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एसआइआर से कैसे जीता बीजेपी ने पश्चिम बंगाल चुनाव

कोलकाता के सोनागाछी इलाके में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान अधिकारियों से फॉर्म लेतीं पूर्व सेक्स वर्कर. (दिव्यांग्शु सरकार/एएफ़पी/गैटी इमेजिस)

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पश्चिम बंगाल में अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 294 में से 207 सीटें जीती. हालांकि, इन चुनावों में गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं. चुनाव नतीजों के अगले दिन, 5 मई को, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफ़ा देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि, ‘मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं. जनादेश की लूट हुई है.’

बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि अर्धसैनिक बल की हिंसा और डराने-धमकाने की वजह से वोटों की गिनती की प्रक्रिया प्रभावित हुई. साथ ही, बनर्जी ने दावा किया कि ‘उन्हें जनता के फ़ैसले से नहीं, बल्कि साज़िश से हराया गया.’ उन्होंने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआइआर) प्रक्रिया पर निशाना साधा, जिसके कारण राज्य की वोटर लिस्ट से 90 लाख से ज़्यादा नाम हटा दिए गए थे.

एसआइआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित लाखों दस्तावेज़ों को बहुत बारीकी से जांचने वाले कोलकाता के रिसर्च ग्रुप, सबार इंस्टीट्यूट, के डेटा के अनुसार, बीजेपी द्वारा जीती गई 207 सीटों में से 102 सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज़्यादा थी.

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