सरकारी काम की वजह से” रवि भवन में रुकने वाले थे.

कलेजियम का फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट की एक पूर्व न्यायधीश मंजुला चेल्लूर की सिफारिश पर आधारित है. उन्होंने ही दो सबसे सीनियर जजों के साथ मिलकर 28 नवंबर 2017 को मोदक, जोशी और चार और जजों के नाम की सिफारिश की थी. गौर करने लायक बात है कि महाराष्ट्र सरकार के खुफिया विभाग ने इसी दिन राज्य सरकार को एक “विचारशील रिपोर्ट” सौंपी थी. इस पर भी 28 नंवबर की ही तारीख दर्ज थी. इसका निष्कर्ष ये था कि जज लोया की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी. निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाकी के दस्तावेजों के साथ खुफिया विभाग ने इसमें वह बयान भी शामिल किया था जिसे मोदक ने दिया था.

खुफिया विभाग द्वारा रिपोर्ट दिए जाने के एक हफ्ते पहले द कैरवन ने दो खबरें ब्रेक कीं. इन खबरों में लोया के परिवार द्वारा उनकी मौत से जुड़ी रहस्यमयी परिस्थितियों को लेकर जताए गए संदेह के अलावा उन्हीं द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मोहित शाह पर लगाए गए आरोपों के बारे में बताया गया था. लोया के परिवार ने जस्टिस शाह पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सोहराबुद्दीन मामले में उनके कहे  अनुसार फैसला देने पर लोया को 100 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी. सोहराबुद्दीन के जिस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मुख्य आरोपी हैं, लोया जून 2014 से उस मामले के जज थे. मोदक ने खुफिया विभाग को 24 नंवबर 2017 को अपना बयान दिया. यानी मामले में रिपोर्ट दिए जाने और चेल्लूर की सिफारिश के चार दिन पहले ये बयान दिया गया था.

कलेजियम के प्रस्ताव पास करने के छह दिनों बाद 17 सिंतबर को नागपुर के एक वकील आरपी जोशी ने जस्टिस रंजन गोगोई को एक लिखित शिकायत की. 3 अक्टूबर को भारत के चीफ जस्टिस की शपथ लेने जा रहे गोगोई से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की गई थी. वकील ने हमें बताया कि उसने उस महीने के अलावा जुलाई में भी मोदक के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई थीं. ये शिकायत जस्टिस दीपक मिश्रा, बॉम्बे हाई कोर्ट और केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास भेजी गई थीं. लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं आया.

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