"क्रांतिकारी है नीलम", संसद भवन में स्मोक बम मामले की आरोपी के परिजन और गांव वाले

09 जनवरी 2024
दिल्ली की पटियाला कोर्ट में पेशी पर पहुंचीं नीलम आज़ाद.
दिल्ली की पटियाला कोर्ट में पेशी पर पहुंचीं नीलम आज़ाद.

जींद जिला के घासो खुर्द गांव के बाल्मीकि चौपाल पर एक लाइब्रेरी है जो पहली नजर में ट्यूशन सेंटर सी लगती है. वहां कुर्सियां फैली पड़ी थीं और टेबुलों पर धूल जमी हुई थी. उसकी एक दीवार पर एक बैनर लगा था, जिस पर लिखा था: ‘प्रगतिशील पुस्तकालय’. बैनर के एक तरफ मोटे अक्षरों में लिखा था, "युवा सोच, युवा जोश" और दूसरी तरफ आंबेडकर, सावित्री बाई फुले और भगत सिंह की तस्वीरें थीं. टेबुलों पर सावित्री बाई फुले की जीवनी, भारतीय कला एवं संस्कृति पर एक किताब, ‘बांगर उत्सव 2023, उचाना एक नजर’, ‘विश्व इतिहास के कुछ विषय’ और अन्य किताबें बिखरी थीं.

गांव की इस लाइब्रेरी को बनाया है नीलम आज़ाद ने जो 13 दिसंबर को नए संसद भवन में सुरक्षा उल्लंघन मामले में यू.ए.पी.ए. के तहत गिरफ्तार नौजवानों में से एक है. इन नौजवानों में से दो ने संसद परिसर में स्मोक बम फेंके थे और मंहगाई, बेरोजगारी और मणीपुर के हालात पर नारे लगाए थे. जब नौजवान संसद परिसर में स्मोक बम फेंक रहे थे, तो निलाम आज़ाद संसद परिसर के बाहर "तानाशाही नहीं चलेगी", "भारत माता की जय" और "जय भीम, जय भारत" नारे लगा रही थीं.

नीलम आज़ाद की कहानी जानने के लिए मैं उनके गांव घासो खुर्द पहुंचा और रेलवे स्टेशन पर उतर कर जब मैंने करीब 25 साल के एक नौजवान से नीलम के घर का रास्ता पूछा, तो उसने कहा, “सामने वाली सड़क पर चलते जाएं. फिर आधा किलोमीटर रे बाद गांव के अंदर जा कर किसी से भी उनका पता पूछ लीजिएगा.”

गांव के 70 वर्षीय फूल सिंह ने जोर देकर मुझसे कहा, “हमारी नीलम आतंकवादी नहीं, देश भक्त है. उसने हमेशा इलाके के गरीब मजदूरों के मुद्दे उठाए हैं. उसने कोई गलत काम नहीं किया. गलत है तो मोदी सरकार, जिसने महंगाई और बेरोजगारी पैदा की है.”

नीलम कुम्हार, अतिपिछड़ी, जाति की हैं. उनके पिता, कोर सिंह, हलवाई हैं जो शादियों और अन्य कार्यक्रमों में मिठाइयां बनाते हैं. नीलम के भाई रामनिवास और कुलदीप दूध का काम करते हैं.

शिव इंदर सिंह स्वतंत्र पत्रकार और पंजाबी वेबसाइट सूही सवेर के मुख्य संपादक हैं.

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