सरकार ने कश्मीर संकट को और गहरा दिया हैः पूर्व वार्ताकार एमएम अंसारी

07 अगस्त 2019

5 अगस्त को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जम्मू—कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को प्रभावहीन कर रही है. शाह ने सदन में इससे संबंधित दो बिल पेश किए— जम्मू कश्मीर आरक्षण (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2019 तथा जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक. साथ ही शाह ने उसी तारीख को जारी राष्ट्रपति के आदेश का भी हवाला दिया जिसने भारतीय संविधान के सभी प्रावधानों को राज्य पर लागू कर दिया.

आजादी मिलने के बाद जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय को अनुच्छेद 370 ने औपचारिक स्वरूप दिया था. इसके तहत, रक्षा और विदेश नीति के मामलों के अतिरिक्त, सभी मामलों में केन्द्र सरकार को जम्मू और कश्मीर सरकार से सहमति लेनी जरूरी है.

इसके बावजूद हाल की घोषणा करते वक्त सरकार ने ऐसा नहीं किया. दिसंबर 2018 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है और सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश में राज्य सरकार की सहमति की व्यवस्था को राज्यपाल की सहमति से पूरा कर लिया. उसी प्रकार पुनर्गठन विधेयक लाकर लद्दाख और जम्मू और कश्मीर को केन्द्र शासित राज्य बनाने का फैसला भी एक राज्य सरकार की अनुपस्थिति में लिया गया है. इन फैसलों की संवैधानिक मान्यता पर सवाल खड़े होते हैं.

एमएम अंसरी वरिष्ठ नौकरशाह हैं. जो मुख्य सूचना आयुक्त भी रह चुके हैं और कांग्रेस सरकार के वक्त, 2010 और 2011 के बीच, जम्मू—कश्मीर मामले पर केन्द्र सरकार के तीन सदस्यीय वार्तादल में वार्ताकार थे. इस दल ने “कश्मीर समस्या के स्थाई राजनीतिक समाधान” पर केन्द्रित एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.

अंसारी ने हाल के घटनाक्रम पर कारवां की एडिटोरियल फेलो अमृता सिंह से बातचीत की. नीचे प्रस्तुत है उस बातचीत का संपादित अंश.

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