26 जनवरी के बाद टिकैत की नई छवि : संयुक्त मोर्चा में शामिल पंजाब के किसान नेताओं के लिए नई चुनौतियां

17 फ़रवरी 2021
6 फरवरी 2021 को दिल्ली के गाजीपुर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राकेश टिकैत मीडिया से बात करते हुए. उस दिन एक प्रेस मीटिंग में पंजाब के संयुक्त किसान मोर्चा के छह नेताओं को टिकैत के हालिया बयानों को लेकर दो सवालों के जवाब देने पड़े.
अनिंदितो मुखर्जी / ब्लूमबर्ग / गेट्टी इमेजिस
6 फरवरी 2021 को दिल्ली के गाजीपुर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राकेश टिकैत मीडिया से बात करते हुए. उस दिन एक प्रेस मीटिंग में पंजाब के संयुक्त किसान मोर्चा के छह नेताओं को टिकैत के हालिया बयानों को लेकर दो सवालों के जवाब देने पड़े.
अनिंदितो मुखर्जी / ब्लूमबर्ग / गेट्टी इमेजिस

6 फरवरी को पंजाब के संयुक्त किसान मोर्चा के छह नेताओं द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राकेश टिकैत द्वारा दिए दो हालिया बयानों से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा. एसकेएम, बीजेपी द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाले मुख्य किसान संगठनों का एक संयुक्त मंच है. बीकेयू (अ) भी बाकी संगठनों के साथ आंदोलन में शामिल है. उत्तर प्रदेश के रहने वाले टिकैत ने कहा था कि उनका गृह राज्य और उत्तराखंड, 8 फरवरी को एसकेएम द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी चक्का जाम या नाकाबंदी में भाग नहीं लेंगे. उन्होंने आगे कहा, "हमने सरकार को कानूनों को निरस्त करने के लिए 2 अक्टूबर तक का समय दिया है." एसकेएम के नेतृत्व को शामिल किए बिना अकेले ही टिकैत द्वारा सभी निर्णय लिए जाना यह साफ तौर से दर्शाता है कि 26 जनवरी को रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद से सामूहिक रूप से चलने वाले आंदोलन में शक्ति केंद्र किस तरह से बदला है.

28 जनवरी के बाद से ही टिकैत को आंदोलन के एकमात्र नेता के रूप में दिखाया जा रहा है. इसके अलावा भी एसकेएम के नेतृत्व के लिए पिछले दो हफ्तों में चुनौतियां और बढ़ी हैं. इसमें गणतंत्र दिवस की रैली के बाद के दुष्परिणामों को झेलना भी शामिल है जिसमें हिंसा होने के अलावा 120 लोगों को गिरफ्तार किया गया और पंजाब से कई प्रदर्शनकारी लापता हो गए. एसकेएम को अभी इसे लेकर भी आत्मनिरीक्षण और जांच करनी है कि उनके किन निर्णयों के कारण 26 जनवरी को हुई रैली ने हिंसक रूप लिया था.

रैली के बाद सप्ताह भर से दिल्ली की तीन सीमाओं सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन को समाप्त करने का भारी दबाव बनने लगा.

टिकैत का संघ लगभग सात सप्ताह से गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहा था. 28 जनवरी को धरना स्थल पर बड़ी मात्रा में सुरक्षा बल जमा होने लगे और स्थानीय प्रशासन ने किसान नेताओं को बॉर्डर खाली करने का निर्देश दे दिया. लेकिन उसी समय टिकैत ने लाइव टेलीविजन पर एक भावुक भाषण दिया, जिससे हजारों लोग उनके समर्थन में बॉर्डर पर इकट्टा होने लगे और उन्होंने आंदोलन को आगे जारी रखा. कुछ समय पहले तक बीजेपी से संबद्ध रखने वाले टिकैत इसके बाद से आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे हैं. फिर भी, वह और अन्य किसान नेता संयुक्त रूप से आंदोलन को आगे बढ़ा रहा हैं.

पंजाब के किसान नेताओं द्वारा 6 फरवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस सिंघू बॉर्डर पर आयोजित की गई थी. एसकेएम के बत्तीस सदस्य सहित राज्य से लगभग 40 अन्य संघों के सदस्य उसमें शामिल हुए. बैठक के दौरान क्रांति किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल ने टिकैत के चक्का जाम के बयान पर सवालों का जवाब दिया. पाल ने बड़ी तेजी से एसकेएम सदस्यों के बीच किसी भी प्रकार के टकराव को खारिज करते हुए कहा कि सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं. लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि टिकैत ने बयान से पहले कोई परामर्श नहीं किया था. पाल ने कहा, "यह अच्छा रहता अगर यह संयुक्त रूप से किया जाता, मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे निर्णयों की जल्दबाजी में घोषणा नहीं करनी चाहिए." एक एसकेएम नेता ने नाम न छापने की शर्त पर मुझे बताया कि समूह में पंजाब के कुछ सदस्यों ने टिकैत के फैसले पर अपनी चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने कहा, "अब देखना यह है कि क्या टिकैत 18 फरवरी को किए जाने वाले देशव्यापी रेल रोको अभियान में साथ आएंगे या नहीं.

प्रभजीत सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं.

Keywords: Farmers' Protest Samyukt Kisan Morcha
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