प्रशांत किशोर की आईपेक ने भाजपा के साथ काम करने के लिए कराया झूठा पोल

29 सितंबर 2018
प्रशांत किशोर की संस्था आईपेक से जुड़े दो लोगों का कहना है​ कि संस्था ने फर्जी पोल के जरिए 2019 के लोक सभा चुनावों में भाजपा के लिए प्रचार करना तय किया है जबकि अधिकांश कर्मचारी कांग्रेस के लिए काम करना चाहते थे।
प्रशांत किशोर की संस्था आईपेक से जुड़े दो लोगों का कहना है​ कि संस्था ने फर्जी पोल के जरिए 2019 के लोक सभा चुनावों में भाजपा के लिए प्रचार करना तय किया है जबकि अधिकांश कर्मचारी कांग्रेस के लिए काम करना चाहते थे।

16 सितंबर को चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होने की खबरें मीडिया में छाई रहीं. लेकिन अब पता चला ​है कि राजनीतिक परामर्श देने वाली उनकी कंपनी, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटि (आईपेक) के अंदर कामकाज के तरीके को लेकर विवाद चल रहा है. हैदराबाद स्थित आईपेक के मुख्यालय में एक सर्वे कर कंपनी में काम करने वालों से पूछा गया कि आगामी लोक सभा चुनावों में वे किस पार्टी के साथ काम करना चाहते हैं. उस सर्वे में भाग लेने वाले आईपेक के एक पुराने और एक मौजूदा कर्मचारी का कहना है कि अधिकतर कर्मचारियों की राय कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने की थी लेकिन इसके बावजूद आईपेक ने भाजपा का चयन किया.

हालांकि, आईपेक ने अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा नहीं की है लेकिन इन दोनों का कहना है कि भाजपा के पक्ष में सर्वे के परिणामों को तोड़ा-मरोड़ा गया है. मौजूदा कर्मचारी का कहना है, ‘‘जिस तरह से इन लोगों ने सर्वे किया उससे शक पैदा होता है. हम सभी को पहले से ही मालूम था कि हम लोग बीजेपी के लिए काम करेंगे. फिर भी पोल का नाटक किया गया.’’ इन लोगों की शिकायत यह नहीं है कि ये लोग भाजपा के साथ काम करने वाले हैं. बल्कि कंपनी के ढोंग से इनमें नाराजगी है. ‘‘वे लोग कह सकते थे, ‘सब सुनो, हम लोग भाजपा के साथ काम करने जा रहे हैं. तुम लोग प्रोफेशनल तरीके से काम करो. तुम लोगों को इसलिए तो भर्ती किया गया है.’’

सर्वे से पहले ही कंपनी के भीतर बड़ी अजीबो-गरीब बातें हो रही थीं. 9 सितंबर को हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनस के छात्रों के साथ अपनी बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा था कि ‘‘अब वह किसी भी पार्टी के साथ उस तरह से काम नहीं करेंगे जैसे 2014 से करते आए हैं.’’ दूसरे दिन हैदराबाद के गोलकोंडा हॉस्टल में आईपेक ने अपने कर्मचारियों को हाथ उठा कर यह बताने के लिए कहा कि वे लोग लोकसभा चुनाव में किस पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं. उस वक्त वहां मौजूद पूर्व कर्मचारी का कहना है कि ज्यादातर लोगों ने कांग्रेस के साथ काम करने की इच्छा जताई.

इस अनौपचारिक पोल के बाद आईपेक के ह्यूमन रिसोर्स हेड अविनाश तिवारी ने प्रबंधन समिति की ओर से कर्मचारियों को मेल भेजा कि 20 सितंबर को औपचारिक पोल किया जाएगा. ईमेल मे तिवारी ने लिखा था, ‘‘2019 के आम चुनावों में हम लोग- भाजपा या कांग्रेस- किस पार्टी के साथ काम करेंगे इसका फैसला पोल के जरिए होगा.’’ पोल प्रक्रिया दो चरण में पूरी की जानी थी. 12 से 19 सितंबर के बीच परामर्श होना था और उसके बाद 20 सितंबर को वोटिंग की जानी थी. ईमेल में कर्मचारियों को यह साफ समझाया गया था कि इस पोल का मकसद यह जानना है कि “चुनावों में आईपेक किस पार्टी के साथ काम करे. कर्मचारी निजी तौर पर किसके साथ काम करना चाहते हैं यह जानना इस पोल का मकसद नहीं है.”

इन दोनों कर्मचारियों का कहना है कि 20 तारीख के पोल में स्टाफ को चयन के लिए तीन विकल्प दिए गए थे- भाजपा, कांग्रेस या इनमें से कोई भी नहीं. वोटिंग के लिए तीन पोलिंग बूथ बनाए गए और सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक वोटिंग हुई. प्रत्येक बूथ में कुल 276 वोटर थे. पूर्व कर्मचारी ने बताया कि आईपेक के सभी विभागों- मीडिया, डेटा, फील्ड टीम, सोशल मीडिया एनिलिटिक्स और राजनीतिक पड़ताल- में 400 से 450 कर्मचारी हैं. मौजूदा कर्मचारी ने मुझे बताया कि आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव कैंपेन में लगी टीम के अलावा सभी ने 20 सितंबर के सर्वे में भाग लिया.

कौशल श्रॉफ कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

Keywords: लोक सभा चुनाव 2019
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