नागरिकता संशोधन कानून और झारखंड में महागठबंधन सरकार की संभावना पर झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन से बातचीत

20 दिसंबर 2019
रूपेश नारायण/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
रूपेश नारायण/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस

बीजेपी शासित राज्य झारखंड में आज पांचवें और अंतिम चरण के लिए मतदान हुआ. झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल महागठबंधन बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. हेमंत सोरेन महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के बेटे और भी झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. 81 सीटों वाली राज्य विधान सभा में झामुमो प्रमुख विपक्षी पार्टी है.

12 दिसंबर की शाम को स्वतंत्र पत्रकार अमित भारद्वाज ने झारखंड के दुमका जिले में हेमंत सोरेन से उनके घर पर बात की. उन्होंने झामुमो के नागरिकता (संशोधन) कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजिका, देश के संघीय ढांचे के भविष्य और स्वायत्त शासन की मांग वाले पत्थलगड़ी आंदोलन के बारे में पार्टी के विचार पर चर्चा की. हेमंत ने बताया, "यह मुसलमानों में भय की पैदा करने का सोचा समझा प्रयास है. लेकिन यह देश और इसका लोकतंत्र बहुत विशाल है. वर्तमान सरकार गांधी के विचारों की बात करती है और हिटलर की तरह व्यवहार करती है.”

अमित भारद्वाज : झारखंड में 14 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. वे नागरिकता संशोधन कानून के पारित होने पर नाराज और चिंतित लग रहे हैं. इस कानून पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का क्या रुख है? क्या इसके पारित होने से बीजेपी के खिलाफ और आपके पक्ष में अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण होगा?

हेमंत सोरेन : बिल पास हो गया है. अब यह कानून बन चुका है और संबंधित राज्यों में चला जाएगा. यह राज्य सरकारों पर निर्भर है कि वह सीएए पर कैसे और क्या करती है. अगर हम सत्ता में आते हैं तो हम यह जानने के लिए सीएए का अध्ययन, विश्लेषण और समीक्षा करेंगे कि यह राज्य के हित में है या नहीं. हम पहले कुछ करने की स्थिति में नहीं थे लेकिन राज्य में कानून को निश्चित रूप से चुनौती दी जा सकती है.

अमित भारद्वाज : क्या आपको लगता है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजिका से झारखंड में अल्पसंख्यक मतदाताओं में भय पैदा हो रहा है?

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