कितने स्टैन स्वामी

केरल की जेलों में फर्जी मामलों में बंद क्यों हैं सामाजिक कार्यकर्ता

07 नवंबर 2021
वियूर सेंट्रल जेल और पास की वियूर हाई सिक्योरिटी जेल, जहां केरल के यूएपीए के अधिकांश विचाराधीन कैदियों को रखा जाता है. एक्टिविस्टों के बयान और कैदियों की गवाही से पता चलता है कि वहां कैदियों की कपड़े उतरवाकर तलाशी और अत्यधिक निगरानी आम है. एक्टिविस्टों को डर है कि जेल के भीतर खराब परिस्थितियों से यूएपीए के पुराने और बीमार विचाराधीन कैदियों की मौत हो सकती है, बिल्कुल स्टेन स्वामी की की मौत की तरह.
विकिमीडिया कॉमन्स
वियूर सेंट्रल जेल और पास की वियूर हाई सिक्योरिटी जेल, जहां केरल के यूएपीए के अधिकांश विचाराधीन कैदियों को रखा जाता है. एक्टिविस्टों के बयान और कैदियों की गवाही से पता चलता है कि वहां कैदियों की कपड़े उतरवाकर तलाशी और अत्यधिक निगरानी आम है. एक्टिविस्टों को डर है कि जेल के भीतर खराब परिस्थितियों से यूएपीए के पुराने और बीमार विचाराधीन कैदियों की मौत हो सकती है, बिल्कुल स्टेन स्वामी की की मौत की तरह.
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इस साल जुलाई में महाराष्ट्र में 84 वर्षीय पादरी और आदिवासी-अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद एक ट्वीट करते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने लिखा था, "फादर स्टैन स्वामी की मौत से गहरा दुख हुआ. यह अनुचित है कि एक व्यक्ति जिसने हमारे समाज के सबसे दमितों के लिए जीवन भर संघर्ष किया, उसे हिरासत में ही मरना पड़ा. न्याय के इस उपहास की हमारे लोकतंत्र में कोई जगह नहीं होनी चाहिए." विजयन स्वामी के बारे में अपना दुख व्यक्त करते वक्त यह भूल रहे थे कि केरल की जेलों में स्वामी की तरह के आरोपों का सामना कर रहे ढेरों लोग बंद हैं.

पिछले पांच सालों में लगभग कोई बड़ा आतंकवादी या माओवादी हमला नहीं होने के बावजूद, केरल सरकार ने भारतीय दंड संहिता में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम और राजद्रोह और "राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने" से संबंधित अपराधों के तहत 145 मामले दर्ज किए. 27 अक्टूबर 2021 को अपने कार्यकाल के दौरान यूएपीए के तहत आरोपितों की संख्या और उनके खिलाफ आरोपों के विवरण के बारे में विधान सभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देने से विजयन ने इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में और विशेष अदालतों में विचाराधीन अभियुक्तों के विवरण का खुलासा नहीं किया जा सकता है." उन्होंने यूएपीए के विचाराधीन कैदियों की संख्या और उन्होंने जेल में कितना समय बिताया, इस बारे में पूछे गए सवालों के जवाब देने से भी इनकार कर दिया.

केरल की अदालतों ने 67 वर्षीय एक्टिविस्ट एनके इब्राहिम को जमानत याचिकाएं न जाने कितनी बार खारिज की हैं. वह दिल के मरीज हैं. इस साल जून में कन्नूर जेल में बंद एक अन्य एक्टिविस्ट सीके राजीवन की पत्नी थंकम्मा ने बताया कि उनके पति को कोविड-19 की जांच कराने के लिए भूख हड़ताल करनी पड़ी. 32 वर्षीय एक्टिविस्ट एस दानिश के वकील तुषार निर्मल सारथी ने कहा कि उनको कई मामलों में जमानत मिल चुकी है लेकिन केरल पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने उन्हें जेल में रखने के लिए यूएपीए के ताजा मामलों में फिर से उन पर आरोप लगाया है. जेल में दानिश को कोविड हो गया.

तीनों कैदियों के वकीलों और परिवारों ने मुझे बताया कि उन्होंने विजयन को इस बारे में दखल देने के लिए कई बार पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. त्रिशूर जिले के वियूर उच्च सुरक्षा जेल और पुलिस के खिलाफ दुर्व्यवहार के कई आरोप भी सामने आए थे. केरल में एक्टिविस्टों के साथ दुर्व्यवहार पर चिंता जताने वाले एक्टिविस्टों को भी निशाना बनाया गया है, जिनका दावा है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है.

13 जुलाई 2015 को इब्राहिम को केरल पुलिस ने कोझीकोड जिले के पय्योली गांव से गिरफ्तार किया था. उन पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का सदस्य होने और राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. उन पर आईपीसी की धारा 124 ए और यूएपीए की कई धाराओं के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. उनके परिवार ने मुझे बताया कि वह उस समय पय्योली में एक सब्जी की दुकान पर सहायक के तौर पर काम कर रहे थे और इस क्षेत्र में ट्रेड-यूनियन की गतिविधियों में शामिल रहते थे.

अशफाक ईजे स्वतंत्र पत्रकार हैं.

Keywords: Kerala Police Left Democratic Front Left Front CPM Pinarayi Vijayan UAPA
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