कश्मीर से संबंधित प्रदर्शन और चर्चा पर हैदराबाद विश्वविद्यालय ने लगाई रोक

24 अगस्त 2019
जिस दिन केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की घोषणा की उस दिन हैदराबाद विश्वविद्यालय के 8 छात्र संगठन राज्य के बंटवारे के खिलाफ और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के विरोध में एक साथ आ गए.
मिधुन मोहन
जिस दिन केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की घोषणा की उस दिन हैदराबाद विश्वविद्यालय के 8 छात्र संगठन राज्य के बंटवारे के खिलाफ और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के विरोध में एक साथ आ गए.
मिधुन मोहन

5 अगस्त को राज्यसभा ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पारित कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. इसके साथ ही सरकार ने राज्य को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को भी प्रभावकारी रूप से निष्क्रिय कर दिया. सरकार के इस कदम के खिलाफ हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक चर्चा आयोजन करने के प्रयास किए लेकिन विश्वविद्यालय ने इन प्रदर्शनों पर रोक लगा दी और कश्मीर से संबंधित पैनल चर्चा की अनुमति नहीं दी. प्रदर्शन को रोकने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस और त्वरित कार्य बल (आरएएफ) की तैनाती की गई थी. मैंने इस बारे में विश्वविद्यालय छात्रों और अध्यापकों से बात की. उनके अनुसार, सरकार का यह कदम छात्र समुदाय की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध करने के अधिकार को दबाने का प्रयास है.

जिस दिन केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की घोषणा की उस दिन हैदराबाद विश्वविद्यालय के 8 छात्र संगठन राज्य के बंटवारे के खिलाफ और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के विरोध में एक साथ आ गए. छात्र गृहमंत्री अमित शाह का पुतला जलाना चाहते थे. विरोध कर रहे संगठनों में भारतीय छात्र संघ, अंबेडकर छात्र संगठन, मुस्लिम छात्र संघ, दलित छात्र संगठन, अखिल भारतीय छात्र संगठन, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन और जम्मू-कश्मीर छात्र संगठन शामिल थे. प्रदर्शन शाम 6.30 बजे शुरू होने वाला था और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बने साउथ शॉपिंग कंपलेक्स में एकत्र हुए थे.

इसके तुरंत बाद बड़ी संख्या में पुलिस और आरएएफ के जवान विश्वविद्यालय में घुस आए और छात्रों को तितर-बितर कर दिया. इन लोगों ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पी. सरदार सिंह द्वारा जारी एक नोटिस भी पढ़ कर सुनाया. इस नोटिस में 5 अगस्त की तारीख है और इसे विश्वविद्यालय ने वेबसाइट पर प्रकाशित किया है. नोटिस में छात्रों को सूचित किया गया है कि पुलिस ने साइबराबाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है. जिसके तहत पांच या अधिक लोगों को एक स्थान पर एकत्र होने की पाबंदी है. नोटिस में लिखा है, “यह सूचित किया जाता है कि विश्वविद्यालय परिसर में तत्काल प्रभाव से सभी तरह के विरोध और आंदोलनों पर रोक लगाई जाती है.”

उसी दिन पुलिस ने यूनिवर्सिटी परिसर के नार्थ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से जम्मू-कश्मीर के छात्र समूह को भी हटा दिया. यहां छात्र कश्मीर की स्थिति पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए थे. विश्वविद्यालय से संचार में मास्टर कर रहे हैं और जम्मू-कश्मीर छात्र संगठन के अध्यक्ष हादिफ निसार उस वक्त वहां मौजूद थे जब पुलिस वहां पहुंची. निसार ने बताया, “हम बहुत घबराए हुए थे क्योंकि घरवालों से बातचीत नहीं हो पा रही थी. बहुत से छात्र अपने मां-बाप से संपर्क नहीं कर पा रहे थे इसलिए संगठन के अध्यक्ष होने के नाते मैंने समस्या को आर्थिक अथवा मनोवैज्ञानिक तरीके से संबोधित करने का प्रयास कर रहा था. जब हम बातचीत कर रहे थे, पुलिस वहां आ गई और हमसे कहा कि हम वहां से चले जाएं क्योंकि धारा 144 लागू है अन्यथा वह हमें गिरफ्तार कर लेगी. बाद में जब प्रदर्शन होने वाला था तब पुलिस एक बार फिर वहां आई और प्रदर्शन को रोक दिया. पुलिस ने छात्रों को धमकी भी दी.” निसार मानते हैं कि यह कैंपस के भीतर जमा होने और अपनी असहमति व्यक्त करने के लोकतांत्रिक अधिकार के खिलाफ है.

“विश्वविद्यालय में निरंकुशता की संस्कृति का कारण तीव्र आर्थिक और सांस्कृतिक संकट है. लेकिन जनता की बढ़ती लोकतांत्रिक चेतना के कारण भी ऐसा होता है. छात्र समुदाय अपने आत्मसम्मान और अपनी आजादी के प्रति जागरूक हो रहा है.”

मिधुन मोहन कारवां के एडिटोरियल इंटर्न हैं.

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