‘‘पत्रकारिता कोई जुर्म नहीं है’’: कश्मीर में पत्रकारिता पर बढ़ते हमले

16 अक्टूबर 2018
कश्मीर में पत्रकारों को पुलिस के बढ़ते दवाब, सेंसरशिप और पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है. कई मामलों में उन्हें जेल तक जाना पड़ा है. हाल में आसिफ सुल्तान की गिरफ्तारी पुलिस के दमन की एक और मिसाल है.
उमर आसिफ
कश्मीर में पत्रकारों को पुलिस के बढ़ते दवाब, सेंसरशिप और पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है. कई मामलों में उन्हें जेल तक जाना पड़ा है. हाल में आसिफ सुल्तान की गिरफ्तारी पुलिस के दमन की एक और मिसाल है.
उमर आसिफ

सितंबर के शुरू में, जब मैंने कश्मीर नैरेटिव पत्रिका के सहायक संपादक आसिफ सुल्तान की गिरफ्तारी के बारे में पढ़ा, तो मेरे दिमाग में पहला विचार यह आया कि पुलिस अब पत्रकारों को खुलकर डरा रही है. इससे पहले पुलिस वाले पत्रकारों को गुपचुप तरीके से बुलाकर पूछताछ करते थे. मेरे साथ भी दो बार ऐसा हुआ है.

पिछले साल 22 अक्टूबर को मेरे साथ यह पहली बार तब हुआ था जब जम्मू-कश्मीर पुलिस के आपराधिक जांच विभाग के काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) विभाग के एक अधिकारी ने मेरे पिता और भाई को बार-बार फोन कर यह पूछा था कि मैं कहां हूं. मैं उस समय अपने घर पर था जो राजनीतिक रूप से उथलपुथल वाले उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा शहर में है. हम लोग 19 वर्षीय मेरी भतीजी के गुजर जाने से शोक में थे. मेरा दिल्ली का नंबर कश्मीर में काम नहीं करता है इसलिए सीआईके ने मेरे परिवार को फोन कर मेरे बारे में जानने की कोशिश की थी.

‘‘जिनब, ऐसे उस मशवार रशा कारुन, तोहे एटोव श्रीनगर ताम’’ (जनाब, हमें कुछ मशविरा करना है, आपको श्रीनगर आना होगा), मेरे भाई के फोन के दूसरे छोर से एक कड़क आवाज ने मुझे हुक्म दिया.

अगली सुबह, मेरे बालों को सहलाते हुए मेरे अब्बू ने मुझे नींद से जगया. मुझे घर से 72 किलोमीटर दूर श्रीनगर की यात्रा करनी थी. अलविदा कहते हुए अब्बू ने कहा, ‘‘जरूर बताना कि वे लोग तुम्हें कौन सी जेल में डालने वाले हैं.’’ मैंने हां में सिर हिलाया और चल दिया. 

मैं 23 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे हमहुमा स्थित सीआईके के मुख्यालय पहुंचा. यह श्रीनगर हवाई अड्डे के नजदीक है. जैसा कि कश्मीर की रवायत है, मैंने अपना पहचान पत्र दिखाया और पुलिसवाले से पूछा कि पत्रकारों को क्यों बुलाया जा रहा है. उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘‘उन्हे सबक सिखाने के लिए.’’

जुल्करनैन बांडे दिल्ली स्थित पत्रकार और लंदन के बेडफोर्डशायर विश्विद्यालय के भूतपूर्व छात्र है.

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