सम्भल में सीएए विरोधी आंदोलन को बीजेपी और पुलिस ने कैसे बनाया सांप्रदायिक

15 जनवरी 2020
सम्भल के चौधरी सराय इलाके में 19 दिसंबर 2019 को रायसत्ती पुलिस चौकी के बाहर का दृश्य. उस दिन, चौधरी सराय से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर सम्भल के पालिका मैदान में सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हिंसक बल प्रयोग किया. अगले दिन कस्बे में सीएए विरोधी प्रदर्शन हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पथराव में बदल गया.
प्रमोद अधिकारी
सम्भल के चौधरी सराय इलाके में 19 दिसंबर 2019 को रायसत्ती पुलिस चौकी के बाहर का दृश्य. उस दिन, चौधरी सराय से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर सम्भल के पालिका मैदान में सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हिंसक बल प्रयोग किया. अगले दिन कस्बे में सीएए विरोधी प्रदर्शन हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पथराव में बदल गया.
प्रमोद अधिकारी

20 दिसंबर को दोपहर 3.30 बजे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सम्भल में रहने वाला 15 साल का एक लड़का एक घंटे के लिए ट्यूशन पढ़ने गया था. वह लड़का महबूब खान सराय की एक चॉल में अपने मां-बाप के साथ रहता था. लड़के को ट्यूशन लेने के लिए शंकर चौराहा जाना पड़ता था, जो लगभग एक किलोमीटर दूर है. उस दिन दोपहर में मुसलमानों ने नागरिकता संशोधन कानून (2019) के विरोध में शंकर चौराहा के नजदीक विरोध प्रदर्शन किया था. उत्तर प्रदेश पुलिस ने विरोध का बर्बर दमन किया और प्रदर्शनकारियों पर लाठियों और आंसू गैस से हमला किया. पुलिस ने लोगों पर गोलियां भी चलाई. उस दिन सम्भल में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई.

शाम 5 बजे तक जब वह लड़का घर नहीं लौटा, तो मां परेशान हो गई. लड़के की मां ने मुझे बताया, “मैं ट्यूशन वाली जगह में उसे देखने गई, तो टीचर ने बताया कि मेरा लड़का पढ़ कर घर के लिए निकल गया था. मुझे बताइए कि क्या मेरे लड़के को ट्यूशन भेजना मेरी गलती थी?”

उस वक्त तक सम्भल में जो दिन में हुआ था, उसकी खबर फैल चुकी थी. चॉल में डर और घबराहट का माहौल था. लग रहा था जैसे गली तक जाना भी खतरनाक है. फिर भी तकरीबन 9 बजे चार औरतों ने, जिनके बच्चे घर नहीं लौटे थे, हिम्मत दिखाई और नजदीकी कोतवाली पुलिस स्टेशन शिकायत करने पहुंची. पुलिसवालों ने इन औरतों को “पत्थरमार औरतें” कह कर पुलिस स्टेशन से भगा दिया.

बाद में इन औरतों को पता चला कि उनकी औलादें पुलिस हिरासत में हैं. अगले तीन दिनों तक पुलिस ने औरतों को नहीं बताया कि उनके बेटे किस जेल में बंद हैं. 15 साल के लड़के की मां ने मुझे बताया, “क्या वे देख नहीं सकते कि उसके पास कॉपी और एक-दो किताबें हैं? क्या पुलिस और प्रशासन के बच्चे नहीं हैं? अगर एक घंटे के लिए भी उनके बच्चे गुम हो जाएं, तब उनको पता चलेगा कि क्या बीतती है. अगर हम भी एसएचओ, नेता होते, तो हमारे बच्चे भी बाहर घूम रहे होते. बताओ, हमारी औलादें ही क्यों गिरफ्तार हुईं?”

पुलिस और प्रशासन की खामोशी के बीच चॉल समेत पूरे सम्भल में अफवाहें फैलने लगीं. कोई बताने लगा कि लड़कों को मुरादाबाद की जेल में रखा है, तो कोई कह रहा था कि सम्भल की ही धनारी या बहजोई जेल में लड़के कैद हैं.

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: CAA NRC police brutality protest
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