जौनपुर में बीजेपी मंडल अध्यक्ष ने दलित पत्रकार के तोड़े पैर, रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई न होने से अनशन पर बैठे परिजन

29 अगस्त 2021
अस्पताल में भर्ती संतोष कुमार
अस्पताल में भर्ती संतोष कुमार

बीजेपी के महाराजगंज मंडल अध्यक्ष यादवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दलित पत्रकार और बहुजन इंडिया 24 न्यूज के जौनपुर ब्यूरो चीफ संतोष कुमार की बेरहमी से पिटाई कर दोनों पैर तोड़ डालने का मामला सामने आया है. मारपीट के बाद संतोष को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.

इस बारे में संतोष ने मुझे बताया कि उनके गांव की महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर हो रहे पंचायत चुनाव में उनकी पत्नी रेशमा भी उम्मीदवार थीं. चूंकि यादवेंद्र की पत्नी अनामिका भी चुनावी मैदान में थीं तो 26 मार्च 2021 को यादवेंद्र ने रेशमा को चुनाव न लड़ने की धमकी दी. संतोष का कहना है कि उससे एक दिन पहले 25 मार्च को यादवेंद्र ने उनके घर आकर चुनाव लड़ने पर जान से मरवा देने की धमकी भी दी थी.  उन्होंने बताया, “हमारे घर की बकरी को भी यादवेंद्र के आदमी उठा ले गए.” उन्होंने आगे कहा, “हमने थाने में जाकर लिखित शिकायत दी लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हुई. कप्तान साहब (पुलिस अधिकारी) को भी लिखा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए मेरे पूरे परिवार ने शिकायत लिखाई पर कुछ नहीं किया गया.”

जब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की घोषणा हुई तब संतोष ने भी अपनी पत्नी रेशमा को गांव की आरक्षित महिला सीट से चुनाव लड़वाने का फैसला किया था. उसी गांव से ठाकुर जाति के बीजेपी के महराजगंज मंडल अध्यक्ष यादवेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी अनामिका भी चुनाव लड़ रही थीं.

संतोष ने बताया, “26 तारीख को  मैं अपने दोस्त के साथ दवा लेकर आ रहा था. मैं मोटरकाइकिल के पीछे बैठा था. जब हम डेलूपुर की पुलिया पर पहुंचे तब बीजेपी नेता यादवेंद्र और उनके साथ 14 अन्य लोग वहां मौजूद थे. जिनमें से मैं 10 को पहचानता था. उन 14 लोगों ने मुझे इतना पीटा कि मैं बेहोश हो गया. मुझे जातिवादी और मां-बहन की गालियां दीं. मेरे शरीर पर कई गंभीर चोटें आईं और मेरे दोनों पैरों की हड्डियां टूट गईं.”

26 जून की शाम हुई इस घटना के बारे में उन्होंने आगे बताया कि जैसे ही उनके परिवार को इसकी सूचना मिली वे लोग एम्बुलेंस से उन्हें नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए. बाद में वे थाना महराजगंज गए और सीओ से शिकायत की लेकिन सीओ ने उनसे कहा कि वे शिकायत से बीजेपी नेता का नाम हटा दें तभी उनकी एफआईआर दर्ज की जाएगी.

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: Uttar Pradesh Dalit upper-caste Hindus journalist
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