यूपी में सीतापुर के सरपंच पर लगा देशद्रोह का मामला हटा, भाई ने लगाया विरोधियों पर फर्जी वीडियो बना फंसाने का आरोप

19 जुलाई 2021
10 मई को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के नवनिर्वाचित सरपंच असलम को राजद्रोह के आरोप में जेल भेज दिया गया और बाद में जमानत से इनकार कर दिया गया. पुलिस ने जुलाई में देशद्रोह का आरोप हटा दिया.
साभार : शकील अहमद
10 मई को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के नवनिर्वाचित सरपंच असलम को राजद्रोह के आरोप में जेल भेज दिया गया और बाद में जमानत से इनकार कर दिया गया. पुलिस ने जुलाई में देशद्रोह का आरोप हटा दिया.
साभार : शकील अहमद

10 मई को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के नवनिर्वाचित सरपंच असलम को देशद्रोह के आरोप में जेल भेज दिया गया. उसी महीने एक सत्र अदालत ने असलम को इस आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया कि उन पर "संगीन" और "गंभीर" आरोप हैं. 3 जुलाई को पुलिस ने अदालत में एक आरोप पत्र दाखिल किया जिसमें उसने राजद्रोह का मामला हटा लिया. असलम का मामला पुलिस द्वारा राजद्रोह के प्रावधानों का गैरवाजिब राजनीतिक हथियार के रूप इस्तेमाल को दर्शाता है. असलम के भाई शकील अहमद के मुताबिक चुनाव में असलम ने जिस उम्मीदवार को हराया था उसके बनाए एक फर्जी वीडियो के आधार पर पुलिस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के दबाव में मामला दर्ज किया था.

असलम की जीत के बाद 2 मई को एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें "असलम भैया जिंदाबाद" और "पाकस्तान जिंदाबाद" के नारे सुनाई दे रहे थे. वह वीडियो अंधेरे में शूट किया गया है और नारे लगाने वालों के चेहरे दिखाई नहीं दे रहे हैं. पुलिस ने असलम और उनके समर्थकों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और भारत सरकार के प्रति नफरत फैलाने वाले नारे लगाने का आरोप लगाया. लेकिन अहमद ने कहा कि न तो असलम ने और न ही उनके समर्थकों ने ऐसी कोई रैली की थी. पड़ोस के गांव के सात वर्षीय लड़के राहुल निषाद ने मुझे बताया कि वह उन बच्चों में एक था जिन्हें असलम के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों से जुड़े लोगों ने नारे लगाने के लिए पैसे दिए थे.

अहमद के मुताबिक असलम और उनके समर्थकों को गिरफ्तारी के समय यह नहीं पता था कि वीडियो किसने बनाया या नारे लगाने वाले कौन हैं. आवाजें बच्चों और लड़कों की लगती हैं. वीडियो को सोशल मीडिया के जरिए फैलाया गया और यहीं से स्थानीय पुलिस का ध्यान इस पर गया. रेवसा प्रखंड के थानगांव पुलिस थाने ने 7 मई को प्राथमिकी दर्ज की और तीन दिन बाद असलम और तीन अन्य को देशद्रोह और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. प्राथमिकी में कहा गया है कि रैली में कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया.

असलम सीतापुर के रेवसा प्रखंड के बेलौटा पंचायत के निर्वाचित सरपंच हैं. अहमद के मुताबिक इस हिंदू-बहुल पंचायत में सौ से अधिक मुस्लिम मतदाता सहित करीब एक हजार वोटर हैं. उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को हुए पंचायत चुनाव में असलम को 408 वोट मिले थे और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी गुलाब सिंह को 286 वोट.

अहमद ने कहा कि असलम और उनकी टीम 3 मई को मतगणना के दिन से पहले की रात तक रेवसा ब्लॉक में ही थे. उन्होंने कहा कि वह सुबह करीब चार बजे मतगणना के बाद बेलौटा गांव लौटे. अहमद ने मुझे बताया, “7 मई को थानगांव पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने मेरे भाई को फोन किया. "वहां पहुंचने पर हमें एक वीडियो दिखाया गया जिसमें “असलम भैया जिंदाबाद”, “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लग रहे थे. इंस्पेक्टर ने हमसे पूछा कि यह वीडियो किसने बनाया है. मेरे भाई ने कहा कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. चूंकि इस वीडियो में किसी का चेहरा नहीं दिख रहा है इसलिए पहचानना मुश्किल है. हमने कहा कि हम इसे सुनेंगे और अगर कोई आवाज पहचान में आती है तो हम उन्हें बताएंगे. साथ ही हम अपने स्तर पर भी पता लगाएंगे. इसके बाद इंस्पेक्टर ने हमें जाने को दिया.”

मो. सरताज आलम स्वतंत्र पत्रकार हैं.

Keywords: Sedition Uttar Pradesh Police Uttar Pradesh RSS Bajrang Dal
कमेंट