क्या भीमा कोरेगांव मामले में अलग फैसला आने वाला था?

01 अक्टूबर 2018
28 सितंबर को सर्वोच्च अदालत की तीन जजों वाली पीठ ने बहुमत के आधार पर फैसला सुनाते हुए भीमा कोरेगांव मामले पर दायर याचिका को खारिज कर दिया. बहुमत के फैसले को जस्टिस खानविलकर ने अपने और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से पढ़ा और असहमति के फैसले को जस्टिस चंद्रचूड़ ने. गौरतलब है कि फैसले के दिन से पहले अदालत की वेबसाइट में इस फैसले को पढ़ने वाले जज के नाम के आगे डी. वाई. चंद्रचूड़ लिखा था.
अशोक दत्ता/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
28 सितंबर को सर्वोच्च अदालत की तीन जजों वाली पीठ ने बहुमत के आधार पर फैसला सुनाते हुए भीमा कोरेगांव मामले पर दायर याचिका को खारिज कर दिया. बहुमत के फैसले को जस्टिस खानविलकर ने अपने और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से पढ़ा और असहमति के फैसले को जस्टिस चंद्रचूड़ ने. गौरतलब है कि फैसले के दिन से पहले अदालत की वेबसाइट में इस फैसले को पढ़ने वाले जज के नाम के आगे डी. वाई. चंद्रचूड़ लिखा था.
अशोक दत्ता/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस

भीमा कोरेगांव मामले में पांच सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और वकीलों की गिरफ्तारियों के खिलाफ दायर याचिका पर सर्वोच्च अदालत ने 28 सितंबर के दिन फैसला सुनाया. महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में इस साल जनवरी में हुई हिंसा की घटना से कथित तौर पर संबंधित होने के आरोपों में इन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. याचिका में इन लोगों को रिहा करने और मामले की जांच अदालत की निगरानी वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराए जाने की मांग की गई थी. तीन जजों की पीठ ने बहुमत से अपने फैसले में याचिका को रद्द कर दिया. न्यायाधीश एएम खानविलकर ने अपने और मुख्य न्यायाधीश की ओर से फैसला लिखा था जबकि जस्टिस चंद्रचूड़ ने विपरीत फैसला सुनाया.

गौरतलब है कि 27 सितंबर की शाम तक सर्वोच्च अदालत की वेबसाइट में यह बताया गया था कि इस मामले में जस्टिस चंद्रचूड़ ही फैसला पढ़ेंगे.

हर दिन सर्वोच्च अदालत अगले दिन की होने वाली सुनवाइयों की जानकारी- मुकदमा सूची -को अपनी वेवसाइट में अपलोड करती है. इस सूची में मामले की सुनवाई करने वाले जजों के नाम, सुनवाई के लिए तय समय और फैसला पढ़ने वाले जजों की जानकारी होती है.

Don't want to read further? Stay in touch

  • Free newsletters. updates. and special reads
  • Be the first to hear about subscription sales
  • Register for Free

    अर्शु जॉन कारवां के सहायक संपादक (वेब) है. पत्रकारिता में आने से पहले दिल्ली में वकालत कर रहे थे.

    कमेंट