जज लोया की मौत : लोया के साथ रवि भवन में ठहरने वाले दो जजों के नाम की सिफारिश बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाने के लिए की गई

बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाए जाने के लिए जिन चार जजों के नाम की सिफारिश की गई है उनमें एसएम मोदक और वीजी जोशी के नाम भी हैं जो अलग-अलग कारणों की वजह से उन परिस्थितियों का हिस्सा थे जिनकी वजह से जज बीएच लोया की मौत हुई.
कुनाल पाटिल/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाए जाने के लिए जिन चार जजों के नाम की सिफारिश की गई है उनमें एसएम मोदक और वीजी जोशी के नाम भी हैं जो अलग-अलग कारणों की वजह से उन परिस्थितियों का हिस्सा थे जिनकी वजह से जज बीएच लोया की मौत हुई.
कुनाल पाटिल/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस

सुप्रीम कोर्ट के कलेजियम ने 11 सितंबर को चार जजों- एसएम मोदक, वीजी जोशी, एनजे जमादार और आरजी अवचट के नामों की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. इनके नामों का प्रस्ताव इन्हें प्रमोट करके बॉम्बे हाई कोर्ट में लाने के लिए पारित किया गया था. इनमें से मोदक और जोशी नाम के दो जज अलग-अलग कारणों की वजह से उन परिस्थितियों का हिस्सा थे जिनकी वजह से जज बीएच लोया की मौत हुई.

मोदक ने दावा किया था कि वह लोया के साथ रवि भवन में ठहरे थे. रवि भवन नागपुर का एक सरकारी गेस्ट हाउस है. यह वही गेस्ट हाउस है जहां लोया की मौत हुई थी. लोया 30 नवंबर से एक दिसंबर 2014 के बीच यहां ठहरे थे. लोया की मौत से जुड़ी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि वह एक साथी जज के बेटे की शादी में शरीक होने नागपुर गए थे. लेकिन महाराष्ट्र लॉ डिपार्टमेंट के नागपुर ऑफिस से 27 नंवबर 2014 को जारी की गई एक सरकारी चिट्ठी में लिखा है कि जोशी और लोया “30.11.2014 की अहले सुबह से 1.12.2014 की शाम सात बजे तक सरकारी काम की वजह से” रवि भवन में रुकने वाले थे.

कलेजियम का फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट की एक पूर्व न्यायधीश मंजुला चेल्लूर की सिफारिश पर आधारित है. उन्होंने ही दो सबसे सीनियर जजों के साथ मिलकर 28 नवंबर 2017 को मोदक, जोशी और चार और जजों के नाम की सिफारिश की थी. गौर करने लायक बात है कि महाराष्ट्र सरकार के खुफिया विभाग ने इसी दिन राज्य सरकार को एक “विचारशील रिपोर्ट” सौंपी थी. इस पर भी 28 नंवबर की ही तारीख दर्ज थी. इसका निष्कर्ष ये था कि जज लोया की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी. निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाकी के दस्तावेजों के साथ खुफिया विभाग ने इसमें वह बयान भी शामिल किया था जिसे मोदक ने दिया था.

अर्शु जॉन कारवां के सहायक संपादक (वेब) है. पत्रकारिता में आने से पहले दिल्ली में वकालत कर रहे थे.

निकीता सक्सेना कारवां की स्‍टाफ राइटर हैं.

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