आदित्यनाथ का पुलिस राज

दो लोगों की हत्या और पुलिस की बर्बरता के बाद, बिजनौर के नहटौर में दहशत

28 दिसंबर 2019
21 साल के अनस का परिवार, जिसे 20 दिसंबर को नहटौर में उसके घर से कुछ मीटर की दूरी पर यूपी पुलिस ने गोली मार दी थी.
ईशान तन्खा
21 साल के अनस का परिवार, जिसे 20 दिसंबर को नहटौर में उसके घर से कुछ मीटर की दूरी पर यूपी पुलिस ने गोली मार दी थी.
ईशान तन्खा

21 साल का अनस ने अपने चाचा मुशर्रफ हुसैन से शुक्रवार को दिन का खाना साथ खाने का वादा किया था. चाचा हुसैन अनस से कुछ ही साल बड़े है. डेढ़ साल पहले अनस की शादी हुई थी और वह दिल्ली रहने आ गया था. यहां वह एक बेवरेज सप्लाई करने का काम करता था. अपनी बीवी और आठ महीने की बच्ची के साथ उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर नहटौर गांव में अनस कुछ दिन पहले ही आया था. अनस अपने ससुरालवालों के साथ घास मंडी में रह रहा था. दिन के तकरीबन 2 और 3 बजे के बीच अनस अपने चाचा हुसैन के घर, जो पास में ही है, जाने के लिए निकला. फिर अनस के ध्यान में आया कि उसके बच्चे को भूख लगी है. अनस के घर से 100 गज की दूरी पर उसके ताय अब्बू की डेरी है.

अनस के पिता अरशद हुसैन जालंधर में सिलाई का काम करते हैं और वह भी उस दिन मुशर्रफ के घर पर ही थे. उस दिन सारा परिवार मिल रहा था. ये दोनों घर एक ही गली में बने हैं जिनका दरवाजा मोहल्ले के सामने खुलता है और मकानों के दोनों तरफ दुकाने हैं. जब अनस गली से बाहर जा रहा था तो उसके पिता ने समझाया कि घर से निकलना बेकार है क्योंकि बाजार बंद है. लेकिन उसने जवाब में बताया कि उसे बस ताय अब्बू की दुकान से दूध लेकर आना है.

जैसे ही उसने घर से बाहर कदम रखा, एक गोली आकर उसकी आंख में धंस गई. उसकी आंख से खून की धार बहने लगे. उस दिन सुबह से ही अनस के घर के पास उत्तर प्रदेश पुलिस गश्त लगा रहा थी. गोली उनकी ओर से चली थी. कुछ देर बाद अनस की मौत हो गई.

इसी दिन पुलिस ने घास मंडी में एक दूसरे आदमी को तब अपनी गोली का निशाना बनाया जब वह नमाज पढ़कर लौट रहा था. 20 साल के मोहम्मद सुलेमान को पुलिस ने एकदम पास से छाती पर गोली दागी थी.

उस शुक्रवार से पहले दिल्ली सहित देशभर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध शुरू हो चुके थे. बिजनौर उत्तर प्रदेश के उन जिलों में से एक था जहां के लोगों ने इस कानून के खिलाफ अपनी दुकाने बंद की थीं. नगीना और शेरकोट जैसे गांव में लोग सड़कों पर उतर कर कानून का विरोध कर रहे थे. हालांकि नहटौर में जुलूस की अपील नहीं की गई थी और लोगों ने बस अपनी दुकानें बंद की थीं लेकिन इस मुस्लिम बहुल इलाके में पुलिस की तैनात की गई थी.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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