प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात कर रही रिलायंस, लॉबिस्ट रखा राष्ट्रपति ट्रम्प के करीबी बल्लार्ड को

23 फ़रवरी 2020
जनवरी 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए पर व्यापार प्रतिबंध लगाया था. प्रतिबंधों के बावजूद मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज उस तेल कंपनी से तेल आयात कर रही है. इसके लिए उसने अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी ब्रयान बल्लार्ड को (बीच में) लॉबिस्ट नियुक्त किया.
आदिल हालिम/ब्लूमबर्ग/गैटी इमेजिस, स्टीव केनन/एपी फोटो, एरोन ओंटिवरोज/द डेनवर पोस्ट/गैटी इमेजिस
जनवरी 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए पर व्यापार प्रतिबंध लगाया था. प्रतिबंधों के बावजूद मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज उस तेल कंपनी से तेल आयात कर रही है. इसके लिए उसने अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी ब्रयान बल्लार्ड को (बीच में) लॉबिस्ट नियुक्त किया.
आदिल हालिम/ब्लूमबर्ग/गैटी इमेजिस, स्टीव केनन/एपी फोटो, एरोन ओंटिवरोज/द डेनवर पोस्ट/गैटी इमेजिस

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं. जनवरी 2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाया था. ऐसा लगता है कि प्रभावशाली लॉबिस्ट ब्रायन बल्लार्ड को लॉबिंग के लिए नियुक्त करने से अंबानी पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ रहा है. बल्लार्ड अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के नजदीकी सहयोगी और पुराने मित्र माने जाते हैं. 2016 में जब ट्रम्प राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे, तब बल्लार्ड उनके सबसे बड़े फंडरेजरों में से एक थे. सर्वजनिक तौर पर उपलब्ध भारतीय वाणिज्य एवं अद्योग मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 में लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद से रिलायंस ने वेनेजुएला की कंपनी से कम से कम 10 मिलयन मीट्रिक टन यानी 77 मिलयन बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात किया है जिसका मूल्य 3.75 बिलियन डॉलर के बराबर है.

ऐसा संभव है कि रिलायंस को इसलिए इस काम के परिणाम झेलने नहीं पड़े क्योंकि अंबानी ने एवरशेड्स सदरलैंड और बल्लार्ड पार्टनर्स को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमेटिड और उसकी अमेरिकी सहायक कंपनी आरआईएल यूएसए के लिए लॉबी का काम सौंपा है. अप्रैल 2018 में प्रकाशित एक प्रोफाइल में समाचार पत्रिका पॉलिटिको ने बल्लार्ड को “ट्रम्प के वॉशिंगटन में सबसे ताकतवर लॉबिस्ट” बताया था. उसमें लिखा था कि बल्लार्ड ट्रम्प को 30 साल से भी ज्यादा वक्त से जानते हैं और आज भी वह “राष्ट्रपति पद के उनके दूसरे चुनाव अभियान के लिए करोड़ों डॉलर जुटा रहे हैं.” इन दो कंपनियों द्वारा दी गई सार्वजनिक जानकारियों के मुताबिक अंबानी ने दोनों कंपनियों को अमेरिका के विदेश और वित्त विभागों, ह्वाइट हाउस और सिनेट के साथ ऊर्जा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और प्रतिबंधों के मामलों में लॉबी करने के लिए नियुक्त किया है. रिलायंस ने दोनों कंपनियों को कुल 775000 डॉलर भुगतान किया है जिसमें से 330000 डॉलर बल्लार्ड पार्टनर्स को और 445000 डॉलर एवरशेड्स सदरलैंड को दिए गए हैं.

