“खुलासे के बाद सरकार को गिर जाना चाहिए”, पेगासस जासूसी पर पॉलिटिकल एडिटर हरतोष सिंह बल

30 जुलाई 2021

18 जुलाई को द वायर सहित अन्य मीडिया संस्थानों ने खुलासा किया कि दुनिया की कई सरकारें इजरायली कंपनी एनएसओ द्वारा विकसित स्फॉटवेयर पेगासस के जरिए अपने-अपने नागरिकों की जासूसी करवा रही हैं. संभावित लोगों की सूची 50 हजार से अधिक है. भारत के 300 से ज्यादा लोगों को संभावित जासूसी का शिकार बताया गया है जिनमें 40 से अधिक पत्रकार, जज, विपक्ष के नेता, केंद्रीय और राज्य के मंत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं.

इस मामले पर कारवां के विष्णु शर्मा ने पॉलिटिकल एडिटर हरतोष सिंह से बल से बातचीत की. बातचीत का वीडियो आप नीचे लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं.

विष्णु शर्मा :  जिस तरह के लोगों की और जैसे लोगों की जासूसी कराई गई है, उसमें क्या पैटर्न नजर आ रहा है?

हरतोष सिंह बल : देखिए, अब तक लिस्ट काफी बाहर आ चुकी है, तो पैटर्न तो साफ है कि इनमें ऐसे पत्रकार हैं जिनकी पत्रकारिता से सरकार को आपत्ति है. द वायर के  सिद्धार्थ वरदराजन हैं, एमके वेणू हैं या फिर वे लोग जो द वायर के बाहर से हैं या वायर से जुड़े हुए हैं. परंजाय हैं जिन्होंने अडानी और अंबानी पर इतना काम किया है. शुशांत हैं जिन्होंने रफाल पर काम किया हुआ है. रोहिणी सिंह ने अमित शाह पर काम किया हुआ है. पत्रकारों की लिस्ट में इनके नाम हैं. और अगर पत्रकारों से दूर जाएं तो हम इलैक्शन कमिशन की बात करते हैं. इस पर हम बाद में चर्चा करेंगे कि लिस्ट में कुछ लोगों को टारगेट किया गया था, कुछ लोगों के फोन को चैक करके यह पक्का कर लिया गया है कि उनके फोन प्रभावित थे और निगरानी में थे. ये चार-पांच लोगों के नाम जो मैंने लिए इनका फोन चैक होने के बाद पता चल गया कि इनके फोन निगरानी में थे. बाकि लोग ऐसे थे जो शिकार हुए थे, लेकिन उनके फोनों की फॉरेंसिक जांच अभी नहीं हुई है पर निगरानी किए जाने की सूची में वह जरूर थे.

उनमें से आप देखिए एक तो हैं चुनाव आयुक्त अशोक लवासा. यह बात साफ हो गई थी चुनाव में सरकार कुछ चीजें करना चाहती थी जिसके खिलाफ अशोक लवासा ने स्टेंड लिया था. उसके बाद उनके और उनके परिवार के ऊपर अलग तरह के छापे भी पड़े. ये छापे सरकार के वित्तीय प्राधिकरणों की तरफ से हैं. उसके बाद चीफ जस्टिस गोगोई के खिलाफ जिस महिला ने, जो उनके चैंबर में काम कर रही थी, यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, उसका फोन भी सर्विलांस में रखा गया. तो जिस समय उन्होंने गोगोई पर आरोप लगाया उस समय उनके परिवार के 9 सदस्यों की निगरानी की गई, उनका नाम सर्विलांस लिस्ट में है. सर्विलांस लिस्ट से हमें यह पता चल जाता है कि लिस्ट में नाम किस तारीख को डाला गया था. तो उससे हम यह भी मिला सकते हैं कि उस समय क्या हो रहा था. अशोक लवासा का नाम उस वक्त आता है जहां वह सरकार के खिलाफ कुछ बोल रहे हैं. रोहिणी सिंह का नाम तब आता है जब अमित शाह के खिलाफ स्टोरी छप रही है. शुशांत का पहली बार नाम तब आता है जब रफाल को लेकर सिलसिले सामने आए हैं. तो इससे कड़ी जुड़ कर बनती है कि सरकार के खिलाफ या तो कोई कार्रवाई हो रही हो या कुछ रिपोर्ट आ रही हो जिससे सरकार को दिक्कत हो, तो उस समय नाम सर्विलांस लिस्ट पर आते हैं.

विष्णु शर्मा कारवां हिंदी के असिस्टेंट एडिटर हैं.

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