छत्तीसगढ़ के आदिवासी ईसाई उत्पीड़न का शिकार, "घर वापसी" का बढ़ रहा दबाव

राहत शिविर में एक चर्च की दीवार पर लटकी एक क्षतिग्रस्त पेंटिंग, तस्वीर 10 अप्रैल 2009 को ओडिशा के मोंडेसोर गांव में ली गई है. सिर्फ 2019 में एक्टिविस्टों द्वारा दर्ज की गई कम से कम 328 हिंसक घटनाओं के साथ, मोदी प्रशासन के तहत ईसाइयों के खिलाफ हिंसा बढ़ गई है, जो अक्सर जबरन धर्मांतरण के आरोपों से संबंधित होती है.
डेनियल बेरेहुलाक / गैटी इमेजिस
राहत शिविर में एक चर्च की दीवार पर लटकी एक क्षतिग्रस्त पेंटिंग, तस्वीर 10 अप्रैल 2009 को ओडिशा के मोंडेसोर गांव में ली गई है. सिर्फ 2019 में एक्टिविस्टों द्वारा दर्ज की गई कम से कम 328 हिंसक घटनाओं के साथ, मोदी प्रशासन के तहत ईसाइयों के खिलाफ हिंसा बढ़ गई है, जो अक्सर जबरन धर्मांतरण के आरोपों से संबंधित होती है.
डेनियल बेरेहुलाक / गैटी इमेजिस

ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एक पादरी के अनुसार, 20 मई को कोक्कर पाल गांव में दो ईसाई आदिवासी परिवारों के घर पर भीड़ ने हमला किया. भारत में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की निगरानी करने वाले संगठन पर्सेप्शन रिलीफ के समन्वयक रवि कुमार ने इसकी पुष्टि की. पादरी ने मुझे बताया, "रात 11 बजे के आसपास मारपीट शुरू हुई. वे रात के अंधेरे में जंगल में छिप गए. औरतें रास्ता भूल गईं और अपने पति से अलग हो गईं. उन्हें बुरी तरह से पीटा गया और तीन किलोमीटर तक घिसटते रहने के बाद वे हम तक पहुंच सके. रवि ने मुझसे कहा कि परिवार अपने गांव नहीं लौट सकता. “वे एक अस्पताल में थे और अब किसी और के घर में रह रहे हैं. हमने उनसे कहा कि वे अपने गांव ना लौटें क्योंकि वे वहां सुरक्षित नहीं हैं. जिन परिवारों पर हमला किया गया उनकी ओर से पादरी द्वारा दायर एफआईआर कारवां के पास है.

पादरी ने बताया कि कोइतुर और मौरिया समुदायों के दो परिवार, क्रमशः अपने हमलावरों को पहचान नहीं पा रहे थे. “उनके घर से कपड़े बाहर फेंके गए. और अगर उन्होंने धर्म नहीं छोड़ा तो उनसे चले जाने को कहा गया,'' पादरी ने कहा.

पादरी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय सदस्यों ने जिले में ईसाइयों, विशेष रूप से आदिवासी ईसाइयों को जबरदस्ती हिंदू धर्म में परिवर्तित करने के लिए एक सुसंगत अभियान चलाया था. उन्होंने कहा, "नवंबर 2019 से वे हमलों का सामना कर रहे हैं," वे उन आदिवासी परिवारों का जिक्र कर रहे थे जिन पर मई में हमला किया गया था. पादरी ने मुझे बताया कि 2019 के अंत में, पहला हमला होने के बाद परिवारों ने प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने का फैसला किया था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि हिंसा बंद हो जाएगी. लेकिन उन्हें जनवरी 2020 में दूसरे हमले का सामना करना पड़ा. पादरी ने 2020 में चुने गए गांव के सरपंच पर आरोप लगाया कि उन्होंने परिवार पर हमला करने वाले गांव के स्थानीय लोगों की निगरानी की. उन्होंने कहा कि सरपंच बीजेपी से जुड़े हैं. "पंचायत चुनावों के बाद ट्रैक्टर में सवार होकर एक भीड़ चर्च को गिराने के लिए यह कहते हुए आई कि आदिवासी लोग आपके चर्च जाते हैं," उन्होंने कहा. “यह रविवार की प्रार्थना के दौरान हुआ था. स्थानीय हिंदुओं ने तीन साल से लगातार मेरे साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न किया है.” 20 मई को दोनों परिवारों के घरों पर फिर से हमला किया गया.

कोक्कर पाल का हमला उसी पैटर्न को दिखाता है जिसे विदेशी और भारतीय मानवाधिकार समूहों द्वारा कई रिपोर्टों में नोट किया गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में भारत में ईसाई विरोधी हमलों की संख्या में इजाफा हुआ है और यहां तक कि नोवेल कोरोनावाइरस के चलते हुई देशव्यापी तालाबंदी के दौरान भी हमले हुए हैं. पिछले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे हमले हुए हैं. इन राज्यों में धार्मिक रूप से भेदभावपूर्ण धर्म परिवर्तन विरोधी कानून का मसौदा तैयार किया गया है. ये कानून दलितों और आदिवासियों जैसे वंचित समूहों को ईसाई धर्म में परिवर्तित होने को बहुत कठिन बना रहे हैं जबकि ठीक तभी घर वापसी या हिंदू धर्म में रूपांतरण की अनुमति दे रहे होते हैं. ये परिवर्तन अक्सर हिंसक होते हैं. छत्तीसगढ़ में ईसाइयों के खिलाफ हमलों के कई मामलों में पुलिस और प्रशासन ने अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है. ईसाइयों को पुलिस से कोई समर्थन नहीं मिलने के कारण स्थानीय लोग, जो उनके विरोधी हैं, उन्होंने समुदाय के सदस्यों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार किया और उनके घरों और चर्चों को ध्वस्त कर दिया.

अप्रैल 2020 में एक स्वतंत्र संघीय सरकार आयोग, संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग, ने मोदी सरकार के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की बढ़ती संख्या की निगरानी के बाद भारत पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की. यूएससीआईआरएफ पैनल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत को ''व्यवस्थित रूप से चल रही और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में संलग्न और उसे सहन करने के लिए'' खास ध्यान देने योग्य (पार्टिकुलर कंसर्न) देश के रूप में नामित किया जाना चाहिए. पार्टिकुलर कंसर्न या सीपीसी के देश वे हैं, जहां संबंधित सरकारें "वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता के सबसे खराब उल्लंघन करती या सहती हैं." संयुक्त राज्य की वर्तमान सीपीसी सूची में बर्मा, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया शामिल हैं. रिपोर्ट भारत में ईसाइयों के खिलाफ हमलों की बढ़ती संख्या पर विशेष ध्यान देती है. रिपोर्ट में कहा गया है, "अक्सर जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के तहत कम से कम 328 हिंसक घटनाओं के साथ, ईसाईयों के खिलाफ हिंसा में भी इजाफा हुआ है." इसमें आगे उल्लेख किया कि ऐसे उल्लंघन के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों और एजेंसियों को संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करने से रोक दिया जाना चाहिए.

आतिरा कोनिक्करा करवां की रिपोर्टिंग फेलो हैं.

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