अपराध और पूर्वाग्रह

दिल्ली में दंगा भड़काने में बीजेपी और दिल्ली पुलिस की मिलीभगत

दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों के दरम्यान और उसके बाद सामने आए बेशमुार साक्ष्य दिल्ली पुलिस की भागीदारी और उसकी सांठगांठ को जाहिर करते हैं.
इशान तन्खा
दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों के दरम्यान और उसके बाद सामने आए बेशमुार साक्ष्य दिल्ली पुलिस की भागीदारी और उसकी सांठगांठ को जाहिर करते हैं.
इशान तन्खा

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शादाब आलम के लिए 24 फरवरी 2020 का दिन रोजमर्रे  की तरह ही शुरू हुआ था. वह उत्तर दिल्ली के पुराने मुस्तफाबाद के अपने घर में, जहां वह पांच साल से भी ज्यादा वक्त से रह रहे थे, तड़के ही जग गए थे. तैयार होकर सुबह के 10 बजे वह स्मार्ट मेडिकल स्टोर के लिए रवाना हुए. वजीराबाद रोड पर वृजपुरी चौक के पास की इस दुकान में वह कई सालों से नौकरी करते थे और सुबह से ही उनकी ड्यूटी शुरू हो जाती थी.

इसके ठीक एक दिन पहले, दोपहर को भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने उनकी दुकान से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास एक बेहद भड़काऊ भाषण दिया था. इस स्टेशन पर सैकड़ों महिलाएं नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) के खिलाफ धरने पर बैठी थीं. केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने पिछले साल यह कानून बनाया था और अब उसका प्रस्ताव राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को कानून बनाने का है. सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शनों की लहर दिल्ली और पूरे देश में फैल गई थी. जाहिरा तौर पर इन धरना-प्रदर्शनों की अगुवाई ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग ही कर रहे थे, जो सरकार की इन कवायदों से भारतीय गणतंत्र में खुद को हाशिए पर समेट दिए जाने के खतरों से खौफजदा थे. बीजेपी और हिंदुत्ववादी समूहों ने इन प्रदर्शनकारियों का तिरस्कार किया था. अनेक जगहों पर तो प्रदर्शनकारियों को खूब डराया-धमकाया गया था और उनके खिलाफ हिंसा भी हुई थी. कपिल मिश्रा ने उस सभा के दौरान अपने पास खड़े उत्तर-पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त से ऐलानिया तौर पर कहा था कि अगर दिल्ली पुलिस ने जाफराबाद और इसके पड़ोसी मेट्रो स्टेशन चांद बाग को प्रदर्शनकारियों के चंगुल से मुक्त नहीं कराया तो, ''हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा.”

दयालपुर थाने के पुलिसकर्मियों पर 24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक दो दर्जन से अधिक मुसलमानों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और यातनाएं देने के आरोप हैं.. शाहीन अहमद/कारवां दयालपुर थाने के पुलिसकर्मियों पर 24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक दो दर्जन से अधिक मुसलमानों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और यातनाएं देने के आरोप हैं.. शाहीन अहमद/कारवां
दयालपुर थाने के पुलिसकर्मियों पर 24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक दो दर्जन से अधिक मुसलमानों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और यातनाएं देने के आरोप हैं.
शाहीन अहमद/कारवां

आलम इससे वाकिफ थे कि कपिल मिश्रा के आग लगाऊ भाषण के बाद बीती रात मुसलमानों पर हमले हुए थे, लेकिन तब उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि हालात इस हद तक बिगड़ जाएंगे. 24 फरवरी 2020 को उन्होंने कुछ घंटे फार्मेसी की दुकान पर काम किया और फिर दोपहर की नमाज पढ़ने के लिए कसाब पुरा की मस्जिद चले गए. आलम नमाज अदा कर लौटने ही वाले थे कि उनके एक दोस्त ने फोन पर इत्तिला दी कि मुसलमानों पर फिर से हमले किए जा रहे हैं. लिहाजा, आलम ने दुकान पर सही सलामत पहुंचने के लिए आम दिनों के बजाए एक लंबा रास्ता तय किया और इस तरह वह 3 बजे वहां पहुंचे.

प्रभजीत सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं.

अर्शु जॉन कारवां के सहायक संपादक (वेब) है. पत्रकारिता में आने से पहले दिल्ली में वकालत कर रहे थे.

Keywords: Delhi Violence Delhi Police BJP
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