कैराना में गन्ना, अवारा जानवर और जातीय समीकरण तय करेंगे लोकसभा के नतीजे

12 अप्रैल 2019
31 जनवरी 2018 को एक भारतीय किसान गन्ने को ट्रैक्टर पर लादने ले जाता हुआ, ताकि इसे गाजियाबाद के मोदीनगर के पास चीनी मिल में बेचा जा सके.
प्रकाश सिंह/एएफपी/गैट्टी इमेजिस
31 जनवरी 2018 को एक भारतीय किसान गन्ने को ट्रैक्टर पर लादने ले जाता हुआ, ताकि इसे गाजियाबाद के मोदीनगर के पास चीनी मिल में बेचा जा सके.
प्रकाश सिंह/एएफपी/गैट्टी इमेजिस

2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हिंदू-गुज्जर नेता हुकुम सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना क्षेत्र से चुनाव जीते थे. 1998 के बाद पार्टी इस सीट पर पहली बार जीती थी. फरवरी 2018 में सिंह का निधन हो गया जिसके बाद इस क्षेत्र में उपचुनाव कराने पड़े. विपक्षी पार्टियां जिनमें समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस शामिल थीं ने मिलकर एक अनौपचारिक गठबंधन बना लिया और तबस्सुम हसन को अपना प्रत्याशी बनाया. हसन एक मुस्लिम-गुज्जर होने के अलावा आरएलडी के टिकट पर कैराना की पूर्व सांसद रह चुकी हैं. तीन महीने बाद हुए उपचुनाव में हसन ने बीजेपी उम्मीदवार और हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को 40 हजार वोटों से हरा दिया.

कई बातें मिलकर हसन की जीत का कारण बनीं. जाट वोटों पर पकड़ वाली आरएलडी ने कैराना के गन्ना किसानों की दुर्दशा पर ध्यान दिया. उस महीने तक क्षेत्र की 6 चीनी मिलों का गन्ना किसानों पर कथित तौर पर 777 करोड़ रुपया बकाया था. बीजेपी के नेताओं ने अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की दीवार पर मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाए जाने का विरोध किया था जिससे विवाद पैदा हो गया. इसका सहारा लेकर आरएलडी ने चुनाव को गन्ना-बनाम जिन्ना बना दिया. इसके अलावा आरएलडी द्वारा मुस्लिम उम्मीदवार को दिए गए समर्थन से जाट और मुस्लिम वोट साथ आ गया.

कैराना लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा हैं- शामली, थाना भवन, शामली जिले का कैराना और इसके अलावा सहारनपुर जिले के गंगोह और नाकुर. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुमान के आधार पर इस क्षेत्र में 16.6 लाख वोट है, इसमें से 5.5 लाख मुसलमान , 2.5 लाख दलित और 1.7 लाख जाट वोट हैं. इस साल आरएलडी, एसपी और बीएसपी लोकसभा चुनाव के लिए फिर से गठबंधन के तहत साथ आ गए हैं. कैराना में हसन इस गठबंधन की प्रत्याशी हैं, वहीं बीजेपी ने प्रदीप चौधरी को मैदान में उतारा है. चौधरी गंगोह विधनसभा क्षेत्र से विधायक हैं.

गन्ना के बकाये के अलावा कैराना के किसानों के लिए एक नई समस्या खड़ी हो गई है. एक तरफ गोरक्षक गायों को यहां से वहां ले जाए जाने का विरोध करते हैं, दूसरी तरफ राज्य सरकार ने भी गैरकानूनी बूचड़खानों पर रोक लगाई है. इसकी वजह से आवार जानवर क्षेत्र में छुट्टा घूम रहे हैं और फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं. शामली में गन्ने की खेती करने वाले एक जाट किसान ने बताया, “पिछले साल गन्ने की चली. इस साल गन्ना और गाय बीजेपी को चलता कर देंगे.” मृगांका को टिकट नहीं दिए जाने की वजह से हिंदू-गुज्जरों में भी बीजेपी को लेकर नाराजगी है.

बीजेपी किसानों की परवाह करने का नाटक करती है, लेकिन पर्दे के पीछे वे सिर्फ बनियों का फायदा देखते हैं.

तुषार धारा करवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

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