उत्तर प्रदेश में पुलिसिया आतंक के नौ दिन

25 दिसंबर 2019
उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे आंदोलनों का पुलिस बर्बरता से दमन कर रही है. पुलिस के हमलों और अन्य कारणों से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है.
एन मलिक
उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे आंदोलनों का पुलिस बर्बरता से दमन कर रही है. पुलिस के हमलों और अन्य कारणों से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है.
एन मलिक

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में हो रहे आंदोलन में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में अधिकतर ऐसे हैं जिन्हें गोलियां लगी हैं. हालांकि प्रदेश सरकार और पुलिस ने फायरिंग की बात से इनकार किया है. पुलिस का कहना है कि इन लोगों की मौत क्रॉस फायरिंग में हुई है.

23 दिसंबर तक उत्तर प्रदेश में 174 मुकदमे दर्ज कर 705 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. कथित तौर पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखने पर 81 मुकदमे दर्ज कर 120 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. डीजीपी मुख्यालय के अनुसार 23 दिसंबर तक कुल 1786 ट्विटर, 3037 फेसबुक, 38 यूट्यूब पोस्ट पर कार्रवाई की गई है.

21 दिसंबर को आईजी लॉ एंड आर्डर ने बताया कि सीएए आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 4500 लोगों को निजी मुचलके पर पाबंद किया गया है. उन्होंने बताया कि अब तक 263 पुलिस कर्मी घायल हुए हैं जिसमें 57 पुलिस कर्मियों को बुलेट इंजरी आई है. हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में 405 खोखा कारतूस बरामद हुए हैं.

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन 17 दिसंबर से ही शुरू हो गए थे लेकिन 19 दिसंबर को देशव्यापी विरोध के दौरान हालात बिगड़ गए. अगले चार दिनों में यूपी के एक दर्जन से अधिक जिलों में बड़े प्रदर्शन हुए. प्रदर्शन को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में जगह-जगह टकराव हुआ.

लखनऊ में 19 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में मीडिया की दो ओवी वैनों में आग लगा दी गई. दो पुलिस चौकियों में भी आग लगा दी गई. कुछ और वाहनों में आगजनी व तोड़फोड़ हुई. इसी दौरान गोली लगने से मोहम्मद वकील की मौत हो गई. परिजनों के अनुसार वकील राशन और दवा लेने गए थे जब पुलिस फायरिंग में उन्हें गोली लगी. तीन अन्य जख्मी लोगों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनका इलाज चल रहा है.

मनोज सिंह गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं.

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