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1985 से लेकर आज तक लगभग हर सुबह दिल्ली के झंडेवालान इलाके में श्री बाबा सर रतन नाथ जी मंदिर दरगाह के सामने मदन लाल अपनी फलों की दुकान लगाते हैं. जिसे ‘हर श्री नाथ मंदिर दरगाह’ के नाम से जाना जाता है. यह रतन नाथ का मंदिर है, जो 11वीं शताब्दी के गोरखनाथ के शिष्य थे, जिनका रचा साहित्य नाथ मठवासी व्यवस्था की स्थापना का आधार बना. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय बिष्ट, योगी आदित्यनाथ, वर्तमान में गोरखनाथ मठ के प्रमुख हैं, जो इसी संप्रदाय की प्रमुख पीठों में से एक है.
इसी मंदिर के पीछे एक भव्य इमारत खड़ी है. जिसका नाम है केशव कुंज. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दिल्ली मुख्यालय है. पिछले कई दशकों में लाल ने केशव कुंज को दो मंजिला इमारत से तीन भव्य ऊंची मीनारों में बदलते देखा है. उन्होंने केशव कुंज के बाईं ओर स्थित प्रसिद्ध झंडेवालान मंदिर का विस्तार भी देखा. उन्होंने मंदिर की ओर इशारा करते हुए मुझसे कहा, ‘हर श्री नाथ मंदिर हमेशा से ऐसा ही था.’
पिछले साल 29 नवंबर को लाल जब सुबह अपनी दुकान पर पहुंचे तो उनके सामने बड़ी भीड़ खड़ी थी. पुलिस ने उनकी दुकान की ओर जाने वाली सड़क को दोनों तरफ़ से बंद कर दिया था और मंदिर के श्रद्धालु चारों ओर जमा हो गए थे. उन्हें पता चला कि अधिकारी अभियान चला रहे थे. अभियान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और रात 8 बजे तक किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई. जब अंततः उन्हें अंदर जाने दिया गया, तो उन्होंने देखा कि मंदिर को तो छुआ तक नहीं गया था, लेकिन मंदिर के लिए आवंटित लगभग 2,400 वर्ग गज़ का क्षेत्र सील कर दिया गया था.
घटनास्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में से एक शिव चावला ने मुझे बताया कि पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज किया क्योंकि वहां मौजूद कई लोगों ने आवंटित क्षेत्र को इस तरह कब्ज़ाने का विरोध किया. पुलिस ने शिव समेत क़रीब 30 लोगों को हिरासत में ले लिया. उन्होंने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि यह एक सनातन स्थान है न कि दरगाह, भले ही इसे ऐसा नाम दिया गया हो. गोरखनाथ और रतननाथ अपने समय में अधिक समतावादी और कम रूढ़िवादी माने जाते थे और नाथ संप्रदाय ने अपने इतिहास में निम्न जातियों और मुसलमानों को भी शामिल किया था. हालांकि, आज यह संप्रदाय काफ़ी हद तक संघ के विचारों और विचारधारा से जुड़ा है, लेकिन इसके बावजूद भक्त लोग उस दिन पुलिस की कड़ी कार्रवाई से बच नहीं पाए.
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