एंटीजन और आरटी-पीसीआर टेस्ट में उलझ कर जान गंवाते कोरोना मरीज

01 सितंबर 2020
6 जुलाई 2020 को दिल्ली के एक अस्पताल में कोविड-19 परीक्षण के लिए नमूना लेता एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता.
मनीष स्वरूप / एपी फोटो
6 जुलाई 2020 को दिल्ली के एक अस्पताल में कोविड-19 परीक्षण के लिए नमूना लेता एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता.
मनीष स्वरूप / एपी फोटो

9 अगस्त को मेनकांत गुप्ता और उनके परिवार के आठ सदस्य 54 वर्षीय पिता एन वेंकट राव के लिए आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले के 30 निजी अस्पतालों में बेड की तलाश में जुटे थे. राव ने कोविड-19 का एक रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाया था और जांच रिपोर्ट नकारात्मक थी लेकिन उन्हें सांस नहीं आ रही थी और बेहद थके हुए थे और उनकी तबियत बिगड़ती चली जा रही थी. सभी 30 अस्पतालों ने गैर-कोविड रोगियों के लिए बेड और वेंटिलेटर की कमी का हवाला दे कर उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया. "हम कुछ भी करने के लिए तैयार थे. मुंह मांगी कीमत देने को तैयार थे लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और पिता को ऐसी जगह ले जाने के लिए कहा जहां गैर-कोविड रोगियों के भर्ती किया जा रहा हो”, मेनकांत ने कहा.

हताश होकर उन्होंने विशाखापट्टनम में अपने गांव पद्मनाभन से 15 किलोमीटर दूर एक कस्बे विजयनगरम में महाराजा जिला अस्पताल के अधिकारियों से संपर्क किया. अस्पताल ने, जो अब एक समर्पित कोविड-19 केंद्र है, राव का एक और रैपिड एंटीजन परीक्षण किया और परिणाम फिर से नकारात्मक आया. इस अस्पताल ने उन्हें विशाखापट्टनम शहर के किंग जॉर्ज अस्पताल रेफर कर दिया.

बेड मिलने के अगले दिन 11 अगस्त की शाम किंग जॉर्ज अस्पताल में राव की मौत हो गई. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश में उनके परिवार को दो दिन लग गए थे. उनकी मौत के वक्त उनके खून में शुगर की मात्रा सामान्यसे छह गुना ज्यादा थी. उनका ऑक्सीजन-संतृप्ति स्तर 40 प्रतिशत तक गिर गया था, जबकि एक स्वस्थ वयस्क के लिए न्यूनतम संतृप्ति स्तर 90 प्रतिशत है. अस्पताल ने उनकी मौत के प्राथमिक कारण को "कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट" और माध्यमिक कारणों के रूप में "निमोनिया, मधुमेह केटोएसिडोसिस और टाइप 1 श्वसन विफलता" के रूप में सूचीबद्ध किया. टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित रोगियों में मधुमेह केटोएसिडोस गंभीर जटिलता पैदा कर देता है.

उनके परिवार ने उनके अंतिम संस्कार मैं सैकड़ों रिश्तेदारों को आमंत्रित किया क्योंकि उनकी मौत कोविड-19 से नहीं हुई थी. उनकी मौत के पांच दिन बाद, स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने मेनकांत को बताया कि उनके पिता की मौत के बाद कोविड-19 के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पॉलीमरेज चेन रिएक्शन या आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट सकारात्मक थी. मेनकांत ने कहा, "दो बार उनका एंटीजन टेस्ट निगेटिव आया और जब हमने उन्हें खो दिया तो वे बताते हैं कि उन्हें कोविड-19 है. उन्हें यह बीमारी थी और फिर भी हम उन्हें लेकर अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे जहां उनका इलाज​ किए जाने से इनकार कर दिया गया."

भारत ने स्वर्ण मानक आरटी-पीसीआर परीक्षणों के पूरक के लिए एंटीजन परीक्षण की शुरुआत की ताकि जांच के दायरे को चौड़ा किया जा सके और अधिक मामलों का जल्द पता लगाया जा सके. लेकिन एंटीजन परीक्षणों से झूठे नकारात्मक नतीजों ने अस्पतालों को प्रारंभिक जीवन-रक्षक कार्रवाई करने से वंचित कर दिया है. अस्पताल राव का उपचार शुरू करने से पहले परीक्षणों पर अधिक निर्भर थे तब भी जब उनके लक्षण साफ जाहिर थे.

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: Antigen Test RT-PCR Test COVID-19
कमेंट