“सीएए और एनआरसी के खिलाफ पूरा मुल्क एक है”, चंद्रशेखर आजाद

23 दिसंबर 2019
20 दिसंबर की रात को जामा मस्जिद पर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद.
शाहीद तांत्रे
20 दिसंबर की रात को जामा मस्जिद पर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद.
शाहीद तांत्रे

20 दिसंबर को जामा मस्जिद में हुए प्रदर्शन में भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद ने भी भाग लिया. वहां मौजूद हजारों लोगों के बीच आजाद भारतीय संविधान को हाथों में लेकर “संविधान जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे.

उसी दिन देर रात कारवां के स्टाफ राइटर सागर और फोटो संपादक शाहिद तांत्रे ने आजाद से जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर बातचीत की. बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और अदालत के सामने पेश किया. तीस हजारी कोर्ट ने आजाद की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

सागर : अपनी गिरफ्तारी और रिहाई के बारे में बताएं?
चंद्रशेखर आजाद : सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस के जवानों ने पकड़ कर एक कमरे में बंद कर दिया. लेकिन हमारे लोगों ने उनको घेर लिया और मेरी रिहाई की मांग की जिसके बाद उन्होंने मुझे जाने दिया. वे बोले कि ‘भैया जाओ जाकर अपना काम करो’. और मेरा काम क्या था? मैं वापस आकर विरोध करने लगा.

पुलिस ने कहा तुझे उल्टा लटका देंगे अगर तू मुसलमानों की बात करेगा. मैने उनसे कहा कि देखो मुझे उल्टा लटका दो या कत्ल कर दो लेकिन मैं ईमान की बात जरूर करूंगा और मेरा ईमान गवाही देता है कि देश को तोड़ा जा रहा है. पुलिस हम पर भी हमला कर सकती थी. हमें भड़का रही थी लेकिन हमने जवाब नहीं दिया क्योंकि हम लोग पीसफुल प्रोटेस्ट कर रहे थे. इन्हीं के लोग सिविल वर्दी में हमारे लोगों को भड़का रहे थे लेकिन हमारे लोगों ने सबको समझाया कि हम यहां से नहीं जाएंगे और यहीं प्रोटेस्ट करते रहेंगे. हम हिंसा का बिल्कुल समर्थन नहीं करते क्योंकि हमें पता है कि हिंसा जानबूझ कर कराई जा रही है एनआरसी-सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों को हिंसक साबित करने के लिए.

सागर : कानपुर में 8 लोगों को गोली मारी गई. उत्तर प्रदेश आपका राज्य है. राज्य भर में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा है और पीटा जा रहा है. आपकी पार्टी वहां है लेकिन आप दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं.
चंद्रशेखर : जो सीढियां है, (जामा मस्जिद की ओर इशारा करते हुए) मैं और आप जिन पर आप खड़े है, जब देश का बंटवारा हो रहा था तब मौलाना अबुल कलाम ने इन्हीं सीढ़ियों पर खड़े होकर कहा था कि हम बंटवारा नहीं होने देंगे, जब अंग्रेज बंटवारा कर रहे थे. ऐसी जगह को छोड़ कर मैं कहां जाता. मेरा काम है कि मैं इतिहास को लोगों तक पहुंचाऊं. आज मुसलमानों को ये लोग कह रहे हैं सीएए में तुम्हें नहीं रहने देंगे. घुसपैठिए बनाकर कैम्प में डाल देंगे. मैं कह रहा हूं आप लोगों को बाहर से लाने को बात कर रहे हो. लाकर रखोगे कहां? अडानी, अंबानी की कोठियों में? उनके लिए पैसे कहां से लाएंगे जिनको बुला रहे हैं? उनको नौकरी कहा से देंगे, मकान कहां से देंगे? इतनी पावर है आपमें? आप खुद भुखमरी के कगार पर खड़े हैं. ये ड्रामा बंद कीजिए, सीएए लाकर जो आपसे गलती हुई उसे स्वीकार कीजिए और इस्तीफा देकर घर बैठिए. आपके जैसे झूठे लोगों की जरूरत नहीं है हमें.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

शाहिद तांत्रे कारवां के सहायक फोटो संपादक हैं.

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