राजस्थान में “लव-जिहाद” को रोकने बजरंग दल के साथ आए कांग्रेसी नेता

26 जुलाई 2019
केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद भारत में लव-जिहाद के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं.
सैम पंथकी/एएफपी/गैटी इमेजिस
केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद भारत में लव-जिहाद के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं.
सैम पंथकी/एएफपी/गैटी इमेजिस

11 जून को सुबह के तकरीबन 8 बजे जयपुर के उत्तर में बसे भदर्ना के रहने वाले कय्यूम खान जब घर से निकल कर अभी 50 मीटर ही चले थे कि अधेड़ उम्र की इंदिरा देवी उनके पास आ कर चिल्लाने लगी, “तू खुद को क्या समझता है? तेरी इतनी हिम्मत कि तू हमारी लड़की को पुलिस के पास भेजेगा?” कहते हुए महिला ने कय्यूम का गिरेबान पकड़ लिया और उसे तमाचा जड़ दिया. इससे पहले की कय्यूम कुछ समझ पाते, सामने खड़े ट्रक के बगल से एक युवती आई और कय्यूम की ओर इशारा कर शिकायत करने लगी, “यह मुझे परेशान करता है”. इसके बाद एक हट्टाकट्टा नौजवान कय्यूम को मुक्के मारने लगा. वह इंदिरा का बेटा इंद्रपाल चौधरी था. इसके कुछ पल बाद वृद्ध राजकुमार चौधरी और उनकी बीवी सरोज देवी आ गए और चारों मिल कर कय्यूम को मारने लगे. जब भीड़ बीच-बचाव करने लगी तो हमला करने वाले इस जाट परिवार ने लोगों से बताया कि कय्यूम ने 17 साल की उनकी बेटी सलोनी से छेड़छाड़ की है. वह लड़की भी पास खड़ी तमाशा देख रही थी.

कय्यूम का परिवार और चौधरी परिवार एक ही इलाके में रहते हैं. 2016 में पहली बार कय्यूम की मुलाकात चौधरी परिवार की बड़ी बेटी स्वेता से हुई थी. जल्द ही दोनों में प्यार हो गया और 2018 में दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. जब यह बात चौधरियों को पता चली तो उन लोगों ने स्वेता को मारा-पीटा. परिवार स्वेता को परेशान करता रहा और जब उसके पिता ने उसकी हत्या करने की धमकी दी तो इस साल 7 जून को स्वेता ने पुलिस से मदद मांगी. पुलिस ने स्वेता को ‘शक्ति स्तंभ’ भेज दिया. यह परेशानी का सामना कर रहीं महिलाओं के लिए एक सरकारी संस्था है. इसके चार दिन बाद चौधरियों ने कय्यूम पर हमला किया. कय्यूम खान के पिता अख्तर खान ने मुझे बताया कि, चौधरी लोग “कुछ वक्त से हमसे नाराज चल रहे थे और उनको लगता है कि उनकी बेटी को शेल्टर होम भेजने में हमारा हाथ है.”

जिस वक्त यह हमला हुआ उसके कुछ समय पहले जयपुर के विश्वकर्मा पुलिस स्टेशन से दोनों परिवारों के बीच के झगड़े को हल करने के लिए पुलिस को बुलाया गया था. पुलिस ने बुरी तरह चोटिल कय्यूम को जयपुर के शास्त्री नगर के हरी बक्श कनवंतिया अस्पताल भेज दिया. बाद में चौधरी परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. जब कय्यूम अस्तपताल में भर्ती थे तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो संगठन- विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल और राजपूतों की सेना के तकरीबन 100 लोगों की एक भीड़ ने पुलिस चैकी का घेराव कर कय्यूम पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज करने की मांग की. इन लोगों ने “लव-जिहाद” के खिलाफ नारेबाजी की. इस भीड़ में कांग्रेस पार्टी के दो सदस्य- युवा नेता संदीप जक्कड़ और विद्यानगर विधानसभा सीट के उम्मीदवार सीताराम अग्रवाल भी शामिल थे.

स्वेता ने यह भी लिखा है कि “बजरंग दल के गुंडे” पिछले एक साल से मेरे परिवार से मिल रहे हैं, इन लोगों ने मेरे बाप को “मुसलमानों के खिलाफ बातें कहीं, जिससे मामला बिगड़ गया”.

पुलिस ने कय्यूम के खिलाफ छह धाराओं में मामले दर्ज किए. इनमें यौन उत्पीड़न और यौन अपराधों से बाल सुरक्षा कानून (पोस्को) के तहत 4 धाराएं शामिल हैं. गौरतलब है कि कय्यूम के खिलाफ एफआईआर चौधरियों के खिलाफ दायर होने से पहले की गई थी. कय्यूम को इसके दूसरे दिन गिरफ्तार कर लिया गया और वह 20 जुलाई तक जेल में बंद रहे. उनकी पहली जमानत याचिका रद्द कर दी गई थी. इसके एकदम विपरीत चौधरी परिवार के किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया और उन पर लगीं भारतीय दण्ड संहिता की धाराएं, 323, 143, 341, मामूली और जमानती हैं.

तुषार धारा करवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

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