बाढ़ में डूबे उत्तर प्रदेश के गांव, चारे के अभाव में पशुधन बेचने को मजबूर किसान

21 अगस्त 2020
प्रदेश में राप्ती सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. नाव पर सवार होकर सुरक्षित स्थान की ओर जाते बाढ़ पीड़ित.
पीटीआई
प्रदेश में राप्ती सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. नाव पर सवार होकर सुरक्षित स्थान की ओर जाते बाढ़ पीड़ित.
पीटीआई

जारी कोरोना महामारी के बीच भारत के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं. इस साल बाढ़ में उत्तर प्रदेश के 16 जिलों- बाराबंकी, अयोध्या, कुशीनगर, गोरखपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, आजमगढ़, मऊ, गोंडा, बस्ती, संत कबीर नगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, सीतापुर और बलरामपुर- के 777 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मिली जानकारी के अनुसार बाढ़ में उपरोक्त जिलों के 282 गांवों में पानी पूरी तरह भर गया है. 4 अगस्त के एक अन्य ट्वीट में सीएम ऑफिस ने कहा था कि घाघरा, राप्ती, गण्डक, तुर्तीपार और अन्य कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं.

इन इलाकों में हर साल बाढ़ आती है लेकिन इस बार बाढ़ की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. जिन क्षेत्रों में बाढ़ आई है वे पूर्वांचल के ऐसे इलाके हैं जहां के ज्यादातर लोग रोजगार के लिए बाहर जाते हैं. इस बार कोरोना महामारी के बाद लागू लॉकडाउन के कारण अधिकांश लोग अपने घरों पर हैं और वे बाढ़ में फंस गए हैं. जब लॉकडाउन शुरू हुआ था तब गांव में गेहूं कटाई का सीजन था और बाहर से आए बहुत से लोगों को इसमें काम मिल गया था. बाद में कुछ दिनों के लिए मनरेगा के तहत भी काम उपलब्ध था. साथ ही, धान रोपाई का काम भी लोगों को मिल रहा था लेकिन बाढ़ से पूरा जन-जीवन ध्वस्त हो गया है.

मऊ जिले के मिश्रोली गांव के रहने वाले 28 साल के किसान चंद्रमणि यादव ने मुझे बताया, “मेरे गांव के ही पास घाघरा नदी पर बंदा टूटा गया है जिससे हमारे जिले की लगभग 15 ग्राम सभाएं प्रभावित हुई हैं. हमारे गांव के आस-पास के लोग बाजार करने देवरिया जिले के माइल बाजार नावों से जाते हैं लेकिन 4 अगस्त को 15 लोग बाजार से अपने घर मुसाडोही के लिए चले लेकिन गांव पहुंचने से पहले ही नाव पलट गई और दो महिलाएं की और तीन बच्चे डूब कर मर गए.” नाव पर सवार 9 लोगों को बचा लिया गया. एक महिला उस समय लापता हो गई थी जिसकी लाश एक दिन बाद मिली.

इन इलाकों में हर साल बाढ़ आती है लेकिन इस बार बाढ़ की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. जिन क्षेत्रों में बाढ़ आई है वे पूर्वांचल के ऐसे इलाके हैं जहां के ज्यादातर लोग रोजगार के लिए बाहर जाते हैं.

यादव ने बताया कि गांव के लोग खौफ में जी रहे हैं. “हमारी सारी फसल बर्बाद हो गई है. ज्यादातर लोग अपने रिश्तेदारों के यहां जा चुके हैं. लोग अपने जानवरों को बेचने पर मजबूर हो गए हैं क्योंकि जानवरों के लिए चारे की कोई व्यवस्था नहीं है. हर रोज किसी न किसी गांव में लोगों के घर गिरने की बात आती है. जब पानी वापस जाएगा तब कई बीमारियां फैलेंगी. तब और भी समस्या बढ़ जाएगी और लोगों के पास ना काम है और ना ही पैसा.”

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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