जामिया में पुलिस की बर्बरता : छात्रों को “जिहादी” कहते हुए बेरहमी से पीटा

18 दिसंबर 2019
इशान तन्खा
इशान तन्खा

15 दिसंबर की रात होली फैमिली अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल था. मैंने वहां भर्ती कई छात्रों के परिजनों से बात की. वहां एक बात समान थी कि इन लोगों को पता ही नहीं था कि उनके घायल रिश्तेदार कहां और किस हाल में हैं. इनमें से कई लोगों को अस्पताल के भीतर जाने तक नहीं दिया गया. लोग अस्पताल के गेट पर मौजूद गार्डों से भीतर जाने देने की फरियाद कर रहे थे. वहां बड़ी संख्या में सैन्य पोशाक में दिल्ली पुलिस के जवान मौजूद थे. ये जवान अस्पताल के अंदर और गेट पर मौजूद थे और मरीजों के परिजनों और पत्रकारों को वहां से हटा रहे थे. रुक-रुक कर गेट खुलता लेकिन केवल पुलिस की गाड़ियों को प्रवेश दिया जाता.

परिजनों के अलावा जामिया के कई छात्र और शिक्षक होली फैमिली अस्पताल के बाहर खड़े होकर अंदर जाने का इंतजार कर रहे थे. पुलिस का रवैया दोस्ताना नहीं था. जब मैं इलाज करा रहे एक छात्र के दोस्त से बात करने लगा तो दो दर्जन से ज्यादा पुलिस वालों ने हमें घेर लिया और वहां से चले जाने को कहने लगे. जब मैंने कहा कि मुझे इंटरव्यू खत्म कर लेने दिया जाए तो पुलिस वाले ने धमकाते हुए कहा, “चल तुम्हारा इंटरव्यू करते हैं.” एक छात्र ने जब पुलिस वालों से पूछा कि वह उस अस्पताल के बाहर क्यों नहीं खड़ा हो सकता जहां उसके दोस्त और परिवार के सदस्य इलाज करा रहे हैं तो एक अधिकारी ने जवाब दिया, “हम घर भिजवा देंगे, जा” और हमें वहां से हटा दिया.

जामिया के एक छात्र ने बताया, “यह लोग हमारी बात नहीं सुन रहे थे, बस हमें दंडों से पीट रहे थे. पुलिस वाले बहुत गुस्से में थे. लग रहा था किसी चीज का बदला ले रहे हों हमसे.”

कई प्रत्यक्षदर्शियों छात्रों ने मुझे बताया कि उस शाम पुलिस जामिया परिसर के अंदर आई जहां पिछले दो दिनों से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ छात्र धरने पर बैठे थे. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस जामिया में बेवजह आई थी. शाम 5 बजे पुलिस ने जामिया के चारों तरफ से परिसर में प्रवेश किया और वहां मौजूद छात्रों को पीटने लगी. पुलिस ने लाइब्रेरी, शौचालय और कैंटीन में घुसकर छात्रों की पिटाई की. सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि पुलिस उसकी अनुमति के बिना परिसर में घुसी थी जो “स्वीकार्य” नहीं है. हालांकि पुलिस का कहना है कि वह पत्थर मारने वाले छात्रों का पीछा करती हुई परिसर में घुसी थी.

होली फैमिली अस्पताल के अलावा घायल छात्रों को इलाज के लिए राजधानी के अन्य अस्पतालों में- अलशिफा अस्पताल, अपोलो अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और एम्स में भर्ती कराया गया था. आधी रात के बाद मैं अलशिफा अस्पताल गया जहां का प्रशासन आने वाले लोगों के प्रति नरम था. मैंने वहां पुलिस के हमले में घायल हुए पांच छात्रों से बात की. इन छात्रों ने मुझे पुलिस की बर्बरता की कहानी बयान की. उनके साथ हुई बातचीत से पता चलता है कि दिल्ली पुलिस छात्रों को पीटने का इरादा बना कर परिसर में दाखिल हुई थी.

सागर कारवां के स्‍टाफ राइटर हैं.

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