हिंदू राष्ट्र का साउंडट्रैक

नफरत की राजनीति को सुलगाता हिंदुत्व पॉप संगीत

15 July, 2022

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इस साल अप्रैल में राम नवमी के जुलूस के दौरान भारत के कई राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. इन सभी घटनाओं में हिंदुत्ववादी भीड़ द्वारा मुसलमानों के मोहल्लों में घुसकर तलवारें और लाठियां भांजते सांप्रदायिक नारे लगाने और तेज संगीत बजाने जैसा एक ही तरीका अपनाया गया था. उन्होंने मस्जिदों के सामने इस्लामोफोबिया से भरे भड़काऊ गीतों पर डांस किया. इसमें औरते और बच्चे भी शामिल थे. ज्यादातर जगहों पर यह घटनाएं दोपहर बाद घटित हुई, जब नमाज पढ़ने और रमजान का रोजा खोलने का समय होता है.

दोनों समुदायों के बीच छिड़ी लड़ाई में आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ तक हुई. कई लोगों को चोटें आईं और यहां तक ​​कि कुछ लोगों के मारे जाने की भी खबर है. बिहार के मुजफ्फरपुर और मध्य प्रदेश के खरगोन में भगवा गमछा पहने पुरुष मस्जिदों पर चढ़कर भगवा झंडा लगाने की कोशिश करने लगे और कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया. मुंबई में वाहनों में तोड़फोड़ करने की भी खबरें आईं. इस हिंसा के बाद भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रशासित राज्य और स्थानीय अधिकारियों ने मुसलमानों के घरों को गिराने के लिए बुलडोजर भेजे. हालांकि उन्होंने इसे अतिक्रमण विरोधी अभियान बताया. लेकिन गिराए गए घर और दुकानें ज्यादातर मुसलमानों की थीं.

हमारे देश में इस तरह के धार्मिक जुलूसों के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के कई उदाहरण पहले से मौजूद हैं. वर्ष 1992 में विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अन्य सहयोगियों के नेतृत्व में राम रथ यात्रा बाबरी मस्जिद के विध्वंस पर जाकर समाप्त हुई थी. इसी जुलूस में जोर-शोर से "मंदिर वहीं बनाएंगे" के नारे लगाए गए थे.हाल के दिनों में भी रैलियों के इर्द-गिर्द कलह होना एक आम बात रही है, खासकर रामनवमी के आसपास. लेकिन इस बार हिंसा में एक चीज अलग थी. इन हिंसक घटनाओं के लिए माहौल को गरमाने का काम रैलियों में बजाए गए गीतों ने किया था. इन जुलूसों से कई वीडियो सामने आए हैं जिसमें जोशीला माहौल और गानों में सांप्रदायिक उत्तेजना साफ दिखाई दे रही है.

कर्नाटक के रायचूर शहर में उस्मानिया मस्जिद के सामने जयकारे के साथ "मंदिर वहीं बनाएंगे" गाना बजाया गया और भगवा झंडे लहराए गऐ. तरुण सागर के इस गीत के असली वीडियो में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के फुटेज दिखाए गए हैं. उत्तराखंड में रुड़की के पास एक गांव दादा जलालपुर में कन्हैया मित्तल का गाना "जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे" बजाते हुए एक मुस्लिम मोहल्ले से जुलूस निकाला गया.

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