कारवां के पत्रकार पेनकर पर दिल्ली पुलिस की हिंसा की देश और विदेश की प्रेस संस्थाओं द्वारा भर्त्सना

24 अक्टूबर 2020
कारवां के लिए शाहिद तांत्रे
कारवां के लिए शाहिद तांत्रे

कारवां के पत्रकार अहान पेनकर के साथ उत्तरी दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस थाने में हुई मारपीट का भारतीय प्रेस क्लब, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स सहित कई जानीमानी प्रेस संस्थाओं ने विरोध किया है.

16 अक्टूबर को उत्तरी दिल्ली में एक 17 वर्षीय निषाद युवती के बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग करते समय पेनकर को पुलिस ने हिरास्त में ले लिया और मारपीट की. पेनकर ने मामले की शिकायत दिल्ली के पुलिस आयुक्त से भी की है. उसी दिन शाम को की गई उस शिकायत में पेनकर ने पुलिस आयुक्त को बताया, “पहुंचने के तीस मिनट बाद जब मैं लड़की की चाची से बात कर रहा था तभी पुलिस आई और प्रदर्शनकारियों तथा चाची को अंदर ले गई. मैं अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बनाने लगा और मेरे एक हाथ में प्रेस कार्ड था जिसे मैं पुलिस वालों को दिखा रहा था. मैंने उन्हें बार-बार बताया कि मैं कारवां का पत्रकार हूं. मेरा प्रेस कार्ड देखने और मेरे बार-बार बताने के बावजूद पुलिस वाले चार अन्य लोगों के साथ मुझे एक कमरे के अंदर ले गए और हमें जमीन पर बैठने को कहा. पुलिस ने मेरा फोन छीन लिया और मुझे पुलिस स्टेशन के बाहर तक घसीटा.”

पेनकर ने आगे लिखा है, “पुलिस पूरे वक्त हमें गालियां देती और धमकाती रही. थोड़ी देर में एसीपी अजय कुमार कमरे में आए. उनके पास स्टील की एक रॉड थी. वह हमें उससे मारने और डराने लगे. एसीपी कुमार ने मेरे चेहरे पर लात मारी और मैं जमीन पर गिर गया. फिर अजय कुमार ने मेरी पीठ और कंधे पर लात मारी. जब मैं उठ कर बैठा, तो एसीपी ने मेरा सिर जमीन में दबा दिया और फिर मेरी पीठ पर मारने लगे.” अपनी शिकायत में पेनकर ने मांग की है कि अजय कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 342 और 506 (2) के तहत कार्रवाई की जाए. ये धाराएं जानबूझकर शारीरिक क्षति पहुंचाने, गलत तरीके से बंधक रखने और आपराधिक धमकी से संबंधित हैं.

पत्रकार पेनकर के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा की गई मारपीट का विरोध करते हुए दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने वक्तव्य जारी कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है.

साथ ही प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने भी वक्तव्य जारी कर घटना पर विरोध किया है और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से कठोर कदम उठाने की मांग की है. भारतीय प्रेस क्लब ने लिखा है कि वे पेनकर का पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं और मारपीट करने वाले पुलिस वालों को निलंबित करने की मांग करते हैं. पीसीआई ने कहा है कि एक पत्रकार को अपना काम करने से रोकने और उसको बुरी तरह पीटने के जुर्म में पुलिस वालों पर आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने चाहिए. पीसीआई के अध्यक्ष आनंद के सहाय और महासचिव अनंत बगाइतकर द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देने वाले हाथरस मामले के तुरंत बाद प्रकाश में आया बलात्कार का यह मामला चौंकाने वाला है. दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है. बलात्कार और हत्या के मामलों को दबाने और सच्चाई को बाहर आने से रोकने के लिए एक पत्रकार की बर्बरता से पिटाई करने से ऐसा लगता है कि बर्बरता में दिल्ली पुलिस ने इस चिंतित करने वाली घटना में यूपी पुलिस को पीछे छोड़ दिया है.”

अंकिता कारवां की ​एडिटोरियल इंटर्न हैं.

Keywords: Indian media Delhi Police Delhi Violence communal violence
कमेंट