अगले यूपी चुनाव में कितना कारगर होगा 8 क्षेत्रीय दलों का भागीदारी मोर्चा?

02 सितंबर 2020
अरुण राजभर
अरुण राजभर

उत्तर प्रदेश की आठ क्षेत्रीय पार्टियों ने 2022 में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ भागीदारी संकल्प मोर्चा नाम से चुनावी गठबंधन बनाया है. मोर्चा में शामिल होने वाले दल हैं : सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी), जन अधिकार पार्टी, अपना दल (के), भारतीय वंचित समाज पार्टी, भारतीय मानव समाज पार्टी, जनता क्रांति पार्टी (आर), राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी (पी) और राष्ट्र उदय पार्टी.

इन दलों के नेता अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों से आते हैं. गठबंधन के नेता 2022 में राज्य सरकार का गठन करने या नहीं तो सरकार गठन में अपनी भूमिका के प्रति आशावान लग रहे हैं. एसबीएसपी के ओम प्रकाश राजभर संयुक्त मोर्चे के राष्ट्रीय संयोजक हैं और मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट के नेतृत्व में वर्तमान सरकार में मंत्री थे. राजभर ने मुझे बताया, "हमारे मोर्चे में पिछड़ी जातियों के नेता हैं जो अपने समुदायों के भीतर प्रभाव रखते हैं."

पारंपरिक रूप से ऊंची जाति की राजनीति करने वाली बीजेपी ने पिछले छह वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग समूहों पर अपनी पकड़ मजबूत बनाई है. उत्तर प्रदेश में यादव और जाटव को क्रमशः समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का मतदाता माना जाता है. सपा और बसपा के नेतृत्व में यादव और जाटव अन्य ओबीसी और दलित जाति समूहों की तुलना में अधिक प्रभावी हुए हैं. 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद, बीजेपी ने गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों को अपने पाले में लाने की कोशिश की है.

स्क्रॉल डॉट इन में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार बीजेपी ने दावा किया था कि उसने 2017 के राज्य चुनावों में अन्य कारणों के अतिरिक्त उन वर्गों तक पहुंचकर जीत हासिल की थी जो प्रतिनिधित्व से वंचित थे. 2019 के लोक सभा चुनावों में भी बीजेपी को ओबीसी से अच्छा-खासा प्रतिशत वोट प्राप्त हुआ था. एक अन्य विश्लेषण के अनुसार, “दो प्रमुख ओबीसी जातियों, कुर्मी और कोइरी से बीजेपी को 80 प्रतिशत वोट मिले थे. 72 प्रतिशत अन्य ओबीसी (यादव, कुर्मी और कोइरी को छोड़कर) ने बीजेपी को मतदान किया था." राजनीतिक टिप्पणीकारों ने कहा है कि ओबीसी में उपश्रेणियां बनाने के लिए बीजेपी के प्रयास- जो 27 प्रतिशत कोटे को इन श्रेणी में बांटेगा- प्रमुख ओबीसी समुदायों से इतर ओबीसी मतदाताओं को अपील करते हैं.

भागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जातियों के भीतर असंतोष का संकेत दे रहा है. हालांकि मोर्चे में शामिल कुछ पार्टियों से, जो पहले खुद ही बीजेपी के साथ गठबंधन में थीं, जब मैंने अगस्त में बात की थी तो उन सभी ने सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ सख्त विरोध जताया था.

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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