चुनाव के बाद महागठबंधन का प्रधानमंत्री सर्वसम्मति से तय होगा : शरद यादव

11 मार्च 2019
अगस्त 2017 में जनता दल (युनाइटेड) ने “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में पार्टी के संस्थापक नेता शरद यादव को पार्टी से बाहर कर दिया.
प्रदीप गौर/मिंट/गैटी इमेजिस
अगस्त 2017 में जनता दल (युनाइटेड) ने “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में पार्टी के संस्थापक नेता शरद यादव को पार्टी से बाहर कर दिया.
प्रदीप गौर/मिंट/गैटी इमेजिस

2017 अगस्त में मुख्य रूप से बिहार और झारखंड में आधार वाली जनता दल (युनाइटेड) ने “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में पार्टी के संस्थापक नेता शरद यादव को पार्टी से बाहर कर दिया. 7 बार सांसद रहे शरद यादव 2006 से 2016 तक जदयू के अध्यक्ष थे. उनके नेतृत्व में जूदयू ने 2015 में बिहार विधान सभा चुनाव में कांग्रेस और लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से गठबंधन किया. शरद यादव के अनुसार जदयू नेता नीतीश कुमार ने लालू यादव से 25 बार मुलाकात की लेकिन बाद में उनकी सिफारिशों के कारण ही वह गठबंधन बना पाया था. चुनाव में गठबंधन की जीत हुई थी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे.

जदयू 2003 से 2013 तक बीजेपी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा थी. इसके राजद और कांग्रेस के साथ बने महागठबंधन को बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना गया. एनडीए के साथ गठबंधन कर जदयू ने दो बार विधान सभा चुनाव जीता था. 2008 से 2013 शरद यादव एनडीए के कंवीनर थे लेकिन 2013 में नरेन्द्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने का जदयू ने विरोध किया. 2014 में मोदी को एनडीए का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने का भी जदयू ने विरोध किया. इसके बाद दोनों पार्टी के बीच एक दशक लंबी साझेदारी का अंत हो गया.

2017 में जदयू, महागठबंधन से अलग हो कर दुबारा एनडीए में शामिल हो गई. इस निर्णय का विरोध करने के चलते शरद यादव को पार्टी से बाहर होना पड़ा. पार्टी से बाहर होने के कुछ हफ्तों बाद शरद यादव ने दिल्ली में एक सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें 16 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों ने भाग लिया. सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने 2019 के आम चुनावों के लिए महागठबंध की योजना पर विचार विमर्श आरंभ किया. इस मीटिंग का नाम “साझी विरासत बचाओ” था. मई 2018 में शरद यादव ने “लोकतांत्रिक जनता दल " का गठन किया. हाल में उनकी पार्टी बिहार में कांग्रेस-राजद गठबंधन के साथ है.

इस साल 9 मार्च को गठबंधन के कयास के बीच शरद यादव ने रांची में लालू प्रसाद यादव से भेट की. जिस वक्त यह मुलाकात हो रही थी पटना में राजद की संसदीय दल की बैठक जारी थी. यादव, गठबंधन की एकता पर स्पष्ट हैं लेकिन सहयोगियों के मध्य सीटों के बंटवारे की विस्तृत जानकारी देने से इनकार करते हैं. मीटिंग के बाद राजद ने घोषणा की कि महागठबंधन पर अंतिम निर्णय लालू प्रसाद यादव करेंगे.

शरद यादव ने आगामी लोक सभा चुनावों पर कारवां के स्टाफ राइटर सागर और रिपोर्टिंग फेलो तुषार धारा से बात की. यादव ने महागठबंधन, उसकी चुनावी रणनीति और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार जैसे सवालों का जवाब दिया. वे कहते हैं, “यह विपक्ष के गठबंधन का चरित्र होता है कि वह अपने नेता की घोषणा पहले नहीं करता. चुनाव के बाद एकमत से सहमति बना ली जाती है.”

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

तुषार धारा कारवां में रिपोर्टिंग फेलो हैं. तुषार ने ब्लूमबर्ग न्यूज, इंडियन एक्सप्रेस और फर्स्टपोस्ट के साथ काम किया है और राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथ रहे हैं.

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