शोक और मातम में डूबा मेरा गांव, यहां प्रधानी चुनाव के बाद बढ़ा कोरोना का प्रकोप

27 अप्रैल 2021
कुंभ से लौटे लोगों को था कोरोना. प्रधानी चुनाव ने तीव्र कर दिया संकट.
सुनील कश्यप
कुंभ से लौटे लोगों को था कोरोना. प्रधानी चुनाव ने तीव्र कर दिया संकट.
सुनील कश्यप

बागपत जिले स्थित मेरे धनौरा गांव की स्थिति चिंताजनक है. जब मुझे पता चला कि मुझे कक्षा 10 में पढ़ाने वाली टीचर कौशल्या देवी की मृत्यु कोरोना से हो गई है और उनके पति और बेटा भी कोरोना पॉजिटिव हैं तो एकाएक मेरी यादों में मेरे गांव का स्कूल और मुझे पढ़ाती कोशेल्या मैडम आने लगे. वह बहुत सरल स्वभाव की थीं. हम उन्हें “मैम” कहते थे. वह इसी महीने 4 अप्रैल को ही रिटायर हुईं थीं. मुझे पता चला कि मैम के परिवार में पिछले चार दिनों में यह दूसरी मौत थी. उनसे पहले गांव के देशपाल राणा चार दिन पहले गुजर गए.

गांव में प्रधानी के चुनाव इस महीने की 19 तारिक को हुए थे. गांव के पूर्व प्रधान रमेश स्वामी ने इस बार अपने बेटे रजत स्वामी को अपनी जगह चुनाव लड़ाया था. चुनाव खत्म होने के दो दिन बाद अचानक ही रमेश स्वामी की मृत्यु हो गई. मेरे गांव में पिछले दस दिनों में करीब 15 लोगों के मरने की खबर है. गांव का एक भी कोना मौत से अछूता नहीं है.

मेरी मां से जब मेरी बात हुई तो वह बोलीं, “पता नहीं तुम्हारे गांव को क्या हुआ है. चारों ओर से मरने की खबरें आ रही हैं. हम तो अपने बच्चों को बाहर खेलने भी नहीं जाने देते. यह पता नहीं किस तरह की बीमारी फैली है जो लोगो पर सीधे हमला करती है. समाचार सुनते हैं तो पता चलता है कि जवान-जवान लोगों को भी ले जा रही है. सभी जाति के लोग मर रहे है.”

40 साल के दिलशाद मेरे दोस्त हैं. जब पिछले शुक्रवार को उन्हें पता चला कि पिता इस्लाम की हालत पिछले शुक्रवार से खराब है और सीने में दर्द हो रहा है तो वह शनिवार की सुबह पिता को ले कर मेरठ चल दिए लेकिन  किसी भी अस्पताल ने उनको एडमिट नहीं किया. दोपहर 2 बजे 68 साल के पिता की मौत हो गई. दिलशाद ने मुझसे कहा, “पता नहीं क्या चल रहा है? गांव में हर दिन एक-दो लोगों की मौत हो रही है.”

गांव के ही तेजराम ने निराश स्वर में मुझसे कहा, “पता नहीं हमारे गांव को किसकी नजर लग गई है. इतनी मौत एक साथ कभी नहीं देखी.” वह बड़ौत में मजदूरी करते हैं लेकिन बताया कि “अब डर से नही जा रहा हूं.” उन्होंने कहा, “समाचार देखता हूं तो और भी डर लगता है.”

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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