कोविड-19 : महाराष्ट्र सहित देश के अन्य हिस्सों में ऑक्सीजन की भारी कमी, अस्पताल परेशान

26 सितंबर 2020
अदनान आबिदी/रॉयटर्स
अदनान आबिदी/रॉयटर्स

12 सितंबर को पनवेल में निरामय हॉस्पिटल्स के मेडिकल निदेशक डॉ. अमित थडानी 16 घंटे तक ऑक्सीजन खोजते रहे. थडानी 55 बेड वाला अस्पताल चलाते हैं जो अब कोविड-19 अस्पताल है जहां मरीजों के लिए एक दिन में 70 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत होती है. थडानी ने ऑक्सीजन के 50 सिलेंडर मंगवाने के लिए कई ऑक्सीजन डीलरों को आर्डर दिए थे लेकिन उस दिन दोपहर तक उन्हें सिर्फ 20 मिल पाए थे. शाम होने तक वह अपने मरीजों के लिए दूसरे अस्पतालों की तलाश करने लगे. “दिन ढलने तक कई जगह फोन करने और अपने कर्मचारियों को पूरे शहर में दौड़ाने के बाद हम दैनिक ऑक्सीजन आवश्यकता को पूरा कर तो पाए लेकिन तब तक हम अपने दो सबसे गंभीर मरीजों को अन्य अस्पताल में स्थानांतरित कर चुके थे," थडानी ने बताया.

अगस्त के आखिर से ही कई तरह की चिकित्सा सुविधाएं, विशेष रूप से छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम में ऑक्सीजन की भारी कमी है क्योंकि महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की जरूरत वाले कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़ गई है. ऑक्सीजन उत्पादकों ने मुझे बताया कि महामारी फैलने के बाद से मेडिकल ऑक्सीजन की मांग दोगुनी से अधिक हो गई है. ऑक्सीजन डीलरों ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला या सप्लाई चेन के लिए बुनियादी ढांचे की कमी है जिससे ऑक्सीजन अस्पतालों तक नहीं पहुंच सकता है.

सितंबर के मध्य तक करीब तीन लाख कोविड-19 के सक्रिय रोगियों के साथ महाराष्ट्र भारत में शीर्ष स्थान पर था. उस समयावधि में यह संक्रमित लोगों की संख्या के अनुपात में मृत्यु दर में दूसरा नंबर का राज्य था. इस महामारी में यह ज्यादातर मौतें गंभीर सांस की परेशानी के बाद हुई हैं.

सितंबर के दूसरे सप्ताह तक थडानी के अस्पताल के 40 बेड भर चुके थे. इससे ज्यादा मरीजों को डॉक्टर भर्ती नहीं कर रहे थे क्योंकि वह इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं थे कि अगर उन्हें जरूरत हुई तो वह पर्याप्त ऑक्सीजन का इंतजाम कर पाएंगे. थडानी ने बताया, "मेरे तीस मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता है जिनमें से छह नॉन इवेसिव वेंटिलेशन पर हैं जिस स्थिति में लगातार उच्च प्रवाह में ऑक्सीजन की आवश्यकता रहती है." डॉक्टर ने ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए हर दिन फोन पर बात करते हुए कम से कम 12 घंटे बिताए. उन्होंने कहा, "मुझे हर दिन विभिन्न विक्रेताओं और डीलरों को कॉल करते रहना पड़ता है क्योंकि एक विक्रेता 70 सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं कर सकता.” महामारी फैलने से पहले अस्पताल को प्रति दिन दस से अधिक सिलेंडरों की आवश्यकता नहीं पड़ती थी. उन्होंने कहा, “लेकिन अब रोज इसके लिए मेहनत करनी पड़ती है. हर दिन मुझे लगता है कि मेरे पास सारे विकल्प खत्म हो गए हैं.”

पनवेल से 170 किलोमीटर से अधिक दूरी पर नासिक में सुदर्शन अस्पताल के निदेशक डॉ. संजय धुर्जद भी इसी तरह की परेशानियों से गुजरे. उन्होंने अपने मरीजों के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए घंटों फोन लगाए. "एक दिन मेरी टीम ऑक्सीजन सिलेंडरों की तलाश में 24 घंटे से अधिक समय तक शहर में घूमती रही. वे जहां कहीं ऑक्सीजन सिलेंडर ढूंढने में लगे थे." देर रात उनके कर्मचारियों को एक टेंपो मिला जिसमें दस ऑक्सीजन सिलेंडर थे लेकिन वहां कोई भी ड्राइवर या केयरटेकर नहीं था. धुर्जद ने आगे बताया किऑक्सीजन न मिलने से निराश मेरे साथी सिलेंडरों को अस्पताल ले गए. अगले दिन वे उस स्थान पर वापस आ गए जहां उन्हें टेंपो मिला था ताकि वह उसके मालिक को ढूंढकर ऑक्सीजन का भुगतान कर सकें. "मुझे पता है कि यह कैसे लगता है लेकिन यह अब जीवन और मृत्यु की बात है. उस रात ऑक्सीजन पाने के लिए हम यही कर सके."

चाहत राणा कारवां में​ रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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