सेक्युलर भारतियों का इस्लामोफोबिया

कोलकाता में सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध रैली.
देबज्योति चक्रवर्ती / नूरफोटो / गेटी इमेजिस
कोलकाता में सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध रैली.
देबज्योति चक्रवर्ती / नूरफोटो / गेटी इमेजिस

14 दिसंबर की दोपहर में एक अधेड़ उम्र का आदमी जामिया मिलिया इस्लामिया के रसायन शास्त्र विभाग की दीवार पर पेंटिंग बना रहा था. विश्वविद्यालय का यह विभाग सेंट्रल कैंटीन के सामने है. उस दिन बहुत सारे छात्र जामिया की दीवारों पर रंग-बिरंगे संदेशों वाली पेंटिंगें बना रहे थे. एसा कर छात्र नागरिकता संशोधन कानून (2019) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे थे.

पेंटिंग कर रहा वह आदमी अरबी भाषा में लिखे नारे “ला इलाहा इल्लल्लाह”, जिसका अर्थ है : “अल्लाह ही है उसके सिवाय कोई सच्चा पूज्य नहीं है”, को मिटाने का प्रयास कर रहा था. जब वह ऐसा कर रहा था, तो वहां तकरीबन 15 छात्र और सुरक्षा गार्ड मौजूद थे. छात्रों का समूह इस बात की तारीफ कर रहा था कि सांप्रदायिक नारे के खिलाफ उनकी मांग मान ली गई. उसी वक्त 10 या 15 छात्रों का एक और समूह वहां आ गया, जो नारे को मिटाए जाने से खफा लग रहा था. उनमें से एक ने पूछा, “इस नारे को मिटाने की हिम्मत किसने की? क्या इसी वजह से नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजिका के जरिए हम लोगों पर निशाना नहीं साधा जा रहा है?”

पेंटिंग कर रहे आदमी ने तनाव भांप लिया और वहां से खिसक गया. छात्रों में से एक ने मिटे हुए अक्षरों को दुबारा ठीक कर दिया. वहां मौजूद अन्य छात्रों को ये छात्र समझाने लगे कि नागरिकता संशोधन कानून को इस्लाम ओर मुसलमानों पर हमले की तरह देखा जाना चाहिए और इसी बिंदू से मुसलमानों को अपने हक की आवाज उठानी चाहिए. दूसरा समूह तकरीर करने लगा कि “ला इलाहा इल्लल्लाह” एक सांप्रदायिक नारा है जो गैर-मुसलमानों की मौजूदगी वाले धर्मनिरपेक्ष आंदोलन में नहीं लगना चाहिए.

शाम होते-होते दीवार से जाहिर हो रहे मुस्लिमपने को फीका करने के लिए, उस नारे के आसपास “सेक्युलर इंडिया”, “बी यूनाइटेड”, “सिविल नाफरमानी” और “सब एक हैं” के नारे उकेर दिए गए थे. बाद में जब जामिया के गेट नंबर 7 के पास छात्र जमा हुए तो वहां “लाल सलाम” और “इंकलाब जिंदाबाद” के गगनभेदी नारे गूंजने लगे.

एक के बाद एक, लोग मंच पर आते और सीएए-एनआरसी के बारे में बोलते. लेफ्ट-लिबरल छात्र नेता, जिनका माइक्रोफोन पर कब्जा था, उन सभी वक्ताओं को खामोश करा देते जो यह कहने की कोशिश करते कि सीएए और एनआरसी मुख्यतः मुस्लिम विरोधी हैं. जो लोग “अल्लाह हू अकबर” के नारे लगाते उन्हें सांप्रदायिक कहकर खामोश कर दिया जाता. लेफ्ट-लिबरल छात्रों ने अपने वक्तव्यों में कहा कि “हम एक हैं और आंदोलन को सांप्रदायिक नहीं बनने दिया जाना चाहिए. हम “ला इलाहा” नारा नहीं लगाने देंगे.”

मुद्दास्सिर अमीन दिल्ली स्थित कश्मीरी रिसर्चर हैं.

समरीन मुश्ताक दिल्ली स्थित कश्मीरी रिसर्चर हैं.

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