भारत-इजराइल संबंध वैचारिक नहीं है- शयरी मल्होत्रा

15 मार्च 2019
जुलाई 2017 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजराइल का दौरा किया, और छह महीने बाद उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत का दौरा किया. इस दौरान दोनों के बीच बेहद गर्मजोशी दिखाई दी.
थॉमस कॉएक्स/एएफपी/गैटी इमेजिस
जुलाई 2017 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजराइल का दौरा किया, और छह महीने बाद उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत का दौरा किया. इस दौरान दोनों के बीच बेहद गर्मजोशी दिखाई दी.
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28 फरवरी को ब्रिटेन के डिजिटल समाचार पत्र द इंडिपेंडेंट में रणनीतिक विश्लेषक और मध्य पूर्व संवाददाता रॉबर्ट फिस्क ने “भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाने में इजराइल की बढ़ी भूमिका” नाम से लेख प्रकाशित किया. अपने इस तर्क के बचाव में उन्होंने दो एक साथ चल रही प्रक्रियाओं का हवाला दिया. “इजराइल एक राजनीतिक रूप से खतरनाक अघोषित, अनाधिकारिक और अप्रत्यक्ष मुस्लिम विरोधी गठबंधन, भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के साथ बना रहा है”. दूसरा, भारत उसके हथियारों के लिए सबसे बड़ा बाजार बन गया है. वे भारत के सैन्य-औद्योगिक तानेबाने की ओर इशारा कर रहे थे. जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजराइल की यात्रा की और इस यात्रा के छह महीने बाद वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत के दौरे पर आए. फिस्क का तर्क है कि पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय हवाई आक्रमण का जिक्र करते हुए भारतीय मीडिया द्वारा राफेल स्पाइस-2000 “स्मार्ट बम” की बात करना कोई सामान्य बात नहीं है.

अपने उस लेख में फिस्क ने ब्रुसेल्स में यूरोपीय एशिया अध्ययन संस्था में एसोसिएट शोधकर्ता शयरी मल्होत्रा को उद्धृत किया. जनवरी में इजराइली अखबार हारेट्ज में शयरी मल्होत्रा ने लिखा था, “भारत को इजराइल के साथ मजबूत रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध बनाना जारी रखना चाहिए किंतु इन संबंधों को व्यवहारिक और परिवर्तनशील संबंधों की तरह देखा जाना चाहिए न कि वैचारिक संबंधों की तरह.” लेकिन फिस्क इस तरह के संबंधों को लेकर बहुत आशावान नहीं है. वे लिखते हैं, “यह कहना मुश्किल है कि जब इजराइल भारी मात्रा में भारत को हथियार बेच रहा है तो यहूदी राष्ट्रवाद, हिंदू राष्ट्रवाद को प्रभावित नहीं करेगा.”

फिस्क और मल्होत्रा दोनों ही भारत इजराइल संबंधों को मुस्लिम विरोधी गठबंधन की तरह पेश करने के प्रति सतर्क करते हैं तो भी मल्होत्रा फिस्क के कई निष्कर्षो को स्वीकार नहीं करतीं. इस संबंध में कारवां के स्टाफ राइटर प्रवीण दोंती ने शयरी मल्होत्रा से ईमेल से बात की. शयरी मल्होत्रा कहती हैं, “भारत सरकार में शामिल लोग, सामरिक समुदाय और साथ ही भारतीय जनता को इस बात का ख्याल अच्छी तरह से रखना चाहिए कि इस संबंध को मुस्लिम विरोधी गठबंधन बताना आकर्षक तो है लेकिन भारत का विवाद सिर्फ पाकिस्तान से है न कि अन्य मुस्लिम देशों से. इन देशों के साथ भारत के संबंध अच्छे हैं.”

फिस्क लिखते हैं, “यह कहना मुश्किल है कि जब इजराइल भारी मात्रा में भारत को हथियार बेच रहा है तो ‘यहूदी राष्ट्रवाद, हिंदू राष्ट्रवाद’ को प्रभावित नहीं करेगा.”

प्रवीण दोंती : वरिष्ठ पत्रकार रॉबर्ट फिस्क ने हाल में लिखा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाने का काम इजराइल कर रहा है क्योंकि भारत उसके हथियारों का सबसे बड़ा ग्राहक है. 2008-2012 और 2013-17 के बीच इजराइल से भारत में होने वाले हथियारों के आयात में 285 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. 2017 में मात्र इजराइल के साथ भारत ने 9 खरब 20 अरब डॉलर का रक्षा करार किया है. इस बारे में आपका क्या कहना है?

प्रवीण दोंती कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: Balakot foreign relations Pakistan Bharat Israel defence
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