अमित शाह ने चुनावी हलफनामे में नहीं दी उस वित्तीय देनदारी की जानकारी जिसकी वजह से मिला था बेटे की कंपनी को क्रेडिट; जय शाह की फर्म को पिछले एक साल में मिलने वाले वाले क्रेडिट में नाटकीय बढ़ोतरी

13 अगस्त 2018
कारवां  द्वारा हासिल किए गए नए दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि 2016 से अब तक कुसुम फिनसर्व को दो बैंकों और एक सरकारी उपक्रम से 97.35 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा मिली है.
एएम पंथाकी/एएफपी/गैटी इमेजिस
कारवां  द्वारा हासिल किए गए नए दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि 2016 से अब तक कुसुम फिनसर्व को दो बैंकों और एक सरकारी उपक्रम से 97.35 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा मिली है.
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अमित शाह ने बेटे जय शाह की फर्म कुसुम फिनसर्व एलएलपी के लिए अपनी दो संपत्तियों को गिरवी रखा था. कुसुम फिनसर्व की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में मिलने वाली क्रेडिट सुविधाओं में नाटकीय रूप से तेजी देखने को मिली है. हालांकि, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा 2017 में दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में क्रेडिट सुविधाओं के बदले इस देनदारी के ब्यौरे का कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता है. सार्वजनिक रूप से मौजूद दस्तावेजों के अनुसार 2016 में कुसुम फिनसर्व के 25 करोड़ रुपए के क्रेडिट के लिए अमित शाह की दो संपत्तियों को कालुपुर कामर्शियल को-ऑपरेटिव बैंक में गिरवी रखा गया था. यह गुजरात का सबसे बड़ा को-ऑपरेटिव बैंक है. कारवां द्वारा हासिल किए गए नए दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि 2016 से अब तक कुसुम फिनसर्व को दो बैंकों और एक सरकारी उपक्रम से 97.35 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा मिली है. कंपनी द्वारा यह क्रेडिट पांच हिस्सों में क्रमश: 10.35 करोड़ रुपए, 25 करोड़ रुपए, 15 करोड़ रुपए, 30 करोड़ रुपए और 17 करोड़ रुपए के रूप में हासिल किया गया. कुसुम फिनसर्व को मिलने वाले क्रेडिट में पिछले एक वर्ष के दौरान 300 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कंपनी की ताजा बैलेंसशीट में इस की कुल जमा पूंजी मात्र 5.83 करोड़ रुपए दर्शाई गई है.

अहमदाबाद की जिन तीन प्रॉपर्टी के बदले जय शाह की फर्म को क्रेडिट सुविधाओं मिली, जिसमें शिलाज गांव स्थित 3,839 वर्गमीटर व 459 वर्गमीटर के दो प्लॉट और बोडकदेव के सार्थिक-2 कॉम्प्लेक्स के तीसरे फ्लोर में स्थित 186 वर्गमीटर का ऑफिस स्पेस शामिल है.

शिलाज गांव स्थित दो जमीनों का स्वामित्व अमित शाह के पास है. कालुपुर बैंक और कुसुम फिनसर्व के बीच मई 2016 में किए गए बंधकनामे में अमित शाह को मॉर्टगेजर नंबर-2 और दोनों प्लॉट के असली मालिक के रूप में दर्ज किया है. जय शाह को पिता द्वारा गिरवी रखी गई संपत्तियों के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर (वकालतनामा हासिल करने वाले व्यक्ति) के रूप में दर्ज किया गया है. दस्तावेजों को देखते हुए फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने बताया कि जब कोई व्यक्ति कर्ज के लिए संपत्ति गिरवी रखता है तो मूल रूप से वही गारंटीकर्ता या जमानतकर्ता होता है. “कोई वित्तीय लाभ न होने के बावजूद वह बिजनेस में भागीदार बन जाता है.”

अमित शाह राज्यसभा में सांसद हैं. रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के अनुसार विधानसभा या संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए चुनावी हलफनामे में अपनी सभी संपत्तियों और वित्तीय देनदारियों की सही जानकारी देना आवश्यक है. कानून के मुताबिक चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी मुहैया कराने पर उम्मीदवार का नामांकन रद्ïद किया जाता है.

कारवां ने जब पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाय कुरैशी से यह जानना चाहा कि किसी उम्मीदवार द्वारा चुनावी हलफनामे में वित्तीय देनदारी के बारे में जानकारी छुपाने के क्या मायने हैं, तो उन्होंने बताया कि चुनावी हलफनामे में और कुछ नहीं बल्कि पूरा सच बताया जाना चाहिए. यदि पहली नजर में किसी उम्मीदवार के खिलाफ अनियमितता का मामला नजर आता है तो जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए. लेकिन वास्तविक प्रश्न यह है कि ऐसे राजनीतिज्ञों के लिए सजा कितनी कठोर होनी चाहिए.

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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