लुधियाना के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस पर कोविड नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज

01 अक्टूबर 2020
संजीव शर्मा/ हिंदुस्तान टाइम्स/ गैजी इमेजिस
संजीव शर्मा/ हिंदुस्तान टाइम्स/ गैजी इमेजिस

पंजाब पुलिस ने अगस्त और सितंबर में राज्य विधानसभा के सदस्य सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ कम से कम तीन प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की है. बैंस लुधियाना के आत्म नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं और लोक इंसाफ पार्टी के संस्थापक है. दो प्राथमिकियों में आरोप है कि सिमरजीत द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में उनकी पार्टी के सदस्यों ने वैश्विक कोरोनावायरस महामारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था. पुलिस के मुताबिक, एक विरोध प्रदर्शन में चार पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट हुई. तीसरी एफआईआर, लुधियाना में दायर की गई है जिसमें सिमरजीत पर लोगों को कोविड-19 प्रतिबंधों की अवज्ञा करने के लिए उकसाने करने का आरोप है. लुधियाना में 22 सितंबर तक नोवेल कोरोनोवायरस के कुल 16599 पुष्ट मामले थे जो पंजाब के सभी जिलों में सबसे अधिक हैं. 

विधायक पर तीन प्राथमिकियों में भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था जिसमें धारा 188, 269 और 505 शामिल हैं, जो क्रमश: लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा, लापरवाही के कारण किसी बीमारी के संक्रमण फैलने की संभावना, जिसके चलते जीवन को खतरा हो और बयानों के जरिए लोक अशांति फैलाने से संबंधित है.

सिमरजीत के राजनीतिक करियर में एफआईआर शायद ही कोई नई बात है. 2012 और 2017 के पंजाब विधानसभा चुनावों में अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने के लिए उन्होंने जो हलफनामा सौंपा था, उसमें सिमरजीत ने उल्लेख किया था कि उनके खिलाफ छह मामले लंबित थे. 2019 लोकसभा चुनाव के लिए उन्होंने जो हलफनामा पेश किया, उसके मुताबिक उनके खिलाफ आठ आपराधिक मामले लंबित थे. जिनमें आईपीसी की 23 धाराओं के तहत उन पर मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें चोरी, डकैती, घर कब्जाने और दंगा-फसाद फैलाना जैसे अपराध शामिल थे. उदाहरण के लिए, कई एफआईआर में कुछ आरोपों को दर्ज किया गया है जैसे विधायक की हत्या के दो बार प्रयास करना, आपराधिक धमकी के लिए तीन बार और चार बार किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला करना और आपराधिक बल का उपयोग करना. सिमरजीत ने हलफनामे में दावा किया कि सभी छह मामले झूठे हैं.

एक दशक से भी अधिक समय से सिमरजीत को कानून हाथों में लेने के कई आरोपों का सामना करना पड़ा है. कई मौकों पर उन्होंने अपने कथित दुर्व्यवहारों को भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधे मोर्चा लेना बताया है. उनके खिलाफ कई आरोपों के बावजूद सिमरजीत दो बार विधायक चुने गए.

सिमरजीत के खिलाफ सबसे प्रसिद्ध आरोप एक दशक से भी पहले का है, जब वह शिरोमणि अकाली दल के सदस्य थे, जिसने 2007 से 2017 के बीच राज्य पर शासन किया था. एक लोक सेवक ने जो एसएडी के कार्यकाल में कथित तौर पर भ्रष्टाचार घोटाले का व्हिसल-ब्लोअर था, सिमरजीत पर हमला करने का आरोप लगाया गया था.

जतिंदर कौर तुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशकों से इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डेक्कन क्रॉनिकल सहित विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में लिख रही हैं.

Keywords: Punjab Shiromani Akali Dal
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