“एनआरसी और सीएए गांधी के भरोसे की हत्या”, मेवात का मुस्लिम समाज

22 दिसंबर 2019
मोहम्मद आरिफ
मोहम्मद आरिफ

मोहनदास गांधी ने 19 दिसंबर 1947 को विभाजन के हंगामे के बीच मेवात के घासेड़ा गांव का दौरा किया था. उन्होंने इस क्षेत्र के मेव मुस्लिमों को भरोसा दिलाया था कि उनके लिए यहां के मुसलमानों की सुरक्षा सबसे ऊपर है और वे पाकिस्तान न जाएं. बहुत सारे मेव मुसलमानों ने गांधी के शब्दों का एहतराम किया और पाकिस्तान नहीं गए. सत्तर साल बाद, समुदाय के लोग नागरिकता (संशोधन) कानून और गृहमंत्री अमित शाह के भारत व्यापी एनआरसी की घोषणा से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. 18 दिसंबर को हजारों की संख्या में मेवात के लोग घासेड़ा में सार्वजनिक बैठक और कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए.

वहां मौजूद लोगों ने मुझे बताया कि 12 दिसंबर को जब से सीएए लागू हुआ है, नूह भर के गांवों और कस्बों में छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. घासेड़ा की बैठक में वक्ताओं ने सीएए और एनआरसी के खतरों पर चर्चा की. वकील और स्थानीय सामाजिक संगठन मेवात विकास सभा के अध्यक्ष सलाउद्दीन मेव ने कहा, "हमें नागरिकता कानून और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर को एक साथ देखना होगा क्योंकि इससे मेवात में बड़ा नुकसान होने की आशंका है." उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री “मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि एनआरसी को लागू किया जाएगा. यह एक आपदा होगी क्योंकि यहां बहुत सारे लोग निरक्षर हैं और उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं." सरकारी आंकड़े भी उनके इस दावे की पुष्टी करते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, मेवात की औसत साक्षरता दर 54.08 प्रतिशत है.

सलाउद्दीन ने बताया, "अगर हमें गैर-नागरिक या अवैध आव्रजक घोषित कर दिया जाएगा तो हम अपनी आजीविका सहित अपने सभी अधिकारों को खो देंगे और हमें असम की तरह के डिटेंशन कैंपों में भेजा जा सकता है. यह हमारे साथ धोखा हैं. हमारे बाप-दादा इसलिए यहां रुके थे क्योंकि यह हमारा देश है और हम इसे उतना ही प्यार करते हैं जितना कोई और. अब हमें एक बार फिर अपनी ही धरती पर नागरिकता साबित करने के लिए कहा जा रहा है."

इस ​क्षेत्र के साथ महात्मा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम के संबंधों के बारे में बैठक में अच्छी खासी बातचीत हुई. मेवात के एक अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद आरिफ ने बताया, "राष्ट्रपिता गांधी जी अन्य नेताओं के साथ मेवात आए थे और व्यक्तिगत रूप से हमें सुरक्षा और समृद्धि का भरोसा दिया. आज हमें ऐसा कोई भरोसा नहीं है. जब वे एनआरसी को देशव्यापी स्तर पर लागू करेंगे तब केवल मुसलमानों को निशाना बनाया जाएगा और हम अपनी नागरिकता के अधिकार को खो देंगे.” मेवात विकास सभा के पूर्व अध्यक्ष उमर मोहम्मद पाडला ने मुझसे कहा, “1857 के विद्रोह में भी हजारों मेवों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. ऐसा ही हमने आजादी की लड़ाई में किया था. हम हमेशा से इस देश के प्रति वफादार रहे हैं और अब हमें फिर से अपनी वफादारी साबित करने के लिए कहा जा रहा है. अगर हमें एनआरसी में शामिल नहीं किया जाता है तो हमें अपनी नागरिकता वापस नहीं मिलने वाली."

मेवात क्षेत्र हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को मिलाकर कहा जाता है. 2005 में मेवात जिले को गुरुग्राम से बाहर किया गया था और 2016 में इसका नाम नूह कर दिया गया था. दो साल बाद, नीति आयोग ने इसे भारत के सबसे पिछड़े जिले का दर्जा दिया. नूह की लगभग 79 प्रतिशत आबादी मुस्लिम हैं,जिनमें से ज्यादातर मेव मुस्लिम हैं, जिनके धार्मिक विश्वासों में इस्लामी और हिंदू रीति-रिवाज घुले-मिले हैं.

तुषार धारा कारवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

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