2019 की जनवरी के आखिर में ट्रम्प ने वेनेजुएला की सार्वजनिक कंपनी पेट्रोलिओस डी वेनेजुएला (पीडीवीएसए) पर प्रतिबंध लगा दिया था. ट्रम्प प्रशासन ने यह प्रतिबंध उस वक्त लगाया था जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलास मादुरो दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने थे और चुनावों में धांधली होने के आरोप लगाए जा रहे थे. उस महीने मादुरो के प्रतिपक्षी जुआन ग्वाइदो ने स्वयं को देश का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर लिया था. ट्रम्प का प्रतिबंध लगाना मादुरो पर दबाव डालने के अमेरिकी प्रशासन के प्रयासों का हिस्सा था. प्रतिबंधों ने अमेरिका के सभी व्यक्तियों और कंपनियों को पीडीवीएसए के साथ काम करने से रोक दिया. साथ ही यह प्रतिबंध उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर भी लागू था जिनसे कोई अमेरिकी नागरिक या अन्य कोई नेक्सेस जुड़ा है. इसमें अमेरिकी डॉलर में कारोबर करना या अमेरिकी वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल करना भी शामिल था. इससे रिलायंस जैसी भारतीय कंपनियों पर असर पड़ सकता था. अमेरिका ने ऐसी सभी कंपनियों को वेनेजुएला की कंपनी के साथ अपना हिसाब-किताब पूरा करने के लिए 28 अप्रैल तक 90 दिनों का समय दिया था. लेकिन रिलायंस और नायरा एनर्जी इस अवधि के बाद भी कच्चे तेल का आयात करती रहीं.

गुजरात में रिलायंस के दो बंदरगाह हैं : सिक्का और सेज जामनगर. साथ ही यह दुनिया की सबसे बड़े रिफायनरी परिसर की मालिक भी है जो प्रतिदिन एक मिलियन बैरल से ज्यादा तेल का प्रसंस्करण करती है. नायरा पर पहले एस्सार ऑयल का स्वामित्व था जिसे 2017 में रूस की सार्वजनिक कंपनी रोसनेफ्ट ऑयल कंपनी ने अधिग्रहित कर लिया. नायरा अब गुजरात के वादिनार से संचालित देश की दूसरी सबसे बड़ी रिफायनरी है जहां उसका बंदरगाह है जिससे वह वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात करती है. प्रतिबंध लग जाने के बाद खबरें आई थीं कि रोसनेफ्ट के जरिए वेनेजुएला की कंपनी तेल निर्यात कर रही है. रूस की इस कंपनी का दावा है कि वह प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना तेल आयात कर रही है क्योंकि आयातित तेल वेनेजुएला की कंपनी पर पूर्व के कर्ज के एवज में लिया जा रहा है. 18 अप्रैल को समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने खबर दी थी कि वेनेजुएला की कंपनी ने रिलायंस समेत अपने ग्रहकों से प्रतिबंधों से बचने के लिए रोसनेफ्ट की व्यापार इकाई के जरिए उसका तेल खरीदने को कहा था.

दो दिन बाद रिलायंस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की. विज्ञप्ति में कहा गया था, “रिलायंस प्रतिबंधों के पहले से ही रोसनेफ्ट जैसी कंपनियों के जरिए कच्चा तेल वेनेजुएला की कंपनी से खरीद रही है क्योंकि पिछले कर्ज के एवज में ये कंपनियां वेनेजुएला की कंपनी से तेल खरीद सकती हैं.” उसने यह भी बताया, “जब से प्रतिबंध लगाए गए हैं, रिलायंस ने ऐसी खरीदारी अमेरिकी विदेश विभाग की पूर्ण जानकारी और स्वीकृति से की है और रिलायंस ने विदेश विभाग को लेनदेन और खरीद की मात्रा की जानकारी दी है. उसके इन लेनदेनों से वेनेजुएला की कंपनी को किसी तरह का भुगतान नहीं होता और ये अमेरिकी प्रतिबंधों या नीतियों का उल्लंघन नहीं करते.”

कंवलजीत सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं. @kjsingh001 उनका ट्वीटर हैंडल है.

Keywords: Reliance Industries Mukesh Ambani Venezuela Donald Trump Sanctions
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