आदित्यनाथ का आतंक राज

जनवरी 2020 में प्रयागराज में आरती करते आदित्यनाथ. पीटीआई
जनवरी 2020 में प्रयागराज में आरती करते आदित्यनाथ. पीटीआई

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परवेज परवाज गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने से गुजर रहा था कि तभी उसकी निगाह महाराणा प्रताप की मूर्ति के पास जुटी एक बड़ी भीड़ पर गई. बात 27 जनवरी 2007 की है. शाम ढलने लगी थी. उसने देखा कि भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर के सांसद आदित्यनाथ अपने भगवा लबादे में एक भड़काऊ भाषण दे रहे थे और भीड़ में से लोग उत्साह में बीच-बीच में जय जयकार कर रहे थे. परवेज को इस बात की जानकारी थी कि अभी हाल के मुहर्रम के जुलूस के दौरान शहर में कहीं मुठभेड़ हो गई थी जिसमें एक हिंदू लड़का घायल हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई थी. इस घटना से काफी तनाव फैला हुआ था. उसने मुझे बताया कि ‘‘इस उत्तेजक वातावरण को देखकर मैं खुद को बचते-बचाते उस भीड़ में घुसा.’’ भीड़ में मुख्य रूप से हिंदू युवा वाहिनी के सदस्य थे. युवकों की इस वाहिनी का गठन आदित्यनाथ ने तकरीबन पांच साल पहले किया था. परवेज अपने साथ हमेशा एक कैमरा रखता था और उसने उस कैमरे की मदद से आदित्यनाथ के भाषण को रेकार्ड करना शुरू किया.

आदित्यनाथ ने जोशीले अंदाज में कहा, ‘‘एक हिंदू के खून के बदले आने वाले समय में हम प्रशासन से एफआईआर दर्ज नहीं कराएंगे बल्कि कम से कम 10 ऐसे लोगों की हत्या उससे करवाएंगे.’’ भीड़ ने उत्साह में तालियां बजाईं.

आदित्यनाथ का भाषण खत्म होते ही परवेज चुपचाप अपने घर लौट आया लेकिन शहर उबलने लगा था. सुनील सिंह ने मुझे बताया कि ‘‘आदित्यनाथ का भाषण खत्म होने से पहले ही जहां वह सभा हो रही थी उसके पास के एक होटल को लोगों ने लूट लिया और तहस-नहस कर दिया.’’ उन दिनों सुनील सिंह हिंदू युवा वाहिनी का राज्य अध्यक्ष था और आदित्यनाथ का दाहिना हाथ था. इस मामले में वह भी एक आरोपी है. आदित्यनाथ के भाषण से एकदम पहले उसने ही भीड़ को संबोधित किया था. उसने मुझे बताया कि ‘‘वह होटल एक स्थानीय मुसलमान का था. वहां से दंगा शुरू हुआ जो धीरे-धीरे गोरखपुर के अन्य हिस्सों तक फैल गया.’’ इस दंगे में कम से कम दो लोग मारे गए और करोड़ों की संपत्ति जलकर स्वाहा हो गई.

अगले दिन जिला अधिकारी की निषेधाज्ञा के बावजूद आदित्यनाथ और उनके समर्थकों ने एक जुलूस की शक्ल में गोरखपुर के दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा किया. आदित्यनाथ को उनकी वाहिनी के दर्जन भर से अधिक नेताओं सहित गिरफ्तार कर लिया गया. यह गिरफ्तारी 29 जनवरी को ऐसे समय की गई ताकि वाहिनी के सदस्य मुसलमानों द्वारा अपने कंधों पर ले जा रहे ताजिया को जलाने की धमकी अमल में न ला सकें.  

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