स्कैनिया बस विवाद : नितिन गडकरी के प्लॉट में खड़ी थी बस, फिर क्यों कहते हैं कि कोई लेना-देना नहीं

14 अप्रैल 2021
गडकरी ने "किसी भी स्कैनिया बस" या "उससे जुड़े किसी भी फर्म या व्यक्ति" से संबंध होने से इनकार किया है लेकिन कारवां की पड़ताल बताती है कि केंद्रीय मंत्री का उक्त दावा झूठा है और बस गडकरी के प्लांट पर मौजूद थी और जिन कंपनियों से बस का संबंध है उन कंपनियों के उनके बेटों- सारंग और निखिल- के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं.
सोनू मेहता/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस
गडकरी ने "किसी भी स्कैनिया बस" या "उससे जुड़े किसी भी फर्म या व्यक्ति" से संबंध होने से इनकार किया है लेकिन कारवां की पड़ताल बताती है कि केंद्रीय मंत्री का उक्त दावा झूठा है और बस गडकरी के प्लांट पर मौजूद थी और जिन कंपनियों से बस का संबंध है उन कंपनियों के उनके बेटों- सारंग और निखिल- के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं.
सोनू मेहता/हिंदुस्तान टाइम्स/गैटी इमेजिस

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर हाल में अवैध रूप से जमीन हासिल करने और बड़ा कर्ज लेने के लिए उसे गिरवी रखने का आरोप लगा है.

10 मार्च 2021 को स्वीडन के समाचार चैनल एसवीटी ने खबर दी कि स्वीडन की कमर्शियल-व्हीकल्स (वाणिज्यिक वाहन) निर्माण कंपनी स्कैनिया ने दिसंबर 2016 में गडकरी की बेटी की शादी में "गहरे लाल रंग की चमड़े की सीट वाली" एक लक्जरी बस उपहार में दी थी. एसटीवी ने स्कैनिया की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह खबर दी है. एसवीटी ने आगे बताया कि "सूत्रों ने स्कैनिया की मूल कंपनी फॉक्सवैगन को जानकारी दी है कि भारतीय मंत्री को यह उपहार सरकार से काम हासिल करने की नीयत से दिया गया है. गडकरी ने "किसी भी स्कैनिया बस" या "उससे जुड़े किसी भी फर्म या व्यक्ति" से संबंध होने से इनकार किया है लेकिन कारवां की पड़ताल बताती है कि केंद्रीय मंत्री का उक्त दावा झूठा है और बस गडकरी के प्लांट पर मौजूद थी और जिन कंपनियों से बस का संबंध है उन कंपनियों के उनके बेटों- सारंग और निखिल- के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं.

एसवीटी ने यह रिपोर्ट जेटीडीएस और कॉन्फ्यूएंस मीडिया के साथ मिलकर की है. ये दोनों जर्मनी और भारत की समाचार संस्थाएं हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि “यह बस गडकरी परिवार से जुड़ी एक कंपनी को एक डीलर के मार्फत दी गई थी. स्कैनिया के प्रेस मैनेजर और वरिष्ठ सलाहकार हांस डेनियल्सन ने मुझे बताया कि कंपनी ने एक मोटर लिंक एचडी बस बेंगलुरु के डीलर ट्रांसप्रो मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड को 2016 में दी थी. उन्होंने कहा कि स्कैनिया की अपनी पड़ताल के अनुसार ट्रांसप्रो ने यह बस एक दूसरी भारतीय कंपनी सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को किराए पर दी थी.

डेनियल्सन ने कहा कि स्कैनिया को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि वह बस गडकरी को तोहफे में दी गई थी. लेकिन उन्होंने यह माना कि बस की डिलीवरी से संबंधित हस्तांतरण के दस्तावेजों को सटीक रूप से नहीं रखे जाने से पड़ताल करने में मुश्किल आ रही है. इस खबर के प्रकाशित होने तक अन्य किसी कंपनी या व्यक्ति ने इस पर टिप्पणी नहीं की. मैंने गडकरी और उनके बेटों और ट्रांसप्रो मोटर्स और सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी से भी सवाल पूछे थे.

कारपोरेट मंत्रालय में दायर दस्तावेजों से पता चलता है कि सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी का संबंध सारंग और निखिल गडकरी की कंपनियों मानस एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से है. सारंग मानस एग्रो के और निखिल सियान एग्रो के निदेशक हैं. इसके अतिरिक्त कारपोरेट मंत्रालय के दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि सारंग गडकरी की मानस एग्रो ने सुदर्शन हॉस्पिटैलिटी को 2016-17 में 35 लाख रुपए का असुरक्षित कर्ज दिया था. यह तथ्य भी गडकरी के दावे को झूठलाता है.

कौशल श्रॉफ स्वतंत्र पत्रकार हैं एवं कारवां के स्‍टाफ राइटर रहे हैं.

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