दिल्ली हिंसा के पीड़ितों ने कहा वकील महमूद प्राचा के दफ्तर पर पुलिस का छापा दबाव डालने की कोशिश

28 दिसंबर 2020
सुभाष मोहल्ला निवासी शन्नो ने भजनपुरा के पुलिस अधिकारियों पर स्टेशन परिसर के अंदर उनसे और उनकी किशोरी बेटी के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था, उन्होंने अपने वकील महमूद प्राचा के दफ्तर पर दिल्ली पुलिस विशेष सेल द्वारा मारे गए छापे के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. 25 दिसंबर को, दिल्ली हिंसा के लगभग दस पीड़ितों ने, प्राचा जिनके वकील हैं, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पुलिस के छापे के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
शाहिद तांत्रे/कारवां
सुभाष मोहल्ला निवासी शन्नो ने भजनपुरा के पुलिस अधिकारियों पर स्टेशन परिसर के अंदर उनसे और उनकी किशोरी बेटी के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था, उन्होंने अपने वकील महमूद प्राचा के दफ्तर पर दिल्ली पुलिस विशेष सेल द्वारा मारे गए छापे के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. 25 दिसंबर को, दिल्ली हिंसा के लगभग दस पीड़ितों ने, प्राचा जिनके वकील हैं, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पुलिस के छापे के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
शाहिद तांत्रे/कारवां

25 दिसंबर की शाम दिल्ली हिंसा के लगभग दस पीड़ितों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जो पिछले दिन उनके अधिवक्ता महमूद प्राचा के कार्यालय पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के छापे के बाद हुई थी. इस साल फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा में सामने आए हिंसा के कई मामलों में प्राचा बचाव पक्ष के वकील हैं. प्राचा के अनुसार, जिन मामलों को वह देख रहे हैं वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कैडर, दिल्ली पुलिस और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की फरवरी की हिंसा में मिलीभगत को दर्शाते हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ितों ने बताया कि कैसे पुलिस उन पर अपने मामले वापस लेने या फिर अपना वकील बदलने और यह बयान देने के लिए दबाव बना रही थी कि प्राचा ने उनसे झूठी शिकायतें दर्ज कराई हैं. पीड़ितों और प्राचा के मुवक्किलों में से एक, साहिल परवेज ने कहा कि स्पेशल सेल का छापा, "सिर्फ हम पर दबाव बनाने के लिए था ताकि हम पीछे हट जाएं."

24 दिसंबर को दोपहर, करीब बीस से ज्यादा पुलिस अधिकारी दिल्ली के निजामुद्दीन पूर्व क्षेत्र में स्थित प्राचा के कार्यालय में पहुंचे और अगले दिन लगभग 2.45 बजे वहां से गए. 25 दिसंबर को सुबह-सुबह मीडिया से इस छापे के बारे में बात करते हुए प्राचा ने कहा कि अधिकारियों ने उनका कंप्यूटर जब्त करना चाहा और उनसे हाथापाई भी की. "मैं उन्हें अपना कंप्यूटर नहीं देना चाहता था क्योंकि इसमें ढेर सारे वीडियो और अन्य सबूत हैं," उन्होंने कहा. प्राचा ने कहा कि पुलिस का यह छापा इन मामलों पर आगे कार्रवाई को रोकने की कोशिश थी.

प्राचा ने कहा कि उनके कई मुवक्किलों को सिर्फ इसलिए धमकाया गया क्योंकि वे उनका मामला देख रहे थे. उन्होंने प्रेस को बताया कि वह "ऐसे दर्जनों लोगों का उदाहरण दे सकते हैं, जिन्हें झूठा फंसाया गया है क्योंकि वे मेरे पास आए और पुलिस के खिलाफ, आरएसएस के सदस्यों के खिलाफ मामले दर्ज करने की कोशिश की." उनके मुताबिक, पुलिस ने उनके मुवक्किलों को धमकी दी कि "या तो इस मामले से प्राचा को हटाओ या हम तुम्हें मार देंगे, तुम्हें झूठे मामलों में फंसा देंगे." प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले दंगा पीड़ितों ने पुलिस के खिलाफ इन आरोपों की तस्दीक की. यह सम्मेलन शाम 4 बजे आयोजित किया गया था, लेकिन इसमें मीडिया की मौजूदगी कम रही.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस ने बात रखी उसने बारीकी से बताया कि कैसे पुलिस ने उन्हें थका दिया और दिल्ली हिंसा के बारे में उनकी शिकायतों की जांच करने से इनकार कर दिया. वक्ताओं में खुर्शीद सैफी और फिरोज अख्तर भी शामिल थे, जो फरवरी की हिंसा के दौरान पूर्वोत्तर दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके के बृजपुरी इलाके में फारूकिया मस्जिद पर हिंदू दंगाइयों और सुरक्षाकर्मियों के हमले से बच गए थे. 25 नवंबर को कारवां ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि दिल्ली पुलिस ने हमले के बारे में शिकायतों के खिलाफ प्रा​थमिकी दर्ज करने के लिए अभी क्या किया है. सैफी और अख्तर ने अपनी शिकायत में दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए हैं और दंगाइयों को नामजद किया है. लेकिन सांप्रदायिक हमले में दर्ज एकमात्र एफआईआर में उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया.

कॉन्फ्रेंस में सैफी और अख्तर ने बताया कि पुलिस ने उन्हें एफआईआर को बदलने के लिए धमकाया ताकि प्रा​चा को गलत तरीके से फंसाया जा सके. सैफी ने कहा कि जब पुलिस उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया, तब वे प्राचा से मिले. उन्होंने कहा कि उन्होंने हथियारबंद भीड़ में शामिल तीन लोगों की पहचान नाम से की थी. "पुलिस ने मुझ पर दबाव डाला- 'जिन लोगों के नाम तुमने अपनी शिकायत में लिए हैं जानते हो वह कौन हैं?’ मैंने कहा हां. 'इन नामों को यहां से हटा दें तो क्या होगा?'’’ उन्होंने कहा. "वे चाहते थे कि मैं अपनी गवाही बदल दूं."

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