गोली मारना, जल्दबाजी में शवों को दफनाने का दबाव डालना और पोस्टमार्टम रिपोर्ट गायब करना, मेरठ पुलिस की बर्बरता पर ग्राउंड रिपोर्ट

07 जनवरी 2020
20 दिसंबर को मेरठ में हुए सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान अलीम अंसारी की गोली मार कर हत्या कर दी गई. अपने घर में अलीम के परिजन. बीच में उनके भाई, सलाउद्दीन अंसारी जो दिव्यांग हैं.
कारवां के लिए ऋषि कोछड़
20 दिसंबर को मेरठ में हुए सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान अलीम अंसारी की गोली मार कर हत्या कर दी गई. अपने घर में अलीम के परिजन. बीच में उनके भाई, सलाउद्दीन अंसारी जो दिव्यांग हैं.
कारवां के लिए ऋषि कोछड़

26 दिसंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मेरठ में नागरिकता (संशोधन) कानून (2019) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया. इसमें एक अनजान व्यक्ति रिवॉल्वर की तरह दिखने वाले हाथियार को लहरा रहा था और गोली चला रहा था. पुलिस ने दावा किया कि यह वीडियो पिछले शुक्रवार का है, जिस दिन शहर में सीएए का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था. 20 दिसंबर प्रदर्शन के दौरान कम से कम पांच लोग मारे गए थे और उन सभी की मौत बंदूक की गोली के घावों से हुई थी. विरोध प्रदर्शन के अगले दिन, राज्य पुलिस प्रमुख ओपी सिंह ने कहा कि "प्रदर्शनकारियों पर एक भी गोली नहीं चलाई गई" और "प्रदर्शनकारी आपस की गोलीबारी में मारे गए." फुटेज इस बात को सही साबित करने के लिए अपलोड की गई थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने की पुलिसिया कार्रवाई न्यायसंगत थी.

राज्य भर में अब तक हुई कम से कम 19 लोगों की हत्याओं के तर्क में उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार इसी तर्क का इस्तेमाल कर रही है और 21 जिलों में प्रदर्शनकारियों पर की गई क्रूर कार्रवाई को सही ठहरा रही है. लेकिन वकील, कार्यकर्ता, मानवाधिकार समूह, फैक्ट फाइडिंग टीमें, नागरिक समूह और जमीनी रिपोर्टें इन बातों को धता बताती हैं. इन रोपोर्टों ने सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शनों में पुलिस द्वारा अत्यधिक और अंधाधुंध बल प्रयोग और मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों को खास तौर पर निशाना बनाए जाने पर रोशनी डाली हैं.

20 दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा शहर मेरठ, जिसका सांप्रदायिक टकराव को विचित्र इतिहास रहा है, पुलिस और सीएए के विरोध में खड़े प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना. उस शुक्रवार को दोपहर की नमाज के बाद, शहर के बीचों-बीच बसे सभी मुस्लिम इलाकों, फिरोज नगर, ट्यूबवेल तिराहा और कोतवाली में सीएए के विरोध में मार्च शुरू हुआ. मार्च करने वाले भुमिया का पुल क्षेत्र से प्रह्लाद नगर की ओर जा रहे थे. ये क्षेत्र दो किलोमीटर के दायरे में हैं. प्रह्लाद नगर के लिसाड़ी गेट पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, लगभग बारह सौ प्रदर्शनकारियों की भीड़, "सीएए के खिलाफ नारेबाजी कर रही थी, अपमानजनक व्यवहार कर रही थी" साथ हिंसा की धमकी दे रही थी. इस पर कोई एक राय नहीं है कि किसने या क्यों झड़प शुरू हुई. लेकिन करीब 2.30 बजे पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए क्रूर कार्रवाई की जो दो घंटे तक चली.

इन दो घंटों में पांच लोग मारे गए और एक अन्य व्यक्ति की गोली लगने के बाद 26 दिसंबर को मौत हो गई. आधिकारिक तौर पर मेरठ में कुल छह लोगों की मौत हुई. लेकिन जब मैंने वहां जाकर स्थानीय लोगों से बात की तो कई लोगों ने आधिकारिक आंकड़े को खारिज करते हुए मुझे बताया कि मरने वालों की असली संख्या बहुत अधिक है. उन्होंने बताया कि लोग अभी भी लापता हैं या अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों में संपर्क करने से डरते हैं. जिले में इंटरनेट बंद होने से संचार व्यवस्था बहुत कठिन हो गई थी और मीडिया के प्रति नागरिकों का भरोसा बहुत ज्यादा घटा है. मैं मारे गए पांच लोगों के परिवारों, दोस्तों और पड़ोसियों से मिला. मारे गए सभी लोग बेहद गरीब परिवारों से थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे. वे विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे और सुरक्षा के लिहास से जल्द घर लौट रहे थे.

मारे गए लोगों के परिवारों और इन क्षेत्रों के निवासियों ने मीडिया से मोहभंग और गुस्सा जाहिर किया. पत्थरबाजों के इलाकों की निशानदेही कर रहे पुलिसिया जासूसों के बारे में स्थानीय अखबारों की रिपोर्ट ने उनके भय और उन्माद में और इजाफा किया. स्थानीय हिंदी रिपोर्टों के प्रति लोगों की अविश्वसनीयता प्र​त्येक मृतक के परिवार के साथ बातचीत में साफ जाहिर थी. "अगर आप हमारी बात को लिखेंगे ही नहीं, तो हमसे बात करने की परेशानी भी क्यों उठाते हो?" हमने जिन परिवारों से बात की, उन्होंने हमें बताया कि कई हिंदी अखबारों के रिपोर्टर उनसे मिले थे और उनकी बातें अच्छी तरह से सुनीं थीं. लेकिन किसी भी अखबार ने उनकी बात को कभी नहीं छापा.

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: CAA police brutality Uttar Pradesh Police protest NRC
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