26 जनवरी की घटना के बाद से पंजाब की पंचायतों और वकीलों ने तेज किए मदद के प्रयास

08 फ़रवरी 2021
27 अक्टूबर 2020 को पंजाब के अमृतसर से लगभग 20 किलोमीटर दूर जंडियाला गुरु गांव में एक रेलवे स्टेशन पर कृषि कानूनों के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान अपने बच्चों के साथ. गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद से पंजाब की पंचायतों ने आंदोलन को जारी रखने की अपनी कोशिशें बढ़ा दी हैं.
नरिंदर नानू/ एएफपी / गेट्टी इमेजिस
27 अक्टूबर 2020 को पंजाब के अमृतसर से लगभग 20 किलोमीटर दूर जंडियाला गुरु गांव में एक रेलवे स्टेशन पर कृषि कानूनों के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान अपने बच्चों के साथ. गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद से पंजाब की पंचायतों ने आंदोलन को जारी रखने की अपनी कोशिशें बढ़ा दी हैं.
नरिंदर नानू/ एएफपी / गेट्टी इमेजिस

26 जनवरी के बाद से पंजाब की कम से कम 14 पंचायतों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर जमे किसान आंदोलन में और भारी संख्या में शामिल होने के संबंध में प्रस्ताव पारित किए हैं. यह पंचायतें बरनाला, बठिंडा, मनसा, फरीदकोट, पटियाला और तरन तारन जिलों की हैं. गणतंत्र दिवस पर आंदोलनकारी किसानों की राजधानी में आयोजित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद प्रस्ताव पारित किए गए थे. हिंसा की घटना के बाद एक ओर मुख्यधारा का मीडिया प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने लगा तो वहीं दूसरी तरफ इंटरनेट बंद कर देने, सुरक्षा बल बढ़ा देने और बिजली-पानी की आपूर्ति ठप कर देने सहित प्रमुख धरना स्थलों से उन्हें जबरन खदेड़े जाने के संकेत दिखाई देने लगे. इसके बाद से ही पंजाब में पंचायतों ने आंदोलन जारी रखने के लिए अपनी कोशिशें बढ़ा दी हैं.

पंचायतों ने आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को भेजने का निर्देश जारी किया है और ऐसा न करने पर जुर्माना लगाने की बात की है. ज्यादातर पंचायतों ने उन लोगों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है जो पंचायत के फैसले नहीं मानते हैं. फरीदकोट जिले के सिबियन गांव में पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है कि हर घर से एक सदस्य को एक हफ्ते के लिए दिल्ली बॉर्डर पर न भेजा पर अपनी खेती की जमीन के हिसाब से 500 रुपए प्रति एकड़ जुर्माना देना होगा. इसके साथ ही सामाजिक बहिष्कार भी होगा. इसके अलावा कुछ पंचायतों ने ग्रामीणों को विरोध प्रदर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखने को कहा है.

पंजाब की पंचायतें पहले भी इन कानूनों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा चुकी हैं. द वायर के अनुसार, 3 अक्टूबर 2020 तक राज्य की एक दर्जन से ज्यादा ग्राम पंचायतों के एकमत से इन कृषि कानूनों का विरोध था. मैंने कई पंचायतों के सरपंचों से बात की, जिन्होंने 26 जनवरी के बाद इस तरह के प्रस्ताव पारित किए. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस तरह के फैसले ग्रामीणों पर थोपे जाते हैं. उनके अनुसार, गांव वाले खुद ही आंदोलन में शामिल होने के लिए बेताब हैं.

पटियाला के काबुलपुर गांव के सरपंच लाख सिंह ने कहा कि हालांकि ग्राम पंचायत ने ऐसा प्रस्ताव पारित किया है, "आंदोलन में शामिल होने वालों की कतार बढ़ती ही जाए." मनसा के एक गांव के सरपंच रतनवीर सिंह ने कहा, "गांव का हर इंसान खुशी-खुशी सेवा करना चाहता है. पहले दिन से ही हमारे लोग (दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन स्थल में) हैं.”

रतनवीर के अनुसार, कुछ लोग तो बस ट्रैक्टर रैली के लिए दिल्ली गए थे. उन्होंने कहा कि जब पंजाब वापस लौटते वक्त रास्ते में हुई हिंसा के बारे में उन्होंने सुना, तो अपने ट्रैक्टरों को वापस प्रदर्शन स्थलों की ओर मोड़ दिया. तरनतारन जिले के फाजिलपुर गांव के सरपंच मंगल सिंह ने मुझे बताया कि ऐसा ही एक प्रस्ताव उनके गांव में भी पारित किया गया है. उन्होंने कहा कि उनके गांव के लोग एक गुरुद्वारे में इकट्ठा हुए और उन्होंने खुद प्रस्ताव पारित किया. "उन्होंने मुझे बस लेटरहेड पर अपनी मुहर लगाने के लिए कहा."

जतिंदर कौर तुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशकों से इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डेक्कन क्रॉनिकल सहित विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में लिख रही हैं.

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