दिल्ली हिंसा का पर्दाफाश : भाग एक

आरएसएस और बीजेपी के सदस्यों ने हिंदू पहचान का हवाला देकर मौजपुर में हिंदुओं की भीड़ को कैसे भड़काया

01 मार्च 2021
2019 में बेंगलुरु में एक सीएए समर्थक हिंदुत्ववादी चर्च स्ट्रीट पर सीएए के समर्थन में लिखे नारे के सामने से जाते हुए. दिल्ली में हिंसा शुरू होने से पहले आरएसएस और बीजेपी के सदस्यों ने लोगों को जुटाया था.
मंजुनाथ किरण/एएफपी/गैटी इमेजिस
2019 में बेंगलुरु में एक सीएए समर्थक हिंदुत्ववादी चर्च स्ट्रीट पर सीएए के समर्थन में लिखे नारे के सामने से जाते हुए. दिल्ली में हिंसा शुरू होने से पहले आरएसएस और बीजेपी के सदस्यों ने लोगों को जुटाया था.
मंजुनाथ किरण/एएफपी/गैटी इमेजिस

23 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा शुरू होने के कुछ वक्त पहले भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संघ परिवार के अन्य समूह के सदस्यों ने मौजपुर की सड़कों पर हिंदू भीड़ को जमा किया था. उस दिन जाफराबाद मेट्रो के पास की सड़क पर, जहां नागरिकता संशोधन कानून (2019) का विरोध करने वाले आंदोलनकारी जमा थे, हिंदुओं की भीड़ और आंदोलनकारियों के बीच टकराव हुआ था. इस टकराव के साथ ही राजधानी में अगले तीन दिनों तक चली हिंसा की शुरुआत हुई थी. उस वक्त केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बयान जारी कर इस हिंसा को “स्वतःस्फूर्त” बताया था. लेकिन संघ परिवार के सदस्यों द्वारा उन दिनों किए गए फेसबुक लाइव और बाद में उनसे हुई मेरी बातचीत से ऐसे डिजिटल साक्ष्य सामने आते हैं जो स्पष्ट करते हैं कि मौजपुर में हिंदुओं का जमावड़ा राजनीतिक था और उन्हें सोच-समझ कर सांप्रदायिक आधार पर वहां इकट्ठा किया गया था.

23 फरवरी की सुबह बीजेपी की दिल्ली इकाई के एक वार्ड के अध्यक्ष अनुपम पांडे ने अपने फेसबुक पेज से हिंदुओं को कोसा था कि वह सीएए के खिलाफ बढ़ते आंदोलन के बावजूद अपने घरों में चुपचाप बैठे हैं. उससे एक रात पहले स्थानीय मुस्लिम महिलाओं ने सीएए के विरोध में जाफराबाद-मौजपुर सड़क पर चक्का जाम लगाया था. सुबह 10.46 पर अपनी एक पोस्ट में पांडे ने लिखा था, “तुम लोग अपने-अपने घरों में बैठे रहो और वे हमारे घरों के रास्ते को बंद कर रहे हैं. 100 करोड़ लोगों शर्म करो. मैं अपने हिंदू भाइयों से बड़ी संख्या में मौजपुर चौराहे में पहुंचने की अपील करता हूं. जय श्रीराम.”

उस वक्त पांडे सोनिया विहार मंडल के अध्यक्ष थे. सोनिया विहार उत्तर पूर्वी दिल्ली का एक वार्ड है. इसके तीन घंटे बाद पांडे ने तीन फेसबुक पोस्ट डालीं जिनमें उन्होंने लोगों से मौजपुर में जमा होने की अपील की. पांडे ने दिन में कई बार अपने पार्टी सदस्यों के साथ फेसबुक में पोस्टें डालीं और लाइव ब्रॉडकास्ट किए. वहां कपिल मिश्रा और कौशल मिश्रा, बाबरपुर से बीजेपी की निगम पार्षद कुसुम तोमर, मौजपुर मंडल के पार्टी अध्यक्ष सत्यदेव चौधरी भी मौजूद थे. अपनी प्रत्येक पोस्ट में पांडे ने हिंदुओं को हिंदू भाइयों की खातिर चौराहे में जमा होने की अपील की थी. 12.24 बजे की एक पोस्ट में पांडे ने लिखा था, “हम जाफराबाद को शाहीन बाग नहीं बनने देंगे. हम लोग सीएए और दिल्ली पुलिस के समर्थन में सड़कों पर निकलेंगे. 3 बजे बाजपुर चौक पर मिलते हैं.”

3.35 बजे दीपराज रावल ने मौजपुर से फेसबुक लाइव शुरू किया. शुरुआत में रावल ने पांडे जैसी अपील करते हुए “सभी भाइयों को जय श्रीराम, बड़ी संख्या में मौजपुर चौराहे पहुंचे” कहा. रावल उत्तर पूर्वी दिल्ली के बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष हैं और उससे पहले वह पांच सालों तक बजरंग दल के जिला प्रमुख थे. मौजपुर में उनके साथ खड़े लोग नारे लगाते हैं, “हिंदू एकता जिंदाबाद.” रावल के वीडियो में कई आदमियों को कहते देखा जा सकता है, “अब हम सोते नहीं रहेंगे. हम जाग उठे हैं. हम पुराने हिंदू नहीं हैं. हम जागे हुए हिंदू हैं.” इस वीडियो को 10 हजार से अधिक बार देखा गया.

उसी शाम भारतीय जनता युवा मोर्चा के नवीन शाहदरा इकाई के जिला कार्यकारी आकाश वर्मा ने भी मौजपुर से फेसबुक लाइफ किया. उस लाइव में वर्मा ने मौजपुर चौराहे का नजारा दिखाया जहां हिंदू भीड़ नारे लगा रही है, “मोदी जी तुम लट्ठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं. लंबे-लंबे लट्ठ बजाओ हम तुम्हारे साथ हैं.” इसके साथ ही वर्मा दर्शकों से मौजपुर में जमा होने की अपील करते हैं. इस वीडियो को 40 हजार से ज्यादा बार देखा गया. लाइव स्ट्रीम में वर्मा ने रोढ़ों से भरी गाड़ी दिखाई जो सड़क पर पत्थर गिरा रही थी. फिर वह कहते हैं, “देखिए पत्थर सड़कों पर आ गए हैं.” ऐसा कहने के बाद वह ड्राइवर को निर्देश देते हैं, “डालो बहन चोद डालो.” वीडियो में एक दूसरी आवाज सुनाई देती है, “विजय पार्क के मुल्लों के लिए यहीं गिराओ, बहन चोद.” जैसे ही वह वैगन पत्थर सड़क पर गिराने लगती है वर्मा और अन्य लोग जोर से चिल्लाने लगते हैं, “जय श्रीराम.”

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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