संपत्ति हस्तांतरण का अपराधीकरण कर सांप्रदायिक अलगाव को बढ़ा रही गुजरात सरकार

23 अगस्त 2019
चरावत अहमदाबाद के दरियापुर क्षेत्र का एक इलाका है. दरियापुर में खाली मकानों और जीर्ण-शीर्ण संरचनाओं की ओर इशारा करते हुए, एक रियल एस्टेट ब्रोकर, गुलजार अहमद मोमिन ने कहा, "गरीब लोग, जिनका ये घर ही एक मात्र निवेश है, वे वास्तविक परेशानी में हैं".
कारवां के लिए निलीना एम एस
चरावत अहमदाबाद के दरियापुर क्षेत्र का एक इलाका है. दरियापुर में खाली मकानों और जीर्ण-शीर्ण संरचनाओं की ओर इशारा करते हुए, एक रियल एस्टेट ब्रोकर, गुलजार अहमद मोमिन ने कहा, "गरीब लोग, जिनका ये घर ही एक मात्र निवेश है, वे वास्तविक परेशानी में हैं".
कारवां के लिए निलीना एम एस

गुजरात के अहमदाबाद शहर में शाहपुर पड़ोस में एक आवासीय सोसायटी, सरदार कुंज के लगभग एक सौ अस्सी सदस्य दो साल से अपने घरों को बेचने की कोशिश कर रहे हैं. बिक्री के लिए एकमात्र बाधा गुजरात भूमि-हस्तांतरण कानून है जो संबंधित जिला कलेक्टर की मंजूरी के बिना "अशांत क्षेत्रों" के रूप में नामित क्षेत्रों में अचल संपत्तियों की बिक्री को प्रतिबंधित करता है. कानून राज्य सरकार को यह अधिकार देता है कि वह दंगों और हिंसा से प्रभावित हो सकना मान कर किसी क्षेत्र को अशांत घोषित कर दे. मुस्लिम बहुल क्षेत्र, शाहपुर, 2002 के बाद से इस तरह की घटनाओं के न दिखने के बावजूद कानून के तहत एक अशांत क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध है. सरदार कुंज निवासी संघ के अध्यक्ष संजीव पटेल ने कहा "शाहपुर एक पिछड़ा इलाका है जहां हमारे पास अच्छे स्कूलों जैसी सुविधाएं नहीं हैं. यह एक सामाजिक-सांस्कृतिक समस्या भी है क्योंकि लोग यहां के निवासियों के साथ विवाह संबंध रखना पसंद नहीं करते हैं."

इस कानून का नाम गुजरात प्रोटेक्शन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्प्लॉएबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर टेनेंट्स ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम इविक्शन फ्रॉम डिस्टर्बड एरियाज एक्ट, 1991 (गुजरात अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध और अशांत क्षेत्रों में किरायेदारों की परिसर से बेदखली से संरक्षण का प्रावधान 1991) है जिसे आमतौर पर डिस्टर्बड एरियाज एक्ट (अशांत क्षेत्र अधिनियम) के रूप में जाना जाता है. इसे राज्य में बार—बार होने वाली सांप्रदायिक हिंसा के प्रकाश में संपत्तियों की संकट बिक्री यानी जब संपत्तियों को बाजार मूल्य से कम दर पर बेचा जाता है, की जांच करने के लिए पारित किया गया था. संपत्तियों को स्थानांतरित करने के लिए अधिनियम एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया निर्धारित करता है. कलेक्टर की मंजूरी हेतु, संबंधित पक्षों को बिक्री के लिए रजिस्ट्रार और स्थानीय पुलिस से क्षेत्र की जांच करने और हस्तांतरण को मंजूरी देने के लिए उनकी सहमति की पुष्टि करनी होगी. इसके बाद, कलेक्टर मंजूरी देता है.

हालांकि, व्यवहार में राज्य ने मुस्लिमों के साथ संपत्ति के लेन-देन को अलग करने के लिए कानून को हथियार बनाया है, जिससे धार्मिक तर्ज पर स्थानीय अलगाव हो गया है. पटेल ने कहा कि आम तौर पर, जब संपत्ति विक्रेता मुस्लिम खरीदारों के साथ लेन—देन करने के लिए कलेक्टरों से संपर्क करते हैं, तो "अनुमति देने से इनकार किया जाता है या आवेदनों को महीनों या एक साल से अधिक समय तक लंबित रखा जाता है." अहमदाबाद में एक उप-पंजीयक कार्यालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की कि "अनुमोदन को लटकाने या देरी के अधिकांश मामले तब होते हैं जब खरीदार मुस्लिम होता है."

सांप्रदायिक अलगाव का राज्य का एजेंडा इस साल जुलाई में प्रदर्शित हो गया, क्योंकि गुजरात विधानसभा ने संपत्ति लेन-देन में हस्तक्षेप करने और सांप्रदायिक हिंसा की संभावना वाले क्षेत्रों का निर्धारण करने के लिए राज्य को और अधिक छूट देने के लिए कानून में संशोधन किया. जुलाई महीने के बाद के संशोधन पर चर्चा करते हुए, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “किसी मुस्लिम को कोई हिंदू संपत्ति बेचे यह ठीक नहीं है. किसी हिंदू को कोई मुस्लिम संपत्ति बेचे यह भी ठीक नहीं है." उन्होंने कहा, "हमने उन्हें (मुस्लिमों) यह बताने के लिए कि उन्हें अपने क्षेत्रों में संपत्ति खरीदनी चाहिए यह नियम उन क्षेत्रों में निर्धारित किया है, जहां दंगे हुए हैं".

हालांकि अधिनियम सीधे तौर पर यह नहीं बताता है, लेकिन रूपानी की बातें सच हैं. रूपानी की तरह, राज्य के दक्षिणपंथी नेता गुजरात में हिंदू-मुस्लिम अलगाव की अपनी मांग में मुखर रहे हैं, जिसमें मुसलमानों के हिंदुओं से संबंधित भूमि पर कब्जे के बारे में पागलपन भरे उन्माद की भावना पैदा करना शामिल है. वे अशांत क्षेत्र अधिनियम की एक गलत व्याख्या का प्रचार करते हैं कि धार्मिक तर्ज पर स्थानिक अलगाव यह सुनिश्चित करेगा कि दंगे न हों. अहमदाबाद के सीईपीटी विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले एक अकादमिक और लेखक फहद जुबरी कहते हैं कि, “‘अन्य’ का डर स्थानिक सीमाओं और अलगाव की भौगोलिक स्थितियों में बदल जाता है.”

निलीना एम एस करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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