वैश्विक भूख सूचकांक में भारत की स्थिति चिंताजनक

19 अक्टूबर 2019
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्थिति एशिया के उसके पड़ोसी बांग्लादेश और यहां तक कि मोजाम्बिक जैसे सबसे गरीब अफ्रीकी देशों से भी खराब है.
रफीक मकबूल/एपी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्थिति एशिया के उसके पड़ोसी बांग्लादेश और यहां तक कि मोजाम्बिक जैसे सबसे गरीब अफ्रीकी देशों से भी खराब है.
रफीक मकबूल/एपी

15 अक्टूबर को जर्मनी की गैर-सरकारी संस्था वेल्थहंगरलाइफ और आयरलैंड की सहायता एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड ने संयुक्त रूप से 2019 की विश्व भूख सूचकांक (जीएचआई) रिपोर्ट जारी की. यह रिपोर्ट पहली बार साल 2000 में जारी की गई थी. जीएचआई का कहना है कि उसकी रिपोर्ट का उद्देश्य, "विश्व स्तर पर तथा क्षेत्रीय और देश के स्तर पर भुखमरी को मापना और चिन्हित करना है.” रिपोर्ट के अनुसार, 117 देशों में भारत 102वें स्थान पर है. भारत की स्थिति एशिया के उसके पड़ोसी बांग्लादेश और यहां तक कि मोजाम्बिक जैसे सबसे गरीब अफ्रीकी देशों से भी खराब है.

पहली नजर में रिपोर्ट को देखें तो भारत का प्रदर्शन बहुत ही खराब है, खासकर 2014 की जीएचआई रिपोर्ट से तुलना करने पर. 2014 की रिपोर्ट में भारत 55 वें स्थान पर था. हालांकि यह तुलना भ्रामक है क्योंकि जीएचआई ने तब से दो बार अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है. 2014 में रिपोर्ट के लिए किए गए सर्वेक्षण में शामिल देशों की संख्या अब 76 से बढ़कर 117 हो गई है. लेकिन 2019 की रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि नए मापदंडों को शामिल किए जाने के इस सतही कारक के बावजूद, भारत की स्थिति काफी चिंताजनक है. 2019 की रिपोर्ट "भुखमरी में कमी लाने के प्रयासों में मिली सफलताओं और अफलताओं पर प्रकाश डालती है तथा भूख और पोषण असुरक्षा के कारकों को समझने का नजरिया देती है." रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में भूख और कुपोषण का स्तर "मध्यम और गंभीर श्रेणियों” में है. रिपोर्ट की मूल्यांकन प्रणाली के अनुसार, 20.0 के मान से ऊपर के देशों के प्रदर्शन को "अत्यंत गंभीर" माना गया है. जिन देशों का मान 20.0 से कम है, उन्हें कुपोषण और अल्पपोषण से निपटने के लिए मामूली रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाला बताया गया है. दूसरे शब्दों में, देश का मान जितना अधिक होगा, जीएचआई में उसका स्थान उतना ही खराब होगा. इस वर्ष भारत का मान 30.3 है, जो 1.3 अरब की बड़ी आबादी वाले देश में भूख के "गंभीर" स्तर को दर्शाता है.

पांच साल पहले, भारत का मान 17.8 था, जिसमें 2005 के 6.4 के मान से 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आयी थी. "भारत के बेहतर जीएचआई मान को स्पष्ट करना" शीर्षक के एक संक्षिप्त नोट में लिखा है, "जब से कुपोषण से संबंधित पिछले आंकड़े उपलब्ध हुए हैं तब से भारत सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए और उनका विस्तार किया है, जो कुपोषण के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मिश्रित कारणों को लक्षित करते थे." 2014 की रिपोर्ट में दो प्रमुख कारकों की पहचान की गई थी जिनकी बदौलत भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया था. ये कारक थे : बच्चों को भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की सरकारी पहल, एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम और ग्रामीण भारत में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन. उस नोट में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को भारत के गरीबों तक भोजन की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने वाला "अप्रत्यक्ष कारक" बताया गया है.

देश का मान जितना अधिक होगा, जीएचआई में उसका स्थान उतना ही खराब होगा. इस वर्ष भारत का मान 30.3 है, जो 1.3 अरब की बड़ी आबादी वाले देश में भूख के "गंभीर" स्तर को दर्शाता है.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूर्व सलाहकार और पूर्व नौकरशाह टी के ए नायर ने बताया कि मनरेगा ने भारत में भुखमरी के स्तर को कम करने में सीधे योगदान दिया है. "मुझे लगता है कि मनरेगा को उतना महत्व नहीं मिल रहा है और इस पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है​ जिनता दिया जाना चाहिए. नरेगा को मजबूत करना और इसे मांग-आधारित बनाना लोगों की खरीद क्षमता को बेहतर बनाता,” उन्होंने मुझे बताया. हालांकि, 2014 से सत्ता में काबिज नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का मनरेगा के प्रति विरोधाभासी रुख रहा है. 2015 में, मोदी ने इस कार्यक्रम को यूपीए की विफलता का "जीता-जागता स्मारक" बताया था. लेकिन न तो उनकी सरकार ने इस कार्यक्रम को बंद किया और न ही इसके लिए आवंटित बजट में कटौती की, बल्कि 2017 के बजट में मनरेगा को अब तक का सबसे ज्यादा परिव्यय आवंटित किया गया था.

आतिरा कोनिक्करा करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

Keywords: mid-day meal scheme Global Hunger Index Ireland MNREGA
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