यूपी पुलिस पर फिर लगा गोकशी के नाम पर लोगों से बर्बरता का आरोप

09 सितंबर 2020
बनारस के हरि बंधु अस्पताल में भर्ती सलीम कुरैशी.
सुनील कश्यप
बनारस के हरि बंधु अस्पताल में भर्ती सलीम कुरैशी.
सुनील कश्यप

30 अगस्त की रात करीब 2 बजे गाजीपुर जिले के दिलदारनगर गांव में पुलिस ने फल बेचने वाले 55 साल के सलीम कुरैशी के घर में घुस कर मारपीट की. उनकी पत्नी सरवरी बेगम ने बताया कि पुलिस वालों ने सलीम के 20 हजार रुपए भी चुरा लिए. पुलिस की पिटाई में सलीम की ऐड़ी का हिस्सा पैर से अलग हो गया. उत्तर प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि उसने अवैध गोकशी की खबर मिलने पर घर पर छापा मारा था.

कुरैशी परिवार गांव के उन लोगों में से हैं जिन्होंने इस साल कारवां को बताया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें परेशान किया है. इसी से मिलते-जुलते एक मामले में बिजनौर जिले के फरीदपुर काजी गांव के 8 मुस्लिम परिवारों ने मुझे बताया था कि 8 मई को पुलिस ने उनके घरों पर हमला किया, उन्हें गालियां दीं और घर के मर्दों को पीटा था. बाद में गांव वालों को पता चला था कि पुलिस ने गोकशी के शक पर उनके घरों में छापा मारा था. सहारनपुर जिले की गोकल विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री डॉ. खालिद अनीस अंसारी ने मुझे बताया कि उनके इलाके में भी हर दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं. अंसारी ने पसमांदा मुसलमानों पर शोध किया है. उन्होंने कहा कि राज्य में गोकशी रोकने के बहाने पुलिस गरीब मुसलमानों को निशाना बना रही है.

उस रात की घटना के बारे में सरवरी बेगम ने बताया, “शनिवार रात 2 बजे के आस-पास जब घर के सभी लोग सो रहे थे तो किसी ने दरवाजा खटखटाया. मैं दरवाजे के पास ही सो रही थी इसलिए मेरी आंख सबसे पहले खुली तो मैंने पूछा कौन है?” सरवरी ने आगे बताना जारी रखा, “दरवाजे के उस पार से आवाज आई, ‘हम हैं असलम.’ मैंने पूछा, ‘कौन असलम?’ क्योंकि हमें वह आवाज पराई जान पड़ी. मुझे वह आवाज मोहल्ले के किसी आदमी की नहीं लगी. मैं ऊपर छत पर गई और छत से देखने लगी कि कौन है. उन्होंने मेरे चेहरे पर अपनी टार्च मारी. मैंने फिर पूछा, ‘भैया-बाबू, आप कौन हो’, तो वे लोग मुझे मां-बहन की गालियां देने लगे. मैंने फिर पूछा कि आप लोग कौन हो, आखिर क्या बात है और अपनी टार्च मेरे चेहरे से हटाइए. एक आदमी फिर वह बोला कि असलम है, किवाड़ क्यों नहीं खोलती हो. फिर तो वह हमारे दरवाजे को तोड़ने लगा. एक दरवाजा घर का था. दूसरा दरवाजा बैठकी का था, जिसमें मेरा आदमी सो रहा था. हल्ला सुनकर वह जाग गए और उठने के बाद उन्होंने दरवाजा खोल दिया. जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला वे पांचों बेहरहमी से उन्हें मारने लगे.”

उनकी 15 साल की बेटी सुबी खातून ने मुझे बताया कि हल्ले से उसकी भी नींद टूट गई. उसने भी कहा, “अब्बू ने दरवाजा खोला तो पांच लोग उन्हें पीटने लगे. पांच में से तीन लोग वर्दी पहने थे और दो लोग वर्दी में नहीं थे. वे सारे लोग दारू पिए हुए थे और उनके साथ एक भी महिला पुलिसकर्मी नहीं थी. जब मेरी मां ने उनसे अब्बू को छोड़ देने के लिए कहा तो उन लोगों ने मेरी मां को भी मारा.”

सरवरी बेगम ने बताया कि वह बार-बार पुलिस से पूछ रही थीं कि वे लोग उनके पति को क्यों मार रहे हैं लेकिन पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने बताया, “जब पुलिस ने देखा कि घर के अंदर एक दरवाजा बंद पड़ा है, वह मेरे बड़े बेटे का कमरा है जो मुंबई में काम करता है, तो एक पुलिस वाले ने कहा, ‘वहां छिपा रखा होगा.’” बेगम ने कहा मैंने उनसे कहा कि आप लोग ठीक से बात करिए लेकिन उन लोगों ने मुझे दो झापड़ मारे. परिवार वालों ने उस कमरे की चाबी पुलिस वालों को दे दी. कमरे में पुलिस वालों को कुछ नहीं मिला.

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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