“हमारा लोकतंत्र एक ढोंग है”, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के संस्थापक जगदीप छोकर से बातचीत

शैलेश रावल/इंडिया टुडे ग्रुप/गैटी इमेजिस
शैलेश रावल/इंडिया टुडे ग्रुप/गैटी इमेजिस

एजाज अशरफ : किसी लोकतंत्र की गुणवत्ता को मापने का आधार क्या है?

जगदीप एस. छोकर : एक अच्छा लोकतंत्र उसके प्रतिनिधित्व से जाना जाता है. जब प्रत्येक नागरिक को एहसास होता है कि समाज को जिस ढंग से चलाया जा रहा है उसमें उसकी इच्छा शामिल है. यदि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कोई उम्मीदवार 15 प्रतिशत से अधिक मत हासिल कर जीतता है तो क्या उसे जनता का वास्तविक प्रतिनिधि माना जा सकता है? इसीलिए भारतीय विधि आयोग ने अपनी 170वीं रिपोर्ट में अनुशंसा की थी कि जब तक किसी उम्मीदवार को डाले गए कुल वोटों तब 51 प्रतिशत मत प्राप्त न हो उसे निर्वाचित नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन एक अच्छे लोकतंत्र में उम्मीदवार को कुल पंजीकृत वोटों का 50 फीसदी से अधिक मत मिलना चाहिए. मैं यहां एक बार-बार कही जाने वाली बात दोहराना चाहता हूं कि लोकतंत्र एक निरंतर चलने वाली यात्रा है जिसका गंतव्य नहीं होता. इसलिए हमें लोकतंत्रीकरण के स्तर पर गौर करना चाहिए. कई देशों में लोकतंत्रीकरण अन्य देशों के मुकाबले अधिक हुआ है.

एए : एडीआर के आपके साथी त्रिलोचन शास्त्री ने 2014 के चुनावों का विश्लेषण कर दिखाया था कि सभी पार्टियों में गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों ने बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों से अधिक संख्या में जीत दर्ज की है. ऐसा क्यों?

जेएससी : अपराधी उम्मीदवारों को लोग वोट क्यों देते हैं? इसका एक कारण यह है कि ये लोग “रोबिन हुड” की तरह होते हैं जो अमीरों को लूट कर गरीबों को देते हैं. साथ ही, ये लोग राज्य की रिक्ती को भरते हैं. यदि मुझे आपके खिलाफ कोई शिकायत है तो मैं कोर्ट जा सकता हूं. लेकिन इसमें बहुत वक्त लग जाएगा. किंतु यदि मैं किसी स्थानीय बाहुबली के पास जाकर शिकायत करता हूं तो वह मेरी शिकायत का निवारण दो दिनों में कर देगा. यहां बाहुबली को शिकायत करने वाला, सेवा देने वाला के रूप में देखता है. यह सेवा राज्य को देनी चाहिए थी.

पिछले साल अक्टूबर और दिसंबर के बीच एडीआर ने मतदाताओं के विचारों को जानने के लिए एक सर्वे किया था. हमने प्रत्येक निर्वाचन सीट से 500 लोगों से बात की और कुल 2 लाख 75 हजार लोगों के नमूने एकत्र किए. 30 प्रतिशत लोगों ने हमें बताया कि वे आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार को इसलिए वोट देते हैं क्योंकि वह उनकी जाति या धर्म का होता है.

एजाज अशरफ दिल्ली में पत्रकार हैं.

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