वाराणसी में गांधी हत्या के दिन गोडसे पर नाटक खेलने की थी तैयारी

29 जनवरी 2021
मैक्स डेसफॉर / एपी
मैक्स डेसफॉर / एपी

इन दिनों बनारस फिर चर्चा में है. बनारस में 27 जनवरी से 31 जनवरी तक होने वाले रंग मोहत्सव में 30 जनवरी को गोडसे नाटक के मंचन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इसी दिन महात्मा गांधी की पुण्यतिथि भी है. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर गांधी की हत्या कर दी थी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संस्था संस्कार भारती और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा वाराणसी रंग महोत्सव के आयोजक हैं. पांच दिवसीय महोत्सव में पांच नाटकों का मंचन होना है. 22 जनवरी को जब महोत्सव में मंचित होने वाले नाटकों की सूची जारी हुई तो बनारस के बुद्धिजीवी, पत्रकार और नागरिक समाज में भारी नाराजगी छा गई. सोशल मीडिया में काफी विरोध झेलने के बाद गोडसे नाटक को सूची से हटा दिया गया और एक नई सूची जारी की गई.

‘गोडसे’ नाटक के लेखक उत्कर्ष उपेंद्र सहस्रबुद्धे का कहना है कि नाटक का विरोध गैरजरूरी है क्योंकि किसी ने स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी स्क्रिप्ट पूरी नहीं हुई है. अब इसी आयोजन में सहस्रबुद्धे के एक अन्य नाटक का मंचन होगा.

इस बारे में जब मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, वाराणसी के निदेशक रामजी बाली से बात की तो उन्होंने इसके सूची में आने की बात को डिजाइनर से हुई गलती बताया. उन्होंने कहा, “देखिए वह नाटक होना ही नहीं था. 24 जनवरी को हमारी प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. उससे पहले इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रहे थे.” उन्होंने आगे कहा, “उस समय हमारे पास बहुत से नाटक थे. वह नाटक भी आया था. डिजाइनर को गलतफहमी हो गई. उसे लगा कि यह नाटक भी हो रहा है और वह पम्पलेट सोशल मीडिया पर फैल गया.”

हालांकि साझा संस्कृति मंच की सदस्य जागृति राही बताती हैं कि यह गलती नहीं है. राही खुद गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से दमन, उत्पीड़न के खिलाफ वाराणसी में सक्रिय हैं. उन्होंने मुझसे बात करते हुए कहा, “आप खुद ही समझिए जब इस महोत्सव का आयोजन संस्कार भारती जैसी संस्था करा रही हो, जो खुद आरएसएस से जुड़ी हुई है, तो ऐसे में सूची में गोडसे नाटक का होना, गलती से होने वाला कम ही नजर आता है.”

सुनील कश्यप कारवां में डाइवर्सिटी रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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